केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी का कहना है कि केंद्रीय मोटर वाहन नियम में संशोधन के बाद पुराने ट्रैक्टर में भी सीएनजी किट लगवाया जा सकता है। इसके अलावा जो नए ट्रैक्टर बाजार में आएंगे, उसमें फैक्ट्री फिटेड सीएनजी किट होगी।
इसके साथ ही ट्रैक्टर को बायो सीएनजी से भी चलाया जा सकेगा। सरकार इस समय हर गांव को बायोगैस प्लांट देने की व्यवस्था कर रही है। इसमें खेत में बची पराली या खेती-बाड़ी के अपशिष्ट या गोबर से भी बायोगैस बनाया जा सकेगा। ट्रैक्टर में डीजल का इस्तेमाल न सिर्फ महंगा विकल्प है, बल्कि इससे पर्यावरण को भी क्षति पहुंचती है।
गांव तक कैसे पहुंचेगी सीएनजी
इस क्षेत्र के विशेषज्ञों का कहना है कि किसान ट्रैक्टर में सीएनजी किट लगवा तो लेंगे लेकिन सीएनजी भरवाएंगे कहां से? डीजल लेने के लिए वह अपने गांव के पास ही एक-दो किलोमीटर के दायरे में पड़ने वाले पेट्रोल पंप पर जाकर न सिर्फ ट्रैक्टर में टंकी भरवा लेते हैं बल्कि एक-दो अतिरिक्त ड्रम में भी डीजल भरवा लेते हैं।
ऐसा इसलिए ताकि बार-बार पंप नहीं जाना पड़े, घर में ही डीजल भर लें। सीएनजी सिलिंडर में तो तय मात्रा में ही गैस भरवाई जा सकेगी और हर बार सीएनजी स्टेशन ही आना पड़ेगा। इसके अलावा दिल्ली जैसे शहर में सीएनजी भरवाने के लिए लाइन लगानी पड़ती है, तो गांव से ट्रैक्टर शहर आएंगे तो क्या हालत होगी?