वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण और उनकी टीम।
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भारत के सरकारी बैंकों को लेकर वित्त मंत्रालय एक बड़ी योजना पर काम कर रहा है। सरकार न केवल इन बैंकों में विदेशी निवेश का रास्ता और चौड़ा करने वाली है, बल्कि अगले पांच वर्षों में इनकी ताकत को दोगुना करने का खाका भी तैयार कर लिया गया है। वित्तीय सेवा सचिव एम. नागराजू ने सोमवार को बैंकों के भविष्य को लेकर सरकार की मंशा के बारे में बताया है।
आइए वित्तीय सेवा सचिव के हवाले से जानते हैं चार बड़ी बातें जो बैंकिंग सेक्टर और निवेशकों के लिए महत्वपूर्ण हैं:
1. सरकारी बैंकों में 49% विदेशी निवेश की तैयारी
सरकार सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों में एफडीआई (एफडीआई) की सीमा को मौजूदा 20% से बढ़ाकर 49% करने पर विचार कर रही है। एम. नागराजू ने बताया कि बैंकों के कैपिटल बेस (पूंजी आधार) को मजबूत करने के लिए यह कदम उठाया जा सकता है और फिलहाल मंत्रालयों के बीच इस पर बातचीत चल रही है। अभी निजी बैंकों में 74% तक एफडीआई की अनुमति है, जबकि सरकारी बैंकों में यह सीमा 20% ही है।
2. अगले पांच साल में दोगुने होंगे बैंक
सरकार का विजन है कि अगले पांच वर्षों में सरकारी बैंकों का एसेट साइज (कुल संपत्ति) दोगुना हो जाए।
- सितंबर 2025 के अंत तक इन बैंकों की कुल संपत्ति लगभग 261 लाख करोड़ रुपये थी।
- बैंकों ने पिछले साल बाजार से करीब 45,000 करोड़ रुपये जुटाए हैं और अगले वित्तीय वर्ष में उनकी योजना 45,000 से 50,000 करोड़ रुपये और जुटाने की है।
3. आईडीबीआई बैंक में विनिवेश जल्द
आईडीबीआई बैंक के निजीकरण का इंतजार कर रहे निवेशकों के लिए अच्छी खबर है। वित्तीय सेवा सचिव ने बताया कि बैंक की बिक्री के लिए इसी महीने या अगले महीने वित्तीय बोलियां मंगवाई जाएंगी।
- सरकार और एलआईसी (एलआईसी) मिलकर बैंक में अपनी कुल 60.72% हिस्सेदारी बेच रहे हैं।
- खरीदने में दिलचस्पी रखने वाले निवेशकों को गृह मंत्रालय से सिक्योरिटी क्लियरेंस मिल चुका है और आरबीआई ने भी उन्हें 'फिट एंड प्रॉपर' घोषित कर दिया है।
4. देश को चाहिए तीन-चार विशालकाय बैंक
सरकार का मानना है कि भारत जैसी विशाल अर्थव्यवस्था के लिए छोटे-छोटे कई बैंकों के बजाय कुछ बहुत बड़े बैंकों की जरूरत है। सचिव नागराजू ने स्पष्ट कहा कि हमारे देश के आकार को देखते हुए हमें तीन से चार बड़े बैंकों की जरूरत है।