अमेरिका के केंद्रीय बैंक का एक फैसला गुरुवार को भारतीय बाजार पर भारी पड़ गया। फेड की ओर से 2025 में ब्याज दरों में कम कटौती का अनुमान जताए जाने के बाद अमेरिकी बेंचमार्क सूचकांकों में बड़ी बिकवाली दिखी। बुधवार को डाओ (2.58%), एसएंडपी 500 (2.95%) और नैस्डेक (3.56%) सूचकांक बड़ी गिरावट के साथ बंद हुए। अमेरिकी बाजार की इस गिरावट का असर भारतीय बाजार पर भी पड़ा। पहले से गिरावट की मार झेल रहे भारतीय सूचकांक सेंसेक्स और निफ्टी भी लगभग एक प्रतिशत तक नीचे फिसल गए। दोपहर 12 बजकर 30 मिनट पर सेंसेक्स 829.03 (1.03%) अंक फिसलकर 79,334.71 पर कारोबार करता दिखा। वहीं, निफ्टी 213.30 (0.88%) अंक फिसलकर 23,985.55 पर पहुंच गया। अमेरिका केंद्रीय बैंक फेडरल रिजर्व ने ब्याज दरों में कटौती पर फिलहाल क्या फैसला लिया है, 2025 में अर्थव्यवस्था के प्रदर्शन पर फेड अध्यक्ष क्या बोले हैं, आइए विस्तार से जानें।
फेड ने नीतिगत ब्याज दरों में एक चौथाई अंक कटौती का लिया फैसला
अमेरिका के केंद्रीय बैंक फेडरल रिजर्व ने बुधवार को ब्याज दरों में एक चौथाई (0.25) अंक की कटौती की। सितंबर में उधार लेने की लागत कम करने के बाद से फेड की ओर से की गई यह तीसरी कटौती है। फेड के इस कदम के बाद अमेरिकी बेंचमार्क उधार दर 4.25%-4.5% के दायरे में आ गई है, यह बीते दो वर्षों का निम्नतम स्तर है। फेड के अध्यक्ष जेरोम पॉवेल ने कहा कि नवीनतम दर कटौती का फैसला बहुत कठिन था। बैठक के दौरान अधिकारियों के दिमाग में हाल ही में आए मुद्रास्फीति के आंकड़े थे। क्लीवलैंड फेड के अध्यक्ष बेथ हैमैक एकमात्र एैसे व्यक्ति रहे जिन्होंने बुधवार के फैसले पर असहमति जताई और ब्याज दरों को मौजूदा स्तरों पर रखने के पक्ष में रहे। फेड ने संकेत दिया कि वह भविष्य में दरों को स्थिर रखने की कोशिश करेगा, क्योंकि मुद्रास्फीति केंद्रीय बैंक के 2% लक्ष्य से लगातार ऊपर बनी हुई है। अमेरिकी अर्थव्यवस्था ने कर्ज की ऊंची लागत के बीच उल्लेखनीय रूप से खुद को लचीला साबित किया है।
2025 में केवल दो दर कटौती करने की फैड की योजना
फेड अधिकारियों ने अपने नवीनतम पूर्वानुमानों के अनुसार अगले वर्ष यानी 2025 में केवल दो दर कटौती की योजना बनाई है। पिछली बार सितंबर में चार कटौतियों का अनुमान लगाया गया था। अधिकारियों ने यह भी अनुमान लगाया है कि 2025 में आर्थिक वृद्धि थोड़ी मजबूत होगी, बेरोजगारी थोड़ी कम होगी और मुद्रास्फीति पहले की अपेक्षा अधिक रहेगी। अनुमानों से पता चलता है कि फेड अधिकारियों को उम्मीद है कि अगले साल अमेरिकी अर्थव्यवस्था में उछाल आएगा, मंदी की कोई संभावना नहीं है। उन्हें उम्मीद है कि मुद्रास्फीति 2027 तक 2% को नहीं छूएगी।
ब्याज दरों पर फेड के फैसले के बाद बाजार में दिखा उथल-पुथल
