केंद्रीय वित्त और कॉरपोरेट मामलों की मंत्री निर्मला सीतारमण ने सोमवार को हितधारकों और ट्रेड यूनियनों के प्रतिनिधियों के साथ आठवीं बजट पूर्व परामर्श बैठक की। इस दौरान केंद्रीय बजट 2025-26 की तैयारियों पर चर्चा की गई। बैठक के दौरान ट्रेड यूनियनों के दृष्टिकोण को समझने की कोशिश की गई।
बैठक में केंद्रीय वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी के साथ-साथ वित्त सचिव, आर्थिक मामलों के विभाग और निवेश व सार्वजनिक संपत्ति प्रबंधन विभाग (DIPAM) के सचिवों और श्रम मंत्रालय के प्रतिनिधियों सहित शीर्ष अधिकारियों ने भाग लिया। भारत सरकार में मुख्य आर्थिक सलाहकार भी मौजूद रहे।
01 फरवरी 2025 कोपेश किए जाने वाले केंद्रीय बजट 2025-26 में प्रमुख आर्थिक चुनौतियों का समाधान करने और विकास को बढ़ावा दिए जाने की उम्मीद है। इससे पहले सीतारमण ने गुरुवार को अपनी बजट-पूर्व परामर्श बैठकों की शृंखला के तहत वित्तीय क्षेत्र और पूंजी बाजार के हितधारकों से मुलाकात की।
वित्त मंत्रालय विशेषज्ञों, उद्योग जगत के नेताओं, अर्थशास्त्रियों और राज्य के अधिकारियों के साथ कई बजट-पूर्व परामर्श बैठकें आयोजित करता है। अगले वित्तीय वर्ष के लिए वार्षिक बजट तैयार करने की औपचारिक कवायद शुरू हो चुकी है। सीतारमण ने अब तक एमएसएमई, किसान संघों और अर्थशास्त्रियों सहित विभिन्न हितधारकों के साथ कई बैठकें की हैं।
बैठक के बाद पत्रकारों से बात करते हुए टीयूसीसी के राष्ट्रीय महासचिव एसपी तिवारी ने कहा कि सरकार को सार्वजनिक उपक्रमों के निजीकरण और निगमीकरण को रोकना चाहिए और अनौपचारिक श्रमिकों की सामाजिक सुरक्षा निधि के लिए सुपर रिच पर 2 प्रतिशत अतिरिक्त कर लगाना चाहिए। तिवारी ने यह भी मांग की कि कृषि श्रमिकों को सामाजिक सुरक्षा दी जानी चाहिए और उनकी न्यूनतम मजदूरी भी तय की जानी चाहिए।
भारतीय मजदूर संघ के संगठन सचिव (उत्तरी क्षेत्र) पवन कुमार ने कहा कि ईपीएस-95 के तहत न्यूनतम पेंशन को पहले कदम के रूप में 1,000 रुपये प्रति माह से बढ़ाकर 5,000 रुपये महीना किया जाना चाहिए और बाद में इसे वीडीए (परिवर्तनीय महंगाई भत्ता) से जोड़ा जाना चाहिए। उन्होंने यह भी सुझाव दिया कि आयकर छूट की सीमा बढ़ाकर 10 लाख रुपये की जानी चाहिए। साथ ही पेंशन से होने वाली आय को भी कर से मुक्त किया जाना चाहिए। कुमार ने मांग की कि सरकारी कर्मचारियों के वेतन ढांचे को संशोधित करने के लिए 8वें वेतन आयोग का तुरंत गठन किया जाए।
सीआईटीयू के राष्ट्रीय सचिव स्वदेश देव रॉय ने मांग की है कि 8वें वेतन आयोग का तुरंत गठन किया जाना चाहिए क्योंकि फरवरी 2014 में 7वें वेतन आयोग के गठन के बाद से 10 वर्ष से अधिक समय बीत चुका है। देव रॉय ने सीपीएसई में स्थायी कर्मचारियों की संख्या 1980 के दशक के 21 लाख से घटकर 2023-24 में 8 लाख से अधिक होने पर भी चिंता व्यक्त की।
एनएफआईटीयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष दीपक जायसवाल ने असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों को सामाजिक सुरक्षा लाभ प्रदान करने के लिए कर्मचारी भविष्य निधि (ईपीएफ) और कर्मचारी राज्य बीमा निगम (ईएसआईसी) के लिए अलग से बजट आवंटन की मांग की।