सरकार को उर्वरक सब्सिडी देने के बजाय किसानों के लिए उत्पादन से जुड़ी प्रोत्साहन (पीएलआई) योजना लानी चाहिए क्योंकि इससे (उर्वरक सब्सिडी) से किसानों को लाभ होने के बजाय नुकसान हो रहा है। पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के कार्यकाल में योजना आयोग के पूर्व उपाध्यक्ष रहे मोंटेक सिंह अहलूवालिया ने यह सुझाव दिया है।
एक विशेष बातचीत में अहलूवालिया ने एएनआई को बताया कि उर्वरकों जैसे विशिष्ट इनपुट का समर्थन करने के बजाय सब्सिडी के लाभों को सीधे किसानों तक पहुंचाना जरूरी है। उन्होंने बताया कि उर्वरक सब्सिडी न केवल उर्वरक उद्योग को लाभ पहुंचा रही है, बल्कि अत्यधिक उपयोग के कारण मिट्टी के स्वास्थ्य को भी नुकसान पहुंचा रही है।
उन्होंने कहा, "कई कृषि अर्थशास्त्रियों का मानना है कि उर्वरक सब्सिडी पर बड़ी रकम खर्च करने के बजाय, हम किसानों को उत्पादन से जुड़ी प्रोत्साहन राशि दे सकते हैं। कम से कम, हमें केवल एक इनपुट पर सब्सिडी देना बंद कर देना चाहिए, क्योंकि इससे विकृतियां पैदा होती हैं।"
अहलूवालिया ने आगे का सबसे अच्छा तरीका निर्धारित करने के लिए किसानों, अर्थशास्त्रियों और उद्योग विशेषज्ञों से परामर्श लेने का सुझाव दिया।
उन्होंने सरकार की पीएलआई योजनाओं के व्यापक निहितार्थों पर भी चर्चा की, जिनका उद्देश्य विनिर्माण को बढ़ावा देना है। अहलूवालिया ने कहा कि मोबाइल विनिर्माण और सेमीकंडक्टर जैसे नए उद्योगों के लिए पीएलआई सफल हो सकता है, पर परिधान जैसे पारंपरिक क्षेत्रों में इसका इस्तेमाल नहीं होना चाहिए।
अहलूवालिया ने कहा, "पीएलआई को उन उद्योगों पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए जहां हमारे पास अनुभव की कमी है, जैसे चिप्स, फैब और बैटरी विनिर्माण। परिधान एक ऐसा क्षेत्र है जिसे हम पहले से ही अच्छी तरह से जानते हैं, इसलिए इसमें पीएलआई का कोई मतलब नहीं है। ऐसे क्षेत्रों में समस्याएं अक्सर रसद, श्रम कानून या व्यापार करने में आसानी से जुड़ी होती हैं, न कि सब्सिडी की कमी से।"
उन्होंने फॉक्सकॉन के जरिए एपल जैसे प्रमुख निर्माताओं को भारत में उत्पादन स्थापित करने के लिए सफलतापूर्वक आकर्षित करने के लिए सरकार की सराहना की। उन्होंने पांच या छह प्रमुख नए उद्योगों की पहचान करने और वैश्विक निर्माताओं को लाने के लिए प्रोत्साहन देने की सिफारिश की। विनिर्माण बनाम सेवाओं पर ध्यान केंद्रित करने से जुड़ी बात पर अहलूवालिया पूर्व आरबीआई गवर्नर रघुराम राजन से सहमत दिखे। उन्होंने कहा कि भारत को सेवाओं में अपनी ताकत का लाभ उठाना चाहिए लेकिन विनिर्माण को पीछे नहीं छोड़ा जा सकता है।
उन्होंने कहा, "यह विनिर्माण और सेवाओं के बीच चयन का समय नहीं है। भारत को दोनों क्षेत्रों में अपनी ताकत का इस्तेमाल करना चाहिए।" अहलूवालिया ने अपनी टिप्पणियों में नीति निर्माण के लिए अधिक सूक्ष्म दृष्टिकोण की आवश्यकता पर बल दिया।