पॉवेल ने बैठक के बाद आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में अमेरिकी अर्थव्यवस्था की तारीफ करते हुए कहा कि बीते साल यह मजबूत रही। पॉवेल ने अगले साल ब्याज दरों में कटौती की संभावना कम होने की पुष्टि की। इससे बाजार में भारी उथल-पुथल मच गई और डाओ 1,000 अंक से अधिक गिर गया। इसका असर भारत समेत दुनिया भर के बाजार पर पड़ा और बेंचमार्क सूचकांक बड़ी गिरावट के साथ कारोबार करते दिखे। कुछ निवेशक अगले साल मजबूत वृद्धि की संभावनाओं से उत्साहित हैं। यह वृद्धि नवनिर्वाचित राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की नीतियों से आ सकती है।
डोनाल्ड ट्रंप के लौटने से आर्थिक नीतियों में दिख सकता है बदलाव
डोनाल्ड ट्रंप ने 2017 के कर कटौती को आगे बढ़ाने और विनियमनों में बदलाव का वादा कर रखा है। अगर इन नीतियों को लागू किया जाता है तो विकास को बढ़ावा मिलेगा। हालांकि, मेक्सिको, कनाडा और चीन से आने वाले सामानों पर भारी टैरिफ लगाने की ट्रम्प की धमकी अर्थव्यवस्था को पटरी से उतार सकती है, क्योंकि ट्रम्प द्वारा लगाए गए कठोर टैरिफ से व्यापक रूप से मुद्रास्फीति बढ़ने की आशंका है। फेड के एक पूर्व अध्यक्ष ने सीएनएन को बताया कि अमेरिकी अर्थव्यवस्था पहले ही "सॉफ्ट लैंडिंग" की असाधारण दुर्लभ उपलब्धि हासिल कर चुकी है- यह एक ऐसी स्थिति जिसमें मंदी के बिना मुद्रास्फीति पर काबू पा लिया जाता है- और अब बस इसे बनाए रखने की जरूरत है।
फेड के फैसले के बाद भारतीय बाजार पर क्या असर पड़ा?
फेड के फैसले के बाद अमेरिकी बाजार तो टूटे ही भारतीय शेयर बाजार भी कमजोर पड़ गए। गुरुवार को भारतीय बेंचमार्क इक्विटी इंडेक्स में भारी गिरावट दर्ज की गई, जिसमें सेंसेक्स 1,000 अंक से अधिक गिर गया और निफ्टी 24,000 अंक से नीचे आ गया। यह गिरावट अमेरिकी फेडरल रिजर्व की ओर से 2025 में ब्याज दरों में कम कटौती के अनुमान के बाद आई है। भारतीय बाजार में गिरावट के बीच बीएसई पर सूचीबद्ध सभी कंपनियों का बाजार पूंजीकरण 5.94 लाख करोड़ रुपये घटकर 446.66 लाख करोड़ रुपये रह गया।
बैंकिंग शेयरों में दिखी कमजोरी
एचडीएफसी बैंक, इंफोसिस, आईसीआईसीआई बैंक, रिलायंस इंडस्ट्रीज, एसबीआई और एचसीएल टेक के फिसलने से सेंसेक्स में 1000 अंकों की गिरावट दर्ज की गई। एक्सिस बैंक, एमएंडएम, कोटक बैंक और बजाज फाइनेंस ने भी गिरावट में योगदान दिया। अमेरिका की ब्याज दरों के प्रति संवेदनशील घरेलू आईटी फर्म, जो अपने राजस्व का एक बड़ा हिस्सा अमेरिका से प्राप्त करती हैं, 5% तक कम होकर खुलीं, जिनमें एलटीआईमाइंडट्री, इंफोसिस और विप्रो शामिल हैं। इस बीच, उतार-चढ़ाव से जुड़ा इंडिया वीआईएक्स सूचकांक 5% बढ़कर 14.37 पर पहुंच गया।