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जीएसटी राजस्व में कमी की भरपाई के लिए बाजार से कर्ज नहीं ले सकती केंद्र सरकार: सीतारमण

Mon, 12 Oct 2020 10:42 PM IST
‌डिंपल अलवधी बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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GST Council meeting - फोटो : ANI
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वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने सोमवार को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से माल एवं सेवा कर (जीएसटी) परिषद की बैठक की अध्यक्षता की। बैठक में वित्त राज्य मंत्री अनुराग ठाकुर, राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के वित्त मंत्रियों और केंद्र सरकार और राज्यों के वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित रहे।

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बैठक के बाद वित्तमंत्री सीतारमण ने प्रेसवार्ता की। यहां उन्होंने कहा कि आज की बैठक जीएसटी परिषद की 42वीं बैठक का आगे का हिस्सा थी, जिसमें एक एजेंडा आइटम 9ए पर चर्चा की गई। सीतारमण ने बताया कि बैठक में ऋण लेने और उपकर के विस्तार आदि के बारे में चर्चा हुई।

वित्त मंत्री ने कहा कि राज्यों के जीएसटी राजस्व में कमी की भरपाई के लिए केंद्र सरकार बाजार से कर्ज नहीं उठा सकती है क्योंकि इससे बाजार में कर्ज की लागत बढ़ सकती है। राज्यों के जीएसटी राजस्व में आने वाली कमी की भरपाई के तौर तरीकों को लेकर आम सहमति नहीं बन पाई।

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वित्त मंत्री सीतारमण ने कहा कि मुआवजे का भुगतान करने के लिए उपकर का संग्रह अपर्याप्त है। यह पूरी तरह से साफ है और चूंकि यह ऐसी चीज है जिसकी कभी परिकल्पना नहीं की गई थी, इसलिए इस कमी को अब उधार लेकर पूरा किया जाएगा।

सीतारमण ने कहा कि हम एक आम सहमति पर पहुंचने में सक्षम नहीं हो पाए। मैंने सभी राज्यों से अपील की कि हमें उन राज्यों को जल्दी से जवाब देना होगा जो जमीन पर कोविड-19 से जंग लड़ रहे हैं और जिन्हें पैसे की जरूरत है। आज  जीएसटी काउंसिल की बैठक इसी तरह समाप्त हुई। 

वित्त मंत्री सीतारमण ने कहा कि ऐसे समय में जब देश व्यापार के लिए निवेश और उधार लेने के लिए अधिक राशि की ओर देख रहा है, हम उधार की बढ़ी लागत वहन नहीं कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि अगर राज्य उधार लेते हैं तो स्थिति इतनी गंभीर नहीं होगी। 

उन्होंने कहा कि राज्यों के उधार लेने का मतलब यह नहीं है कि स्थिति अफरा-तफरी वाली हो जाएगी। वित्तमंत्री ने कहा कि हम राज्यों को सुविधा देंगे जिससे कुछ राज्यों को उच्च दर पर ब्याज का भुगतान करना पड़ेगा और बाकी राज्यों को तार्किक दर पर उधार मिल सकेगा। 

जीएसटी क्षतिपूर्ति राजस्व में 2.35 लाख करोड़ रुपये की कमी रहने का अनुमान
सूत्रों के मुताबिक, जीएसटी परिषद की 43वीं बैठक का एकसूत्रीय एजेंडा क्षतिपूर्ति के मुद्दे पर आगे का रास्ता निकालना है। परिषद ने पिछले सप्ताह हुई आखिरी बैठक में यह निर्णय लिया था कि कार, तंबाकू आदि जैसे विलासिता या अहितकर उत्पादों पर जून 2022 के बाद भी उपकर लगाया जाएगा। हालांकि उक्त बैठक में क्षतिपूर्ति के मुद्दे पर आम सहमति नहीं बन पाई थी।

चालू वित्त वर्ष में जीएसटी क्षतिपूर्ति राजस्व में 2.35 लाख करोड़ रुपये की कमी रहने का अनुमान है। केंद्र सरकार ने अगस्त में राज्यों को दो विकल्प दिया है। पहले विकल्प के तहत रिजर्व बैंक के द्वारा 97 हजार करोड़ रुपये के कर्ज के लिए विशेष सुविधा दिए जाने, तथा दूसरे विकल्प के तहत पूरे 2.35 लाख करोड़ रुपये बाजार से जुटाने का प्रस्ताव है।

केंद्र सरकार का कहना है कि जीएसटी क्षतिपूर्ति राजस्व में अनुमानित कमी में महज 97 हजार करोड़ रुपये के लिये जीएसटी क्रियान्वयन जिम्मेदार है, जबकि शेष कमी का कारण कोरोना वायरस महामारी है। कुछ राज्यों की मांग के बाद पहले विकल्प के तहत उधार की विशेष ऋण व्यवस्था को 97 हजार करोड़ रुपये से बढ़ाकर 1.10 लाख करोड़ रुपये कर दिया गया है।

जीएसटी परिषद की 42वीं बैठक के बाद संवाददाताओं को जानकारी देते हुए वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा था कि जिन राज्यों को एकीकृत जीएसटी (आईजीएसटी) के हिस्से में 2017-18 के लिए कम प्राप्त हुआ, केंद्र उनके लिए अगले सप्ताह संचयी रूप से 24,000 करोड़ रुपये जारी किया जाएगा।

उन्होंने कहा कि 'क्षतिपूर्ति उपकर पांच साल के बाद भी यानी जून 2022 के बाद भी लगाए जाने का निर्णय किया गया है। यह उतनी अवधि के लिए लगाया जाएगा, जो राजस्व अंतर को पूरा करने के लिए जरूरी होगा।' साथ ही केंद्रीय मंत्री ने कहा कि जीएसटी परिषद ने जून 2022 के बाद भी जीएसटी उपकर जारी रखने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। पहले जीएसटी उपकर लगाए जाने की समय सीमा जून 2022 थी।

राज्यों को दिए थे दो विकल्प
सीतारमण ने कहा कि 21 राज्यों सरकारों ने केंद्र द्वारा सुझाए गए दो विकल्पों में से एक को स्वीकार किया, लेकिन 10 ने सहमति नहीं दी। केंद्र ने राज्यों को रिजर्व बैंक द्वारा उपलब्ध कराई जाने वाली विशेष सुविधा के जरिए 97,000 करोड़ रुपये का कर्ज जुटाने या बाजार से 2.35 लाख करोड़ रुपये जुटाने के दो विकल्प दिए थे। 

सितंबर में जीएसटी संग्रह में सुधार
मालूम हो कि सितंबर में जीएसटी संग्रह में सुधार देखने को मिला। सितंबर में माल एवं सेवा कर (जीएसटी) संग्रह 95,480 करोड़ रुपये रहा। जबकि इससे पहले अगस्त में इसमें एक फीसदी की कमी आई थी और यह 86,449 करोड़ रुपये रहा था। यानी सितंबर में यह 9031 करोड़ ज्यादा रहा है। जुलाई में यह आंकड़ा 87,422 करोड़ रुपये था। जीएसटी संग्रह जून के 90,917 करोड़ रुपये था।

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