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एफएओ की रिपोर्ट: इस साल दुनियाभर में बढ़ेगा गेहूं उत्पादन, भारत की मदद से धान भी तोड़ेगा रिकॉर्ड

Mon, 10 Mar 2025 05:27 AM IST
शिव शुक्ला अमर उजाला नेटवर्क

सार

संगठन ने अपने वैश्विक अनाज उत्पादन पूर्वानुमान को बढ़ाकर 284.2 करोड़ टन कर दिया है, जो 2023 की तुलना में थोड़ा अधिक है। साथ ही, 2024-25 में अनाज की कुल खपत 286.7 करोड़ टन तक पहुंचने की संभावना है, जिसमें एक फीसदी की वृद्धि होगी। यह वृद्धि मुख्य रूप से चावल की बढ़ती मांग के कारण हो सकती है।
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गेहूं। - फोटो : एजेंसी।
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विस्तार
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दुनियाभर में इस साल गेहूं उत्पादन बढ़कर 79.6 करोड़ टन पहुंचने की उम्मीद है, जो 2024 की तुलना में करीब एक फीसदी अधिक होगा। यूरोपीय संघ, विशेष रूप से फ्रांस और जर्मनी में गेहूं की पैदावार में इजाफा हो सकता है, क्योंकि इन क्षेत्रों में बुवाई का रकबा बढ़ने की संभावना है। हालांकि, पूर्वी यूरोप में सूखे और पश्चिमी यूरोप में भारी बारिश के कारण उत्पादन पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। अमेरिका में भी गेहूं का रकबा बढ़ने की उम्मीद है, लेकिन सर्दियों में सूखे के कारण पैदावार मामूली घट सकती है।

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संयुक्त राष्ट्र के खाद्य एवं कृषि संगठन (एफएओ) की रिपोर्ट के मुताबिक, धान उत्पादन को लेकर भी सकारात्मक संकेत मिल रहे हैं। 2024-25 में वैश्विक धान उत्पादन 54.3 करोड़ टन के रिकॉर्ड स्तर तक पहुंच सकता है। यह वृद्धि मुख्य रूप से भारत में बेहतर फसल और कंबोडिया एवं म्यांमार में अनुकूल मौसम परिस्थितियों के कारण होगी।

संगठन ने अपने वैश्विक अनाज उत्पादन पूर्वानुमान को बढ़ाकर 284.2 करोड़ टन कर दिया है, जो 2023 की तुलना में थोड़ा अधिक है। साथ ही, 2024-25 में अनाज की कुल खपत 286.7 करोड़ टन तक पहुंचने की संभावना है, जिसमें एक फीसदी की वृद्धि होगी। यह वृद्धि मुख्य रूप से चावल की बढ़ती मांग के कारण हो सकती है। दूसरी ओर, गेहूं की खपत स्थिर रहने का अनुमान है। हालांकि, खाद्य के रूप में गेहूं के उपयोग में मामूली गिरावट संभव है, लेकिन कारखानों में विशेष रूप से चीन में इसका उपयोग बढ़ सकता है।
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वैश्विक अनाज भंडारण में गिरावट की आशंका
संयुक्त राष्ट्र के खाद्य एवं कृषि संगठन का अनुमान है कि 2025 में वैश्विक अनाज भंडार 1.9 फीसदी घटकर 86.93 करोड़ टन रह सकता है। हालांकि, रूस और यूक्रेन में भंडारण बढ़ने से इस गिरावट को आंशिक रूप से संतुलित किया जा सकता है। स्टॉक-टू-यूज अनुपात 29.9 फीसदी तक गिरने की आशंका है, लेकिन इसे अब भी संतोषजनक माना जा रहा है। वैश्विक व्यापार में भी कमी आने की आशंका है, क्योंकि एफएओ ने अपने पूर्वानुमान को घटाकर 48.42 करोड़ टन कर दिया है, जो पिछले वर्ष की तुलना में 5.6 फीसदी कम है। इसकी वजह निर्यात में होने वाले बदलाव हैं।

क्षेत्रवार मिलीजुली स्थिति
उत्तरी अफ्रीका में कम बारिश से उत्पादन प्रभावित हो सकता है, जबकि दक्षिणी अफ्रीका में 2024 की गिरावट के बाद बेहतर बारिश से फसल उत्पादन में सुधार की उम्मीद है। पूर्वी एशिया में बेहतर बुवाई और अनुकूल मौसम के चलते गेहूं उत्पादन बढ़ सकता है, लेकिन निकट पूर्व एशिया में कम बारिश के कारण गेहूं की पैदावार पिछले पांच साल के औसत से कम रह सकती है। मध्य अमेरिका व कैरेबिया में शुष्क मौसम के कारण मेक्सिको में अनाज बुवाई घट सकती है। ब्राजील में अच्छी फसल से कुल उत्पादन औसत से ऊपर रहने की संभावना है।  

45 देशों में खाद्य संकट
दुनिया में संघर्षों और असुरक्षा के कारण गंभीर खाद्य संकट की स्थिति है। विशेष रूप से गाजा व सूडान में अकाल जैसी स्थिति है। 45 देशों को खाद्य सहायता की जरूरत पड़ सकती है। इनमें अफ्रीका के 33, एशिया के 9, दक्षिण अमेरिका एवं कैरेबिया के दो और यूरोप का एक देश है।  संगठन ने चेतावनी दी है कि इन क्षेत्रों में खाद्य असुरक्षा के उच्चतम स्तर (आईपीसी चरण-5) की स्थिति बनी हुई है। इंटीग्रेटेड फेज क्लासिफिकेशन तीव्र खाद्य असुरक्षा का आकलन करने के लिए अंतरराष्ट्रीय रूप से मान्यता प्राप्त प्रणाली है। यह तीव्र खाद्य असुरक्षा पैमाने का सबसे गंभीर चरण है, जहां प्रतिदिन प्रति 10,000 लोगों में से दो या अधिक व्यक्तियों या चार या उससे अधिक बच्चों की मृत्यु हो सकती है।

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