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US Fed Row: ट्रंप की धमकियों के खिलाफ एकजुट हुए दुनिया के दिग्गज बैंकर्स, जेरोम पॉवेल को मिला इन देशों का साथ

Tue, 13 Jan 2026 05:59 PM IST
कुमार विवेक बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

Federal Reserve Row: अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप और फेड प्रमुख जेरोम पॉवेल के बीच विवाद गहराया। ईसीबी और बैंक ऑफ इंग्लैंड समेत दुनिया के नौ बड़े केंद्रीय बैंकों ने पॉवेल की स्वायत्तता का समर्थन किया। जानिए क्यों फेड की स्वतंत्रता वैश्विक आर्थिक स्थिरता के लिए जरूरी है।
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फेड प्रमुख जेरोम पॉवेल और डोनाल्ड ट्रंप। - फोटो : Agency
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विस्तार
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अमेरिकी फेडरल रिजर्व (यूएस फेड) की स्वतंत्रता को लेकर छिड़ा विवाद अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एक बड़े कूटनीतिक और आर्थिक मोर्चे में तब्दील हो गया है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से फेड प्रमुख जेरोम पॉवेल के खिलाफ आपराधिक जांच और कानूनी कार्रवाई की धमकियों के बीच, दुनिया भर के शीर्ष केंद्रीय बैंकरों ने पॉवेल के प्रति अपनी 'पूर्ण एकजुटता' जाहिर की। वैश्विक बैंकिंग जगत का यह अप्रत्याशित कदम न केवल पॉवेल का व्यक्तिगत समर्थन है, बल्कि यह केंद्रीय बैंकों की स्वायत्तता को बचाने की दिशा में उठाया गया महत्वपूर्ण करदम है।

दुनिया के शीर्ष केंद्रीय बैंक क्यों एक साथ आए?

यूरोपीय सेंट्रल बैंक (ईसीबी) की वेबसाइट पर जारी एक संयुक्त बयान में दुनिया की सबसे प्रभावशाली वित्तीय संस्थाओं के प्रमुखों ने पॉवेल के कार्यकाल और उनकी निष्ठा की सराहना की है। इस बयान पर हस्ताक्षर करने वालों में यूरोपीय सेंट्रल बैंक की अध्यक्ष क्रिस्टीन लेगार्ड और बैंक ऑफ इंग्लैंड के गवर्नर एंड्रयू बेली जैसे दिग्गज शामिल हैं।

इस समर्थन पत्र में शामिल प्रमुख देशों के बैंक प्रमुख इस प्रकार हैं-

  • यूरोप और ब्रिटेन: क्रिस्टीन लेगार्ड (ईसीबी) और एंड्रयू बेली (बैंक ऑफ ऑफ इंग्लैंड)।
  • स्कैंडिनेविया और अन्य: स्वीडन, डेनमार्क और स्विट्जरलैंड के केंद्रीय बैंक प्रमुख।
  • कॉमनवेल्थ और एशिया: ऑस्ट्रेलिया, कनाडा और दक्षिण कोरिया के गवर्नर।
  • लैटिन अमेरिका: ब्राजील के केंद्रीय बैंक के प्रमुख।
  • अंतरराष्ट्रीय निकाय: बैंक फॉर इंटरनेशनल सेटलमेंट्स (बीआईएस) के बोर्ड अध्यक्ष और महाप्रबंधक।

फिलहाल बैंक ऑफ जापान इस सूची में शामिल नहीं है, हालांकि बयान में कहा गया है कि आने वाले समय में और भी हस्ताक्षरकर्ता इसमें जुड़ सकते हैं।

क्या है ट्रंप-पॉवेल विवाद की जड़?

यह विवाद आधिकारिक तौर पर फेड इमारतों के नवीनीकरण की लागत पर पॉवेल की कांग्रेस में दी गई गवाही से शुरू हुआ था, इसकी जांच अब अमेरिकी न्याय विभाग कर रहा है। हालांकि, जेरोम पॉवेल ने इन आरोपों को हमले का बहाना करार दिया है। पॉवेल का सीधा आरोप है कि ट्रंप प्रशासन इस जांच के जरिए फेड की ब्याज दर नीति पर नियंत्रण हासिल करना चाहता है। ट्रंप ने लंबे समय से फेड और पॉवेल की इस बात के लिए आलोचना की है कि वे उनकी मांग के अनुसार दरों में कटौती करने में तेजी नहीं दिखा रहे हैं।

केंद्रीय बैंकर्स ने किस खतरे की दी चेतावनी?

केंद्रीय बैंकरों ने साफ चेतावनी दी है कि केंद्रीय बैंकों की स्वतंत्रता नागरिकों के हितों में मूल्य, वित्तीय और आर्थिक स्थिरता की आधारशिला है। अर्थशास्त्रियों का मानना है कि यदि फेड अपनी स्वायत्तता खो देता है और राजनीतिक दबाव में झुक जाता है, तो इसके गंभीर परिणाम हो सकते हैं-

  • विश्वसनीयता को नुकसान: महंगाई से लड़ने वाले एक स्वतंत्र निकाय के रूप में फेड की साख खत्म हो जाएगी।
  • ब्याज दरों में बढ़ोतरी: बाजार में अनिश्चितता बढ़ने के कारण निवेशक अमेरिकी ट्रेजरी में निवेश के लिए अधिक ब्याज दरों की मांग कर सकते हैं, जिससे वैश्विक ऋण बाजार प्रभावित होगा।

दुनियाभर के केंद्रीय बैंकों का जेरोम पॉवेल के समर्थन में आना यह बताता है कि वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए 'नियम आधारित जवाबदेही' और 'राजनीतिक हस्तक्षेप से मुक्ति' जरूरी है। जहां एक ओर ट्रंप प्रशासन फेड पर लगाम कसने की कोशिश कर रहा है, वहीं दूसरी ओर अंतरराष्ट्रीय समुदाय ने साफ कर दिया है कि पॉवेल का मिशन जनहित और अनिवार्य जनादेश पर आधारित रहा है। आने वाले हफ्तों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि क्या अन्य प्रमुख केंद्रीय बैंक भी पॉवेल के समर्थन में आते हैं।

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