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एक्सप्लेनर: मार्को रूबियो के दौरे में क्यों शामिल है जामनगर, रिलायंस की रिफाइनरी में अमेरिका के लिए ऐसा क्या?

Wed, 21 Oct 2026 03:12 PM IST
रिया दुबे स्पेशल डेस्क, अमर उजाला

सार

अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो के भारत दौरे में गुजरात के जामनगर को भी शामिल किया गया है। यहां रिलायंस की विशाल रिफाइनरी है, जिसकी क्षमता दुनिया के ऊर्जा बाजार में अहम भूमिका निभाती है। इस दौरे के पीछे तेल की राजनीति से जुड़ी कुछ बड़ी वजहें हैं, जिनका असर भारत-अमेरिका के ऊर्जा संबंधों पर पड़ सकता है। आइए विस्तार से जानते हैं। 
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मार्को रूबियो का जामनगर दौरा - फोटो : Amar Ujala
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विस्तार
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अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रूबियो आज गुजरात के जामनगर का दौरे पर हैं। भारत दौरे के दूसरे चरण में उनकी बातचीत का फोकस ऊर्जा सहयोग बढ़ाने पर है। जामनगर में रिलायंस इंडस्ट्रीज का विशाल रिफाइनरी कॉम्प्लेक्स है। अमेरिका की नजर इस कॉम्प्लेक्स पर है।

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ऐसे में आइए जानते हैं कि रूबियो जामनगर क्यों जा रहे हैं? उनका क्या उद्देश्य है? जामनगर रिफाइनरी की खासियत क्या है? जामनगर में कितनी रिफाइनरियां हैं? देश की रिफाइनिंग क्षमता में जामनगर की कितनी हिस्सेदारी है?

रूबियो जामनगर क्यों जा रहे हैं?

अमेरिकी विदेश विभाग के मुताबिक, रूबियो का यह दौरा भारत-अमेरिका के बीच व्यापार, ऊर्जा सहयोग और रणनीतिक साझेदारी को मजबूत करने पर केंद्रित है। एसोसिएटेड प्रेस के मुताबिक, अमेरिका भारत को रूसी तेल पर निर्भरता कम करने के लिए प्रोत्साहित कर रहा है। साथ ही, वह वेनेजुएला के बढ़ते तेल उत्पादन के लिए बाजार तलाश रहा है।

मंगलवार को मुंबई में पत्रकारों से बातचीत में रूबियो ने कहा कि रिलायंस भारी कच्चे तेल को प्रोसेस करने में सक्षम है और पहले भी ऐसा कर चुकी है। उनके मुताबिक, वेनेजुएला का तेल उत्पादन बढ़ने पर भारत वैश्विक तेल आपूर्ति बढ़ाने में भूमिका निभा सकता है। उन्होंने भारत को रिफाइनिंग के क्षेत्र में बड़ी क्षमता वाला देश बताया।

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रूबियो ने ऊर्जा को राष्ट्रीय सुरक्षा से भी जोड़ा। उन्होंने कहा कि ईरान और यमन से जुड़े युद्धों और होर्मुज जलडमरूमध्य और लाल सागर जैसे समुद्री मार्गों पर खतरों ने ऊर्जा आपूर्ति की सुरक्षा को और महत्वपूर्ण बना दिया है।

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अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो - फोटो : Amar Ujala

जामनगर रिफाइनरी क्यों है खास?

रिलायंस इंडस्ट्रीज की आधिकारिक वेबसाइट के मुताबिक, गुजरात के जामनगर में दुनिया का सबसे बड़ा एक ही स्थान पर स्थित रिफाइनरी कॉम्प्लेक्स है। इसकी कच्चे तेल को प्रोसेस करने की क्षमता 14 लाख बैरल प्रतिदिन (1.4 MMBPD) है। इसका रिफाइनरी कॉम्प्लेक्सिटी इंडेक्स 21.1 है, जिसे कंपनी दुनिया में सबसे ज्यादा बताती है।

रिफाइनरी की क्षमता बताती है कि वह एक दिन में कितना कच्चा तेल प्रोसेस कर सकती है। वहीं, कॉम्प्लेक्सिटी इंडेक्स से पता चलता है कि रिफाइनरी में कच्चे तेल को अलग-अलग उत्पादों में बदलने की कितनी तकनीकी क्षमता है।

जामनगर की एक खासियत भारी और अधिक सल्फर वाले कच्चे तेल को प्रोसेस करने की क्षमता है। कच्चे तेल की अलग-अलग किस्मों में भारीपन और सल्फर की मात्रा अलग होती है। इन अंतर के कारण उन्हें प्रोसेस करने के तरीके भी अलग हो सकते हैं।

रिलायंस के मुताबिक, जामनगर कॉम्प्लेक्स 216 से अधिक किस्मों के कच्चे तेल को प्रोसेस कर चुका है। कंपनी का कहना है कि संभवतः यह दुनिया की अकेली रिफाइनरी है, जिसने इतनी अलग-अलग किस्मों के कच्चे तेल को प्रोसेस किया है।

जामनगर में कितनी रिफाइनरियां हैं?

