कंसल्टेंसी फर्म ईवाई इंडिया ने भारत के खिलाफ ट्रंप की टिप्पणियों को अनुचित बताते हुए कहा कि वास्तव में, विश्व अर्थव्यवस्था के आकर्षण का केंद्र धीरे-धीरे ग्लोबल साउथ की ओर स्थानांतरित हो रहा है, जिसमें भारत ने खुद को अग्रणी भूमिका में रखा है।
अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) समेत प्रमुख अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों ने भारत को दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्था बताया है। विशेषज्ञों का कहना है कि ट्रंप के भारत की अर्थव्यवस्था को मृत बताना गलत है, क्योंकि तथ्यों के आईने में देखें तो यह एक चमकता सितारा है। भारत विदेशी निवेश के लिए एक आकर्षक जगह बना हुआ है और कई अंतरराष्ट्रीय दिग्गज देश में विनिर्माण केंद्र से लेकर वैश्विक क्षमता केंद्र स्थापित करने की संभावना तलाश रहे हैं। इसके अलावा, भारतीय प्रतिभा की मांग विशेष रूप से प्रौद्योगिकी क्षेत्र में सबसे अधिक है और यह अमेरिका सहित अन्य देशों को सेवाओं का प्रमुख निर्यातक रहा है।
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कंसल्टेंसी फर्म ईवाई इंडिया ने भारत के खिलाफ ट्रंप की टिप्पणियों को अनुचित बताते हुए कहा कि वास्तव में, विश्व अर्थव्यवस्था के आकर्षण का केंद्र धीरे-धीरे ग्लोबल साउथ की ओर स्थानांतरित हो रहा है, जिसमें भारत ने खुद को अग्रणी भूमिका में रखा है। ईवाई इंडिया के मुख्य नीति सलाहकार डीके श्रीवास्तव ने बताया, पूर्ववर्ती विकसित अर्थव्यवस्थाएं तेजी से बूढ़ी हो रही हैं और इन अर्थव्यवस्थाओं में भारतीय प्रवासियों के योगदान के कारण ही वे लगातार सकारात्मक वृद्धि दर्ज कर रही हैं।
मोदी खुद करें ट्रंप से बात : अमेरिकी विशेषज्ञ
अमेरिका के एक पूर्व व्यापार वार्ताकार ने कहा है कि अमेरिकी राष्ट्रपति हर सौदे पर अपनी मुहर लगाने पर जोर देते हैं, इसलिए इसे अंतिम रूप देने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को सीधे डोनाल्ड ट्रंप से बातचीत करने की जरूरत पड़ सकती है। अमेरिका-भारत रणनीतिक साझेदारी फोरम के वरिष्ठ सलाहकार और पूर्व सहायक अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि मार्क लिनस्कॉट ने सुझाव दिया कि भारत और अमेरिका के बीच व्यापार वार्ता में प्रगति हुई है। उन्होंने कहा कि ट्रंप प्रशासन के कई अधिकारी, जिनमें स्वयं ट्रंप भी शामिल हैं, पिछले कुछ हफ्तों से समझौते के संकेत दे रहे हैं। एजेंसी
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कठोर रुख चौंकाने वाला : कौशिक बसु
विश्व बैंक के पूर्व मुख्य अर्थशास्त्री कौशिक बसु ने कहा कि ट्रंप का भारत के खिलाफ कठोर रुख चौंकाने वाला लगता है। यह भारत के ट्रंप का निर्विवाद समर्थक बनने का ही नतीजा है कि नई दिल्ली के प्रति अमेरिकी आर्थिक नीति ने दुर्भाग्यपूर्ण मोड़ ले लिया है। अमेरिका ने भारत के साथ बड़ा व्यापार घाटा होने का हवाला दिया है। हालांकि, भारत के साथ उसका व्यापार घाटा केवल 41 अरब अमेरिकी डॉलर है, जो चीन (270 अरब डॉलर) या वियतनाम जैसे छोटे देशों (113 अरब डॉलर) की तुलना में कहीं नहीं ठहरता। उन्होंने कहा, अमेरिका अब भारत को पहले से कहीं कम आंक रहा है।
गुमराह करने वाला कदम : पवन चौधरी
मेडिकल टेक्नोलॉजी एसोसिएशन ऑफ इंडिया (एमटीएआई) अध्यक्ष पवन चौधरी ने टैरिफ को आर्थिक रूप से अदूरदर्शी और रणनीतिक रूप से गुमराह करने वाला कदम बताया। चौधरी ने सवाल उठाया कि क्या पीएम और विदेश मंत्री की तरफ से संसद में हाल में दिए गए स्पष्टीकरण की वजह से ट्रंप ने ऐसा कदम उठाया है। उन्होंने कहा कि संघर्ष विराम के दावे को नकारने के जवाब में अगर ऐसा कदम उठाया गया है तो यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि सीधी बात का जवाब दंडात्मक कार्रवाई से दिया जा रहा है।