फ्यूचर एंड ऑप्शन (एफएंडओ) में खुदरा निवेशकों की डूब रही बचत को लेकर चिंता के बीच सेबी ने उनकी सुरक्षा के लिए सात उपाय सुझाए हैं। सेबी की चेयरपर्सन माधबी पुरी बुच ने कहा, एफएंडओ में परिवारों को साल में 60,000 करोड़ रुपये तक का नुकसान उठाना पड़ रहा है। 2023-24 में 92.5 लाख खुदरा निवेशकों और प्रोपराइटरशिप फर्मों को एफएंडओ में 51,689 करोड़ का घाटा हुआ था।
स्ट्राइक प्राइस को तर्कसंगत बनाएं
मौजूदा स्ट्राइक प्राइस परिचय पद्धति को तर्कसंगत बनाया जाए। स्ट्राइक अंतराल प्रचलित सूचकांक मूल्य (मौजूदा कीमत के आसपास 4 फीसदी) के करीब एक समान होना चाहिए। स्ट्राइक प्रचलित मूल्य (लगभग 4 फीसदी से 8 फीसदी) से दूर जाने पर अंतराल बढ़ना चाहिए।
एक्सपायरी डे पर कैलेंडर स्प्रेड लाभ हटाएं
अन्य गैर समाप्ति दिनों की तुलना में एक्सपायरी डे पर वॉल्यूम में अंतर और उसके साथ तरलता जोखिम को देखते हुए कैलेंडर स्प्रेड स्थिति के लिए मार्जिन लाभ उन स्थितियों के लिए प्रदान नहीं किया जाएगा जिनमें कोई भी कांट्रैक्ट उसी दिन समाप्त हो रहा हो।
पोजीशन लिमिट की इंट्रा डे में निगरानी
इंडेक्स डेरिवेटिव अनुबंधों के लिए पोजीशन लिमिट्स की निगरानी इंट्राडे आधार पर क्लीयरिंग कॉरपोरेशन/स्टॉक एक्सचेंजों द्वारा की जाएगी। उचित निर्धारण के साथ और संबंधित टेक्नोलॉजी बदलाव की जरूरत को देखते हुए पूर्ण कार्यान्वयन के लिए एक आसान रास्ता तय किया जाएगा।
न्यूनतम कांट्रैक्ट साइज 20 लाख तक
डेरिवेटिव्ज कांट्रैक्ट का मूल्य पहले चरण में 5 लाख से बढ़ाकर 10 लाख और 15 लाख से बढ़ाकर 20 लाख रुपये करना चाहिए। दूसरे चरण में इसे 20 से बढ़ाकर 30 लाख रुपये करना चाहिए।
साप्ताहिक ऑप्शन को तर्कसंगत बनाएं
सप्ताह के सभी पांच कारोबारी दिनों में साप्ताहिक अनुबंधों की समाप्ति होती है। ऐसे में किसी एक्सचेंज के सिंगल बेंचमार्क सूचकांक पर साप्ताहिक ऑप्शन कांट्रैक्ट दिए जाने चाहिए।
ईएलएम 5 फीसदी तक बढ़ाया जाए
सेबी ने कहा कि समाप्ति के करीब ऑप्शन अनुबंधों में उच्च जोखिम से निपटने के लिए ऑप्शन में काम करने वाली संस्थाओं के लिए अनुमानित आधार पर भारी हानि मार्जिन (ईएलएम) को 3 से 5 फीसदी तक बढ़ाया जाना चाहिए।