EPFO: 11 साल बाद ईपीएफओ (EPFO) की न्यूनतम पेंशन में बढ़ोतरी की तैयारी। जानें बजट में क्या हो सकता है फैसला और 7,000 से 10,000 रुपये पेंशन की मांग पर सरकार का ताजा रुख।
न्यूनतम पेंशन बढ़ाने की मांग को लेकर अब जल्द बड़े फैसले के संकेत मिल रहे हैं। कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (ईपीएफओ) से जुड़े कर्मचारियों की पेंशन में बढ़ोतरी पर सरकार गंभीरता से विचार कर रही है। सूत्रों के मुताबिक इस पर फैसला बजट के दौरान या उसके तुरंत बाद लिया जा सकता है। हालांकि पेंशन में कितनी बढ़ोतरी होगी, इसे लेकर अभी तस्वीर साफ नहीं है। लेकिन लंबे समय से चली आ रही मांग पर जल्द राहत मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।
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ईपीएफओ से जुड़े कर्मचारियों को फिलहाल न्यूनतम पेंशन के तौर पर एक हजार रुपये प्रति माह मिलते हैं। यह राशि पिछले 11 वर्षों से जस की तस बनी हुई है। लंबे समय से पेंशन में कोई बढ़ोतरी नहीं होने को लेकर कर्मचारी संगठनों में नाराजगी है और वे लगातार सरकार से इसमें इजाफे की मांग करते आ रहे हैं।
कर्मचारी संगठनों की मांग है कि, पिछले 11 वर्षों में महंगाई कई गुना बढ़ चुकी है। जिससे कर्मचारियों और सेवानिवृत्त लोगों पर खर्च का बोझ लगातार बढ़ता गया है। ऐसे में सेवानिवृत्ति के बाद महज एक हजार रुपये मासिक पेंशन किसी भी तरह से व्यावहारिक नहीं है। इसी मांग को लेकर 6 जनवरी को भारतीय मजदूर संघ (बीएमएस) के एक प्रतिनिधिमंडल ने केंद्रीय श्रम एवं रोजगार मंत्री से मुलाकात की थी। इस बैठक में संगठनों ने न्यूनतम पेंशन बढ़ाने की मांग को प्रमुखता से उठाया था।
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इसके अलावा अन्य कर्मचारी संगठन भी लंबे समय से न्यूनतम पेंशन में बड़े इजाफे की मांग कर रहे हैं। संगठनों का कहना है कि पेंशन राशि को बढ़ाकर कम से कम 7 से 10 हजार रुपये प्रतिमाह किया जाना चाहिए। ईपीएफओ से जुड़ा पेंशन का मामला इस समय सर्वोच्च न्यायालय में भी विचाराधीन है, जिससे इस मुद्दे पर फैसले की अहमियत और बढ़ गई है। इन हालातों को देखते हुए संकेत मिल रहे हैं कि न्यूनतम पेंशन बढ़ाने को लेकर जल्द कोई बड़ा ऐलान किया जा सकता है। सूत्रों के मुताबिक पेंशन से जुड़े मुद्दे पर सरकार गंभीरता से मंथन कर रही है। सरकार की मंशा सामाजिक सुरक्षा के दायरे को और मजबूत करने की है, ताकि सेवानिवृत्त कर्मचारियों को बेहतर और भरोसेमंद सुरक्षा मिल सके।