इससे पहले भी केंद्र और राज्यों ने किसानों के कई लाख करोड़ रुपये का कर्ज माफ किया है, लेकिन किसान की दशा नहीं बदली। इसलिए सरकारों को कर्ज माफ करने की जगह किसानों की दशा सुधारने के लिए फसल बीमा, फसल के भंडारण की सुविधाएं, स्थानीय स्तर पर उनकी फसल को लेकर प्रसंस्करण इकाई का निर्माण, फसल का उचित मूल्य देने जैसे कामों पर प्रयास करना चाहिए।
कॉरपोरेट कर्ज की माफी पर सवाल क्यों नहीं?
कृषि अर्थशास्त्री और ग्रामीण अर्थव्यवस्था के विशेषज्ञ देवेंद्र शर्मा ने कहा कि किसानों की कर्ज माफी पर तरह तरह के सवाल उठने लगते हैं। वहीं, जब कॉरपोरेट क्षेत्र का लाखों करोड़ रुपये एनपीए हो जाता है और बैंक उसे राइट ऑफ कर देता है, तो फिर बैंकर इसका विरोध क्यों नहीं करते। इससे तो यही माना जाएगा कि बैंकर भी कॉरपोरेट क्षेत्र से मिले हुए हैं, जो बैंकों के लाखों करोड़ रुपये दबाए हुए हैं।
दनादन ऋण माफी से बैंक बैलेंस शीट होगा प्रभावित
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