प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ईरान यात्रा के दौरान दोनों देशों के बीच 12 अहम करार के साथ चाबहार बंदरगाह को विकसित करने के महत्वपूर्ण फैसले से भारत के निर्यात में बढ़ोतरी होने की उम्मीद जताई जा रही है। भारतीय निर्यातकों के मुताबिक ईरान अब भारत के लिए ट्रांजिट व्यापार केंद्र के रूप में काम करेगा जहां से यूरोप में प्रवेश लेना पहले के मुकाबले आसान होगा और पहले के मुकाबले लागत में भी कमी आएगी।
समझौते के मुताबिक भारत की सार्वजनिक क्षेत्र की रेल कंपनी इरकॉन ईरान के चाबहार बंदरगाह से अफगानिस्तान तक 500 किलोमीटर लंबी रेल लाइन बिछाएगी। यह रेल लाइन ईरान के दक्षिणी तटीय इलाके से अफगानिस्तान के जाहेदान तक बिछाई जायेगी। निर्यातकों के मुताबिक अभी अफगानिस्तान माल भेजने के लिए उन्हें पाकिस्तान होकर गुजरना पड़ता है, लेकिन नए द्वार प्रवेश खुलने से बिना पाकिस्तान गए अफगानिस्तान व रूस होते हुए वे अपना माल यूरोप तक भेज सकते हैं।
फेडरेशन ऑफ इंडियन एक्सपोर्ट आर्गेनाइजेशंस (फियो) के अध्यक्ष एससी रल्हन कहते हैं कि अमेरिका की तरफ से ईरान पर लगे प्रतिबंध को समाप्त करने के बाद ईरान के साथ व्यापार की संभावना ऐसे ही काफी बढ़ गई है। चाबहार बंदरगाह के विकसित होने से समय व लागत दोनों में बचत होगी। इन समझौतों से ऑटो व चावल के निर्यात में बढ़ोतरी होगी।
ईरान में भारत की इंजीनियरिंग वस्तुओं के साथ चावल की भारी मांग है। चावल निर्यातक संजय गोयल के मुताबिक भारत ने ईरान का उस समय साथ दिया है जब ईरान पर अमेरिका ने प्रतिबंध लगा दिया था। अब ईरान पर प्रतिबंध हट गया है, लेकिन ईरान भारत के साथ व्यापार को प्राथमिकता देगा। निर्यातकों के मुताबिक भारतीय अपैरल (परिधान) निर्यातक भी ईरान के बाजार पर अपनी नजर रख रहे हैं। ईरान भारत से चावल का काफी अधिक आयात करता है।