सेतिया का कहना है कि चीन में चावल का निर्यात खुलने पर अभी से खुश होना जल्दबाजी होगी। उनके मुताबिक, भारतीय चावल और चीन के चावल में अंतर है। भारतीय चावल बनाने पर जहां फैलता है, वहीं चीनी चावल चिपकता है।
दोनों के स्वाद में भी काफी अंतर है। ऐसे में देखना होगा कि वहां के ग्राहकों को भारतीय चावल पसंद आता है या नहीं। निरपेक्ष रूप से देखा जाए तो गुणवत्ता के मामले में भारतीय चावल बेहतर है।
बांग्लादेश को लेकर चिंता
दरअसल, भारत सबसे ज्यादा बांग्लादेश को गैर बासमती चावल का निर्यात करता रहा है। लेकिन वहां के किसानों के प्रतिरोध के बाद बांग्लादेश सरकार ने आयातित चावल पर 28 फीसदी का कर लगा दिया है। इससे वहां भारतीय चावल महंगा हो गया है।
यही वजह है कि चालू वित्त वर्ष की पहली छमाही में बांग्लादेश को महज 3.40 लाख टन गैर बासमती चावल ही निर्यात किया जा सका है, जबकि इस अवधि में देश का कुल गैर बासमती चावल निर्यात 37.23 लाख टन है।