बांग्लादेश की अंतरिम सरकार के प्रमुख मोहम्मद यूनुस और भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी।
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बांग्लादेश में सत्ता पर कट्टरपंथियों के कब्जे के बाद बिगड़े हालात
उन्होंने कहा, "बांग्लादेश कपड़ों से आगे बढ़कर चमड़े जैसे क्षेत्रों में भी विविधता ला रहा था। लेकिन पिछले साल देश में सत्ता परिवर्तन के बाद से कट्टरपंथियों ने इस पर कब्जा कर लिया है। उन्होंने भारत के खिलाफ सख्त रुख अपनाया है। बिना किसी उकसावे के उन्होंने भारतीय वस्तुओं- चावल, धागा, यहां तक कि एफएमसीजी को भी रोकना शुरू कर दिया।"
भारत ने पड़ोसी के प्रतिबंधों पर जवाबी कार्रवाई करने के बजाय, एक नरम संकेत देने का विकल्प चुना। किसी भी चीज का आयात बंद नहीं किया गया है, लेकिन प्रमुख श्रेणियों के उत्पादों को अब अधिक महंगे और धीमे समुद्री मार्गों का उपयोग करना होगा। श्रीवास्तव ने कहा, "यह टीजर है। हमने उनके सामान को अवरुद्ध नहीं किया है। हमने केवल प्रवेश बिंदु बदल दिया है।"
बांग्लादेश को मिली शून्य टैरिफ सुविधा के समीक्षा की जरूरत
श्रीवास्तव ने कहा कि बांग्लादेश का हाल ही में सबसे कम विकसित देश (एलडीसी) का दर्जा खत्म होने का मतलब है कि अब वह किसी देश में डिफॉल्ट रूप से टैरिफ-मुक्त पहुंच की उम्मीद नहीं कर सकता। भारत ने उन्हें एलडीसी मानदंडों के तहत शून्य टैरिफ की सुविधा दी थी। अब इसकी समीक्षा की जानी चाहिए, ठीक वैसे ही जैसे यूरोप और अमेरिका कर रहे हैं।"
उन्होंने कहा, "वे गंभीर दबाव में हैं। एलडीसी दर्जा खत्म होने का मतलब है कि वे अपनी पहुंच खो देंगे, और उनकी अपनी नीतियां चीजों को और खराब कर रही हैं। वे खुद को नुकसान पहुंचा रहे हैं।" चीनी सामान बांग्लादेश के रास्ते भारत में आ रहे हैं, इस जोखिम को श्रीवास्तव ने कमतर बताया। उन्होंने कहा, "बड़े पैमाने पर ट्रांस-शिपमेंट नहीं होता। कानूनी तौर पर इसकी अनुमति नहीं है। शायद छोटे पैमाने पर हो। लेकिन मुख्य रूप से वे चीन से कपड़ा आयात करते हैं, कपड़े तैयार करते हैं और निर्यात करते हैं।"
यूनुस के चीन में दिए गए बयान के बाद और बिगड़े दिल्ली-ढाका के संबंध
प्रधानमंत्री मोहम्मद यूनुस के कार्यकाल में नई दिल्ली और ढाका के बीच संबंध और खराब हो गए हैं, खासकर बीजिंग में उनके हालिया बयानों के बाद हालात और बिगड़े हैं। यूनुस ने भारत के पूर्वोत्तर को "भूमि से घिरा हुआ" बताया और बांग्लादेश को इस क्षेत्र में "समुद्र का संरक्षक" बताया।
भारतीय अधिकारियों के अनुसार व्यापार प्रतिबंधों को निष्पक्षता सुनिश्चित करने के लिए डिजाइन किया गया है। भारत ने बांग्लादेश को भूमि और बंदरगाहों के माध्यम से पूरी पहुंच की अनुमति दी है। वहीं, ढाका ने चुनिंदा भारतीय निर्यातों को पूरी तरह रोक दिया है, खासकर पूर्वोत्तर की ओर जाने वाले निर्यातों को।
नए नियमों के तहत बांग्लादेश के इन उत्पादों के भारत पहुंचने पर पड़ेगा असर
नए भारतीय नियमों के तहत असम, त्रिपुरा, मेघालय, मिजोरम और बंगाल के कुछ हिस्सों में भूमि बंदरगाहों के माध्यम से बांग्लादेशी प्लास्टिक, प्रसंस्कृत खाद्य पदार्थ, फर्नीचर, पेय पदार्थ और सूती धागे के प्रवेश पर रोक लगा दी गई है। ये नियम भारत की ओर से पांच साल की उस व्यवस्था को खत्म करने के कुछ सप्ताह बाद आए हैं जिसके तहत बांग्लादेश को भारतीय हवाई अड्डों और बंदरगाहों के माध्यम से तीसरे देशों में माल भेजने की अनुमति थी। एक सरकारी अधिकारी ने इस बारे में पीटीआई को बताया कि "यह एक पारस्परिक कदम है।" उन्होंने ढाका की ओर से भारतीय वस्तुओं पर पाबंदी कड़ा करने और चुनिंदा आयात प्रतिबंधों की ओर इशारा किया।