जामनगर में दो रिफाइनरियां हैं। पहली रिफाइनरी 1999 में शुरू हुई थी और इसकी शुरुआती क्षमता 6.6 लाख बैरल प्रतिदिन थी। दूसरी रिफाइनरी 2008 में चालू हुई, जिसकी शुरुआती क्षमता 5.8 लाख बैरल प्रतिदिन थी। इसे निर्यात केंद्रित रिफाइनरी के रूप में विकसित किया गया और यह विशेष आर्थिक क्षेत्र (SEZ) में स्थित है।

दोनों रिफाइनरियों की शुरुआती क्षमताओं का कुल योग 12.4 लाख बैरल प्रतिदिन है, जबकि रिलायंस पूरे जामनगर कॉम्प्लेक्स की क्षमता 14 लाख बैरल प्रतिदिन है।

कंपनी के मुताबिक, कॉम्प्लेक्स की सालाना रिफाइनिंग क्षमता 6.82 करोड़ मीट्रिक टन है। इसमें से 3.52 करोड़ मीट्रिक टन क्षमता निर्यात के लिए समर्पित है।

जामनगर रिफाइनरी - फोटो : अमर उजाला

देश की रिफाइनिंग क्षमता में जामनगर की कितनी हिस्सेदारी?

पेट्रोलियम प्लानिंग एंड एनालिसिस सेल (PPAC) के 1 अप्रैल 2026 के आंकड़ों के मुताबिक, भारत की कुल स्थापित तेल रिफाइनिंग क्षमता 267.116 मिलियन मीट्रिक टन सालाना है। इसमें रिलायंस इंडस्ट्रीज की गुजरात के जामनगर स्थित दोनों रिफाइनरियों की संयुक्त क्षमता 68.2 मिलियन मीट्रिक टन सालाना है। इस तरह भारत की कुल रिफाइनिंग क्षमता में जामनगर की हिस्सेदारी करीब 25.5% है। यानी देश की कुल स्थापित रिफाइनिंग क्षमता का लगभग एक-चौथाई हिस्सा जामनगर में है।

जामनगर से कितना पेट्रोलियम उत्पाद निर्यात होता है?

रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, रिलायंस ने 2025 की पहली छमाही में जामनगर से 2.166 करोड़ मीट्रिक टन रिफाइंड पेट्रोलियम उत्पादों का निर्यात किया। इसमें 98.1 लाख मीट्रिक टन डीजल, 61.4 लाख मीट्रिक टन पेट्रोल और 20.6 लाख मीट्रिक टन जेट फ्यूल शामिल था। 

रिलायंस के मुताबिक, जामनगर में समुद्री परिवहन की भी बड़ी सुविधा है। यहां गैस वाहकों और छोटे रासायनिक वाहकों से लेकर दुनिया के सबसे बड़े कच्चा तेल ले जाने वाले जहाजों यानी वेरी लार्ज क्रूड कैरियर्स (VLCCs) तक के लिए बर्थिंग की व्यवस्था है। इससे कच्चे तेल का आयात और तैयार उत्पादों का निर्यात किया जाता है।

क्या कहते हैं आंकड़े? - फोटो : अमर उजाला

वेनेजुएला के तेल के लिए जामनगर क्यों सबसे अच्छा विकल्प?

वेनेजुएला का कच्चा तेल अपेक्षाकृत भारी होता है और उसमें सल्फर की मात्रा भी अधिक हो सकती है। इसे प्रोसेस करने के लिए ऐसी रिफाइनरी की जरूरत होती है, जो इस तरह के तेल को संभाल सके। जामनगर की रिफाइनिंग क्षमता इस लिहाज से महत्वपूर्ण है।

एपी के मुताबिक, अमेरिका वेनेजुएला के बढ़ते तेल उत्पादन के लिए बाजार तलाश रहा है। रूबियो ने कहा कि रिलायंस भारी कच्चे तेल को प्रोसेस करने में सक्षम है और पहले भी ऐसा कर चुकी है। उन्होंने वेनेजुएला का उत्पादन बढ़ने पर भारत की संभावित भूमिका का भी जिक्र किया।

पेट्रोलियम प्लानिंग एंड एनालिसिस सेल (PPAC) की रेडी रेकनर रिपोर्ट में दिए गए 2022 के आंकड़ों के मुताबिक, वेनेजुएला के बाद सऊदी अरब के पास दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा प्रमाणित तेल भंडार था। इसके बाद कनाडा, ईरान और इराक का स्थान था। इन देशों के पास मौजूद प्रमाणित तेल भंडार इस प्रकार हैं: 
  • वेनेजुएला: 303.8 अरब बैरल
  • सऊदी अरब: 297.5 अरब बैरल
  • कनाडा: 168.1 अरब बैरल
  • ईरान: 157.8 अरब बैरल
  • इराक: 145 अरब बैरल

रूस से तेल पर भारत की निर्भरता कितनी?

