भारतीय रिजर्व बैंक की मौद्रिक नीति समिति की तीसरी बैठक अभी चल रही है और समीक्षा के नतीजे की घोषणा गुरुवार सुबह की जाएगी। आरबीआई आमतौर पर एक वित्तीय वर्ष में छह द्विमासिक बैठकें आयोजित करता है, जहां यह ब्याज दरों, धन की आपूर्ति, मुद्रास्फीति दृष्टिकोण और विभिन्न व्यापक आर्थिक संकेतकों को तय करता है। तीन दिवसीय बैठक मंगलवार को शुरू हुई।
मुद्रास्फीति में लगातार गिरावट (वर्तमान में 18 महीने के निचले स्तर पर) और आगे गिरावट की संभावना केंद्रीय बैंक को प्रमुख ब्याज दर पर फिर से ब्रेक लगाने के लिए प्रेरित करेगा। मुद्रास्फीति विकसित अर्थव्यवस्थाओं सहित कई देशों के लिए चिंता का विषय रही है, लेकिन भारत अपने मुद्रास्फीति के दायरे को काफी अच्छी तरह से नियंत्रित करने में कामयाब रहा।
अप्रैल के ठहराव को छोड़कर आरबीआई ने मुद्रास्फीति के खिलाफ लड़ाई में मई 2022 से रेपो दर को संचयी रूप से 250 आधार अंकों से बढ़ाकर 6.5 प्रतिशत किया था। ब्याज दरों को बढ़ाना एक मौद्रिक नीति का साधन है जो आम तौर पर अर्थव्यवस्था में मांग को दबाने में मदद करता है। इससे मुद्रास्फीति को नियंत्रित रखने में मदद मिलती है।
भारत की खुदरा मुद्रास्फीति लगातार तीन तिमाहियों के लिए आरबीआई के 6 प्रतिशत के लक्ष्य से ऊपर थी और नवंबर 2022 में आरबीआई इसे संतोषजनक क्षेत्र में वापस लाने में कामयाब रही थी। मुद्रास्फीति लक्ष्य निर्धारण ढांचे के तहत यदि महंगाई लगातार तीन तिमाहियों तक 2-6 प्रतिशत के दायरे से बाहर रहती है तो रिजर्व बैंक को इसके प्रबंधन में विफल माना जाता है। अब देखना यह है कि जून में मुद्रास्फीति में तेजी को देखते हुए आरबीआई लगातार तीसरी बार रेपो दर को अपरिवर्तित रखेगा या इसमें बढ़ोतरी करेगा। आइए जानते हैं कि इस पर बाजार के जानकारों का क्या कहना है?
पिछले कुछ संशोधनों में रेपो दर में 250 आधार अंकों की वृद्धि हुई है और इसके परिणामस्वरूप, होम लोन के लिए आधार उधार दर में 160 बीपीएस की वृद्धि हुई है। पिछले तीन संशोधनों से पूरी तरह से घर खरीदारों पर भार बढ़ा था। इससे खासतौर पर किफायती सेगमेंट में हाउसिंग डिमांड पर असर पड़ना शुरू हो गया था।
जियोजित फाइनेंशियल सर्विसेज के मुख्य निवेश रणनीतिकार वीके विजयकुमार ने कहा, "एमपीसी सब्जियों की ऊंची मुद्रास्फीति के कारण चिंतित होगी। लेकिन चूंकि यह मौसमी कारकों के कारण है, इसलिए मौद्रिक नीति इस संबंध में कुछ नहीं कर सकती है। इससे भी महत्वपूर्ण बात यह है कि अर्थव्यवस्था में फिलहाल विकास की मजबूत गति है ऐसे में एमपीसी की ओर से ऐसा कुछ भी करने की संभावना नहीं है जो विकास को प्रभावित करे। इसलिए, मौद्रिक नीति समिति की बैठक में दरों और रुख को अपरिवर्तित रहने की संभावना अधिक है।