खादी ग्रामाद्योग द्वारा फैब इंडिया पर 525 करोड़ रुपये का हर्जाना लगाए जाने के बाद अब कंपनी ने माफी मांग ली है। कंपनी ने बॉम्बे हाईकोर्ट में शपथ पत्र देकर कहा है कि वो खादी शब्द का प्रयोग अपने उत्पादों में नहीं करेगी।
लेकिन हर्जाना वसूलेगा खादी बोर्ड
हालांकि फैबइंडिया के इस हलफनामे के बाद भी खादी बोर्ड 525 करोड़ का हर्जाना वूसलेगा। फैब इंडिया के वकील जनक द्वारकादास ने कहा है कि अगर उनके मुवक्किल खादी शब्द का प्रयोग करना चाहते हैं तो फिर वो चार हफ्ते पहले बोर्ड को नोटिस देकर के सूचित करेंगे। हालांकि हाईकोर्ट ने फैब इंडिया के शपथपत्र के बाद मुकदमे को खारिज कर दिया है।
यह लगाया आरोप
खादी आयोग (केवीआईसी) ने फैबइंडिया पर आरोप लगाया है कि वो फैक्ट्री में तैयार कपड़ों को खादी बताकर बेच रहा है और इससे मुनाफा भी कमाया है। इन कपड़ों पर खादी ट्रेडमार्क व मार्क का गलत इस्तेमाल किया गया है।
2015 से चल रहा है विवाद
फैबइंडिया और केवीआईसी के बीच खादी ट्रेडमार्क को लेकर के 2015 से विवाद चल रहा है। केवीआईसी ने कहा कि उसने फैबइंडिया को कभी भी खादी ब्रांड का इस्तेमाल करने की अनुमति नहीं दी है। केवीआईसी की तरफ से केवल रेमंड और अरविंद मिल्स को खादी नाम का इस्तेमाल करने की अनुमति मिली हुई है।
पहले भी दी थी चेतावनी
केवीआईसी के चेयरमैन विनय कुमार सक्सेना ने कहा कि वो पहले भी फैबइंडिया को चेतावनी दे चुके हैं, लेकिन इसके बाद भी उसने ऐसा करने से रोका नहीं है। फैबइंडिया ने केवीआईसी को पहले भी भरोसा दिया था कि वो खादी नाम का इस्तेमाल करना बंद कर देगा।
जुलाई 2015 में किया था परीक्षण
केवीआईसी ने जुलाई 2015 में फैबइंडिया के सैंपल का परीक्षण करके पता लगाया था कि उसके द्वारा बेचे जा रहे कपड़े खादी उत्पाद नहीं हैं बल्कि वो फैक्ट्री में बने सूती कपड़ों को खादी के नाम से बेच रहा है।