भारत अपनी कच्चे तेल की जरूरत का करीब 85% आयात करता है। पीआरएस इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, 2023 में कच्चे तेल के शुद्ध आयात के मामले में भारत दुनिया में दूसरे स्थान पर था। भारत प्रतिदिन करीब 46 लाख बैरल कच्चे तेल का शुद्ध आयात करता था, जबकि चीन का आंकड़ा 1.06 करोड़ बैरल प्रतिदिन था।

रूस-यूक्रेन युद्ध से पहले भारत के कच्चे तेल के आयात में पश्चिम एशिया के देशों की हिस्सेदारी 60% से अधिक थी। लेकिन युद्ध के बाद रूस से तेल खरीद बढ़ने लगी। भारत के कुल कच्चे तेल आयात में रूस की हिस्सेदारी 2021 में 3% से भी कम थी, जो 2023 में बढ़कर करीब 40% हो गई। इसी अवधि में मध्य पूर्व के देशों की हिस्सेदारी घटकर लगभग 61% से 45% रह गई।

वित्त वर्ष 2023-24 में रूस, इराक और सऊदी अरब भारत को कच्चे तेल की आपूर्ति करने वाले शीर्ष तीन देश थे। हालांकि, नवंबर 2025 से रूसी रिफाइनरियों पर लागू अमेरिकी प्रतिबंधों के कारण रूस से तेल आयात प्रभावित होने की खबरें आईं। इसके बावजूद रूस भारत का सबसे बड़ा तेल आपूर्तिकर्ता बना रहा, लेकिन भारत के कुल कच्चे तेल आयात में उसकी हिस्सेदारी करीब एक-तिहाई से घटकर एक-चौथाई से भी कम रह गई।
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जामनगर में तेल के अलावा क्या बनता है?

रिलायंस का कारोबार सिर्फ कच्चे तेल की रिफाइनिंग तक सीमित नहीं है। कंपनी के ऑयल-टू-केमिकल्स (O2C) बिजनेस में पेट्रोकेमिकल उत्पादन भी शामिल है। रिलायंस की आधिकारिक वेबसाइट के मुताबिक, कंपनी भारत की सबसे बड़ी एकीकृत पेट्रोकेमिकल उत्पादक और दुनिया की सबसे बड़ी एकीकृत पॉलिएस्टर उत्पादक है।

इसके प्रमुख उत्पादों में पीटीए, पॉलीप्रोपाइलीन और पैराक्साइलीन शामिल हैं। पीटीए का इस्तेमाल पॉलिएस्टर फाइबर बनाने में होता है, जबकि पॉलीप्रोपाइलीन एक तरह का प्लास्टिक है। पैराक्साइलीन भी पॉलिएस्टर उद्योग के लिए महत्वपूर्ण कच्चा माल है। रिलायंस के मुताबिक, कंपनी पैराक्साइलीन उत्पादन में दुनिया में तीसरे स्थान पर है और इसकी सालाना उत्पादन क्षमता 46 लाख मीट्रिक टन है।

जामनगर में पेटकोक गैसीफिकेशन की सुविधा भी है। यहां दुनिया का सबसे बड़ा पेटकोक गैसीफायर है, जिसे कोयले और पेटकोक दोनों पर चलाने के लिए डिजाइन किया गया है। इस प्रक्रिया में पेटकोक को सिनगैस में बदला जाता है, जिसका इस्तेमाल ऊर्जा और औद्योगिक उत्पादन में हो सकता है। कंपनी के मुताबिक, इससे एलएनजी आयात पर निर्भरता और उसकी कीमतों में उतार-चढ़ाव का असर कम करने में मदद मिल सकती है।

इसके अलावा, जामनगर में दुनिया का सबसे बड़ा रिफाइनरी ऑफ-गैस क्रैकर (ROGC) कॉम्प्लेक्स है। इसकी एथिलीन उत्पादन क्षमता 17 लाख मीट्रिक टन सालाना है। एथिलीन का इस्तेमाल प्लास्टिक और दूसरे पेट्रोकेमिकल उत्पाद बनाने में होता है।

रिलायंस का ओटूसी कारोबार जामनगर के अलावा हजीरा, दहेज, नागोठाने, वडोदरा, पातालगंगा, सिलवासा, बाराबंकी और होशियारपुर तक फैला है। मलेशिया में भी कंपनी की विनिर्माण सुविधाएं हैं। इसके कारोबार में जियो-बीपी के तहत ईंधन खुदरा बिक्री की साझेदारी और ब्यूटाइल रबर का संयुक्त उद्यम भी शामिल है।
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