केंद्र सरकार का राजकोषीय घाटा जुलाई 2022-23 के अंत में वार्षिक लक्ष्य के 20.5% को छू गया है, यह एक साल पहले 21.3% था। बुधवार को जारी आधिकारिक आंकड़ों में यह बात सामने आई है। ये आंकड़े सार्वजनिक वित्तीय मामलों में सुधार के संकेत दे रहे हैं। वास्तविक रूप से राजकोषीय घाटा व्यय और राजस्व के बीच का अंतर होता है। इस वित्तीय वर्ष में अप्रैल से जुलाई महीने की अवधि के दौरान यह 3,40,831 करोड़ रुपये था।
राजकोषीय घाटा सरकार पर बाजार की उधारी को दर्शाता है। लेखा महानियंत्रक (सीजीए) की ओर से जारी आंकड़ों के अनुसार करों सहित सरकार की प्राप्तियां 7.85 लाख करोड़ रुपये थी जो 2022-23 के लिए बजट अनुमानों (बीई) का 34.4% है। एक साल पहले की अवधि के दौरान यह लगभग 34.6% के करीब था।
सरकार का कर राजस्व अप्रैल से जुलाई महीने के दौरान 6.66 लाख करोड़ रुपये रहा यह बजट अनुमान का 34.4 प्रतिशत है। पिछले साल भी सरकार अपने वार्षिक बजट अनुमान का 34.2% राजस्व हासिल करने में सफल रही थी।
सीजीए के आंकड़ों के मुताबिक इस अवधि के दौरान केंद्र सरकार का कुल खर्च 11.26 लाख करोड़ रुपये रहा जाे वर्ष 2022-23 के बजट अनुमान का 28.6 प्रतिशत रहा। यह एक पूर्व की अवधि के आंकड़ों के लगभग बराबर है।
सीजीए की ओर से जारी आंकड़ों के मुताबिक जुलाई 2022 तक के केंद्र सरकार के मासिक खाते के अनुसार पूंजीगत व्यय पूरे वर्ष के बजट के अनुमानित लक्ष्य का 27.8 प्रतिशत रहा। पिछले वर्ष की इस अवधि में यह 27.8% था।