सरकार राजकोषीय बोझ घटाने और किसानों को उनकी फसलों की बेहतर कीमत दिलाने के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) को नए तरीके से पेश कर सकती है। साथ ही, किसानों की आय बढ़ाने के लिए खरीद में निजी कंपनियों को भी शामिल करने का प्रावधान हो सकता है।
एसबीआई की एक रिपोर्ट के मुताबिक, मौजूदा एमएसपी प्रणाली में कई खामियां हैं। इस पर जो भी राजनीतिकरण हो रहा है, उसका विकल्प तलाशने की जरूरत है, क्योंकि मौजूदा एमएसपी नीतियां व्यापार और निर्यात प्रतिस्पर्धात्मकता को कम करती हैं।
आजीविका क्रेडिट कार्ड लॉन्च करने पर जोर
सरकार आजीविका क्रेडिट कार्ड (एलसीसी) लॉन्च करने के साथ कृषि से संबंधित क्षेत्रों के लिए एक व्यापक ऋण गारंटी कोष बनाने की घोषणा कर सकती है। इससे छोटे व सीमांत किसानों की वित्तीय जरूरतें आसानी से पूरी हो सकेंगी।
महंगाई गरीबी के लिहाज से संवेदनशील मुद्दा
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जिन जीवाईएएन की घोषणा पहले की है, वे हैं...गरीब, युवा, अन्नदाता और नारी। इन चारों पर बजट में जरूर चर्चा होगी। बेरोजगारी के अलावा महंगाई भी इन चारों से सीधे तौर पर जुड़ी है, क्योंकि आम आदमी के किचन का बजट बिगड़ चुका है। इसके अलावा, विशेष रूप से उच्च खाद्य महंगाई ने सरकार और आरबीआई की चिंता बढ़ा दी है।
सब्जियों और अन्य खाद्य वस्तुओं की कीमतों में तेज उछाल के कारण लगातार तीन महीने तक नरम रहने के बाद खुदरा महंगाई जून में बढ़कर चार महीने के उच्च स्तर पर पहुंच गई। थोक महंगाई भी 16 माह में सबसे ज्यादा रही। इससे परिवारों के बचत पर भी असर पड़ा है।
आम आदमी के बजट के अलावा गरीबी के लिहाज से भी महंगाई काफी संवेदनशील मुद्दा है। सरकार का दावा है कि पिछले 10 वर्षों में 25 करोड़ लोग बहुआयामी गरीबी सूचकांक से बाहर आए हैं। डॉ. कोहली का कहना है कि ये लोग अब लोअर मिडिल क्लास में आ गए हैं। अगर उन पर महंगाई की थोड़ी भी मार पड़ी तो वे दोबारा गरीबी रेखा से नीचे जा सकते हैं। इसलिए, सरकार को इस बजट में कुछ ऐसे कदम उठाने होंगे, ताकि ये 25 करोड़ लोग गलती से दोबारा उसी स्थिति में न पहुंच जाएं।