उद्योग निकाय फिक्की (FICCI) ने वित्त मंत्रालय को अपने बजट-पूर्व सुझाव में वित्तीय वर्ष 26 के दौरान पूंजीगत व्यय में 15 प्रतिशत की वृद्धि पर विचार करने का आग्रह किया है। उद्योग निकाय कहा है कि आर्थिक प्रगति को गति देने और संतुलित विकास सुनिश्चित करने के लिए भौतिक, सामाजिक और डिजिटल बुनियादी ढांचे में निवेश जरूरी है। 2024-25 के केंद्रीय बजट में राजस्व व्यय पर उत्पादक खर्च को प्राथमिकता देते हुए पूंजीगत व्यय के लिए रिकॉर्ड 11.11 लाख करोड़ रुपये आवंटित किए गए।
फिक्की के अनुसार भूमि, श्रम और बिजली में सुधार दीर्घकालिक विकास के लिए महत्वपूर्ण हैं। फिक्की ने आम सहमति बनाने और इन क्षेत्रों में सुधारों को आगे बढ़ाने के लिए जीएसटी परिषद के समान अंतर-राज्यीय संस्थागत प्लेटफॉर्म बनाने का भी प्रस्ताव दिया है। इसके अलावे, फिक्की ने कहा कि कर मामलों के लिए एक स्वतंत्र विवाद समाधान मंच शुरू किया जाना चाहिए, इससे करदाताओं का विश्वास बढ़ेगा, मुकदमेबाजी कम होगी और समाधान प्रक्रियाओं में तेजी आएगी। भारत की ओर से 2070 तक शुद्ध-शून्य उत्सर्जन प्राप्त करने की प्रतिबद्धता के साथ, फिक्की ने हरित संक्रमण को बढ़ावा देने वाली नीतियों की आवश्यकता पर जोर दिया है।
FICCI ने डेकेयर खर्चों के लिए कर छूट प्रदान करके और विनिर्माण केंद्रों में महिलाओं के लिए छात्रावास स्थापित करने के लिए सीएसआर निधियों का उपयोग करके कार्यबल में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने के महत्व के बारे में बताया है। डे-केयर सेंटरों को प्रमाणित करने और उनकी निगरानी करने के लिए एक वैधानिक निकाय बनाने से महिलाओं की आर्थिक भागीदारी को और बढ़ावा मिल सकता है। रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता को मजबूत करने के लिए, FICCI ने घरेलू उत्पादन को प्राथमिकता देने, AI और क्वांटम कंप्यूटिंग जैसी उन्नत तकनीकों में निवेश करने और हथियारबंद ड्रोन झुंड विकसित करने का प्रस्ताव दिया है। इसके अतिरिक्त, वैश्विक रक्षा बाजारों में भारत की स्थिति को बढ़ावा देने के लिए एक रक्षा निर्यात संवर्धन एजेंसी की स्थापना का भी सुझाव दिया गया है।
कृषि उत्पादकता बढ़ाने के लिए, FICCI ने 100 पिछड़े जिलों को लक्षित करके एक कृषि उपज मिशन शुरू करने और अगले पांच वर्षों में 30 लाख कृषि तकनीक से जुड़े विशेषज्ञों को प्रशिक्षित करने के लिए एक राष्ट्रीय कार्यक्रम विकसित करने का सुझाव दिया है। बागवानी क्लस्टरों में निजी क्षेत्र की भागीदारी को प्रोत्साहित करना और कटाई के बाद की तकनीकों को आगे बढ़ाना भी कृषि आय में उल्लेखनीय सुधार ला सकता है। आयात पर निर्भरता कम करने के लिए, फिक्की ने भारत के इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत करने के लिए घटकों के स्थानीय विनिर्माण के लिए एक रोडमैप विकसित करने की सिफारिश की है।
फिक्की ने बुनियादी साक्षरता और संख्यात्मकता को बढ़ावा देने के लिए प्रधानमंत्री के नेतृत्व में एक राष्ट्रीय अभियान चलाने का प्रस्ताव रखा है। अभिभावकों को स्कूल फीस के लिए ई-रुपी वाउचर देने और शैक्षणिक संस्थानों के बीच प्रतिस्पर्धा को बढ़ावा देने से परिणाम बेहतर हो सकते हैं। इन पहलों का उद्देश्य पूरे देश में प्रारंभिक वर्षों की शिक्षा को बेहतर बनाना है। भारत का सार्वजनिक स्वास्थ्य सेवा व्यय, हालांकि सुधर रहा है, लेकिन OECD और BRICS के औसत से काफी नीचे है। फिक्की ने 2025 तक सार्वजनिक स्वास्थ्य व्यय को सकल घरेलू उत्पाद के 2.5 प्रतिशत तक बढ़ाने, निवारक स्वास्थ्य सेवा को प्रोत्साहित करने और स्वास्थ्य बीमा के लिए कर लाभ बढ़ाने की सिफारिश की है। अस्पतालों को औद्योगिक उपक्रम के रूप में मान्यता देने और डायग्नोस्टिक इंफ्रास्ट्रक्चर व जीवन रक्षक उपकरणों की कीमतों में गिरावट से जुड़ी नीतियों से स्वास्थ्य सेवा वितरण में और मजबूती आ सकती है।