भारतीय शेयर बाजार से विदेशी संस्थागत निवेशकों ने तीन दिन (17-19 जनवरी) में 24,000 करोड़ रुपये की निकासी की है। हालांकि, पूरे जनवरी महीने में 13,000 करोड़ रुपये की निकासी की है। इससे पहले इन निवेशकों ने दिसंबर में 66,134 करोड़ और नवंबर में 9,000 करोड़ के शेयरों की खरीदी की थी। इन निवेशकों ने डेट में जनवरी में 15,647 करोड़ रुपये का निवेश किया है। दिसंबर में डेट में 18,302 करोड़ व नवंबर में 14,860 करोड़ निवेश किया था। डेट मे इसलिए निवेश बढ़ रहा है क्योंकि जेपी मॉर्गन जून से अपने बेंचमार्क में भारतीय बॉन्ड को शामिल करेगा। एफआईआई ने भारत के अलावा अन्य उभरते देशों ताइवान, दक्षिण कोरिया और हॉन्गकॉन्ग के बाजारों से भी निकासी की है। अमेरिकी बॉन्ड की ब्याज दर में वृद्धि से एफआईआई ने बाजारों से पैसे निकाले हैं।
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पांच कंपनियों की पूंजी 1.68 लाख करोड़ घटी
शेयर बाजार में शीर्ष 10 कंपनियों में से पांच की पूंजी पिछले हफ्ते 1.68 लाख करोड़ घट गई। सबसे ज्यादा एचडीएफसी बैंक को नुकसान हुआ। इस दौरान बीएसई में 1,145 अंकों की गिरावट रही। एचडीएफसी बैंक की पूंजी 1.22 लाख करोड़ घटकर 11.22 लाख करोड़ रुपये रही। शेयर 12% से ज्यादा गिरकर बंद हुआ। रिलायंस इंडस्ट्रीज की पूंजी 18,199 करोड़ घटकर 18.35 लाख करोड़, एचयूएल की पूंजी 17,845 करोड़ घटकर 5.80 लाख करोड़ रही।
वैश्विक अनिश्चितता के बावजूद वस्तु सेवा निर्यात बढ़कर 765.6 अरब डॉलर
मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, पिछले कैलेंडर साल में वस्तुओं का निर्यात 4.71 फीसदी घटकर 431.9 अरब डॉलर पर आ गया। हालांकि, सेवाओं का निर्यात 7.88 फीसदी बढ़कर 333.8 अरब डॉलर पहुंच गया। इस अवधि में वस्तुओं का आयात भी सात फीसदी घटकर 667.73 अरब डॉलर रहा। 2022 में यह 720.2 अरब डॉलर था। आरबीआई की ओर से जारी सेवा क्षेत्र के आंकड़े नवंबर, 2023 तक के हैं। दिसंबर, 2023 का आंकड़ा मंत्रालय का एक अनुमान है।
ये रहे प्रमुख निर्यात गंतव्य: भारत के निर्यात गंतव्यों में अमेरिका, संयुक्त अरब अमीरात, नीदरलैंड, बांग्लादेश, ब्रिटेन व जर्मनी शामिल।
लाल सागर संकट से वैश्विक व्यापार पर पड़ सकता है असर
रूस-यूक्रेन युद्ध, इस्राइल-हमास संघर्ष और मालवाहक जहाजों पर यमन स्थित हुती विद्रोहियों के हमलों के कारण लाल सागर व्यापार मार्ग संकट से माल लदान प्रभावित हुआ है। अंतरराष्ट्रीय व्यापार विशेषज्ञों के अनुसार, अगर ये चुनौतियां लंबे समय तक बनी रहीं, तो इसका वैश्विक व्यापार पर बड़ा प्रभाव पड़ेगा।