मोदी सरकार के हर फैसले जनहित से जुड़े होते हैं। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर काम करने वाले बैंकों से प्रतिस्पर्धा करने के लिए देश को बड़े बैंकों की जरूरत है। सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों के विलय के निर्णय से अब हमारे पास छह विशाल बैंक होंगे, जिनका पूंजी आधार, आकार, स्तर और दक्षता बढ़ी हुई होगी। जहां तक विनिवेश की बात है तो इस बार बजट में एक लाख पांच हजार करोड़ रुपये का विनिवेश लक्ष्य रखा गया है, जिसे पूरा किया जाएगा। इस दिशा में निवेश एवं लोक संपत्ति प्रबंधन विभाग (दीपम) काम कर रहा है। जहां विनिवेश की जरूरत होगी, वहां विनिवेश होगा और जहां रणनीतिक बिक्री की जरूरत होगी, वहां रणनीतिक बिक्री होगी।
हमारी सरकार देश को आर्थिक मोर्चे और विकास के मानकों पर प्रगतिशील रखने के लिए प्रतिबद्ध है। प्रधानमंत्री ने देश को आर्थिक मोर्चे पर सशक्त बनाने और 2024-25 तक पांच लाख करोड़ डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाने का संकल्प लिया है। आर्थिक सुधार की दिशा में उठाए गए इन कदमों का दूरगामी असर पड़ेगा। हमने बहुत सोच समझकर और उद्योग जगत की मांग के अनुसार इन सुधारों को लागू किया। इनके शुरुआती परिणाम आपको हर रोज देखने को मिल रहे हैं। निवेशकों में उत्साह का माहौल है। कॉरपोरेट कर में छूट देने से मेक इन इंडिया के तहत निवेश, रोजगार और आर्थिक गतिविधियां बढ़ेंगी। सिर्फ 28 दिनों के अंदर यह पांचवां मौका है, जब हमने अर्थव्यवस्था में तेजी लाने के लिए इतने बड़े स्तर पर कदम उठाए हैं। मोदी सरकार का यह कदम भारत को पांच लाख करोड़ डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाने की दिशा में मील का पत्थर साबित होगा।
कॉरपोरेट कर में कटौती से चालू वित्त वर्ष में हमारे राजस्व में 1.45 लाख करोड़ रुपये की कमी होने का अनुमान है। लेकिन इसकी भरपाई हो जाने का अनुमान है। ऐसा इसलिए कि भारत अब कम कर की वजह से दुनियाभर की कंपनियों के लिए आकर्षण का केंद्र होगा। अगर हम विदेश की बात करें तो अभी अमेरिका में कॉरपोरेट कर की दर 27 फीसदी, कनाडा में 26.5 फीसदी, ब्राजील में 34 फीसदी, चीन में 25 फीसदी, फ्रांस में 31 फीसदी और जर्मनी में 30 फीसदी है। कर कटौती से कंपनियों के पास जो पैसा बचेगा, उसका इस्तेमाल मैन्यूफैक्चरिंग की सुविधा के विस्तार में, कर्ज चुकाने में या फिर नए निवेश के लिए होगा। इससे बैंकिंग सिस्टम और बाजार में नकदी बढ़ेगी। निवेश, रोजगार और आर्थिक गतिविधियां बढ़ने के साथ जीएसटी वसूली भी बढ़ेगी। यानी सरकार अभी जो 1.45 लाख करोड़ खर्च करेगी, वह आगे जाकर कर वसूली के जरिए वापस आ जाएगी। हालांकि, हम 2020-21 के बजट के आसपास राजकोषीय घाटे की समीक्षा करेंगे और तभी इसके सही आंकड़े सामने आ पाएंगे। लेकिन, एक बात मैं साफ कर देना चाहता हूं कि कॉरपोरेट कर में कटौती से देश को कोई नुकसान नहीं होने जा रहा है।
बिल्कुल नहीं... दूसरे कार्यकाल में मोदी सरकार सबका साथ-सबका विकास और सबका विश्वास के मूलमंत्र के साथ समाज के हर वर्ग और अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति के चहुंमुखी उत्थान के लिए प्रतिबद्ध है। सरकार की आर्थिक सुधारों की प्रक्रिया से कोई भी व्यक्ति अछूता नहीं है। सरकार के जीएसटी दरों में कटौती, कॉरपोरेट कर में कटौती और सरकारी बैंकों के विलय जैसे ऐतिहासिक आर्थिक सुधारों का सीधा फायदा किसानों, नौकरीपेशा और मध्य वर्ग को मिलेगा। मौजूदा कॉरपोरेट कर कटौती का मुख्य रूप से गरीबों और बेरोजगारों पर सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा। विनिर्माण और गैर-कृषि क्षेत्र में रोजगार के अतिरिक्त अवसर पैदा होंगे। इससे उनको लाभ होगा। इस फैसले का समाज के सभी वर्गों को लाभ होगा।
देखिए... हम सक्षम भारत, सशक्त भारत के विजन से काम कर रहे हैं। आम आदमी को आर्थिक रूप से सक्षम और सशक्त करना हमारे विजन का अहम हिस्सा है। इसके लिए हमें जिस भी तरह के आवश्यक उपाय करने की जरूरत पड़ेगी, सर्वसम्मति से उसका निर्णय लिया जाएगा।
हमने 2024-25 तक भारत को पांच लाख करोड़ डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाने का लक्ष्य रखा है और उसे हासिल करने के लिए हम हर जरूरी कदम उठा रहे हैं। ऐतिहासिक आर्थिक सुधारों को लागू कर रहे हैं। इसके काफी सकारात्मक परिणाम देखने को मिल रहे हैं। अपनी विकासवादी नीतियों से इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए हमें विकास के जिस वांछित दर की आवश्यकता है, उसे हम हासिल करेंगे।
यह सब अनुमान बाहर के हैं। जल्द ही सब आंकड़े आपके सामने होंगे।
31 मार्च, 2020 का इंतजार कीजिए। कोई घाटा नहीं बढ़ेगा।