फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

EPFO Rules: ईपीएफओ नियमों में बदलाव पर विपक्ष हमलावर, कहा- सरकार की गलतियों की सजा वेतनभोगियों को मिल रही

Wed, 15 Oct 2025 06:49 PM IST
कुमार विवेक बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

विपक्ष ने ईपीएफ के समयपूर्व अंतिम निपटान की अवधि को मौजूदा 2 महीने से बढ़ाकर 12 महीने करने और अंतिम पेंशन निकासी की अवधि को 2 महीने से बढ़ाकर 36 महीने करने के फैसले के लिए सरकार पर निशाना साधा है। विपक्षी नेताओं ने क्या आरोप लगाए हैं, आइए जानते हैंं।
विज्ञापन
ईपीएफओ - फोटो : Istock
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

ईपीएफओ नियमों में बदलाव को लेकर मोदी सरकार पर हमला बोलते हुए विपक्ष ने बुधवार को आरोप लगाया कि मोदी सरकार की ओर से अर्थव्यवस्था को ठीक से न संभाल पाने के कारण वेतनभोगियों को इसकी सजा मिल रही है। विपक्ष ने श्रम व रोजगार मंत्री मनसुख मंडाविया से इन कठोर प्रावधानों को खत्म करने का आग्रह किया।

विपक्ष का आरोप- अंतिम निपटान अवधि को बढ़ाना गलत

विपक्ष ने ईपीएफ के समयपूर्व अंतिम निपटान की अवधि को मौजूदा 2 महीने से बढ़ाकर 12 महीने करने और अंतिम पेंशन निकासी की अवधि को 2 महीने से बढ़ाकर 36 महीने करने के फैसले के लिए सरकार पर निशाना साधा है। विपक्षी नेताओं ने सदस्यों के खाते में अंशदान का 25 प्रतिशत न्यूनतम शेष राशि के रूप में निर्धारित करने के प्रावधान की भी आलोचना की। नए नियमों के अनुसार हर सदस्य को यह राशि हमेशा अपने ईपीएफ खाते में बनाए रखनी होगी।

विज्ञापन


कांग्रेस सांसद मणिकम टैगोर ने एक्स पर एक पोस्ट में कहा कि मोदी सरकार के नए ईपीएफओ नियम 'क्रूरता' से कम नहीं हैं। उन्होंने कहा, "पेंशनभोगियों और नौकरी गंवाने वालों को अपनी बचत की जरूरत के लिए दंडित किया जा रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी- यह समय हस्तक्षेप करने और मनसुख मंडाविया को लोगों के जीवन को नष्ट करने से रोकने का है।"

उन्होंने दावा किया, "ईपीएफओ के नए निर्णयों के तहत- आप बेरोजगारी के 12 महीने बाद ही पीएफ निकाल सकेंगे (पहले 2 महीने)। पेंशन 36 महीने बाद ही निकाली जा सकेगी (पहले 2 महीने)। आपके ईपीएफ का 25% हमेशा के लिए लॉक हो जाएगा!"
विज्ञापन


टैगोर ने कहा, "मोदी जी, इससे किसे फायदा होगा? मजदूरों को तो बिल्कुल नहीं। जरा सोचिए, एक मज़दूर अपनी नौकरी खो देता है या एक रिटायर्ड व्यक्ति अपनी मेहनत की कमाई के लिए वर्षों इंतजार करता है - जबकि सरकार अपने करीबी दोस्तों के लिए लाखों करोड़ रुपये माफ कर देती है। यह सुधार नहीं, बल्कि डकैती है।" उन्होंने दावा किया कि श्रम मंत्री मंडाविया के फैसले से उन पेंशनभोगियों का जीवन खत्म हो जाएगा जो जीवित रहने के लिए ईपीएफ पर निर्भर हैं। उन्होंने कहा, "प्रधानमंत्री जी, कृपया तुरंत हस्तक्षेप करें। नौकरशाही की क्रूरता को भारत के श्रमिक वर्ग की गरिमा को नष्ट न करने दें।"

टीएमसी सांसद साकेत गोखले बोले- नए नियम चौंकाने वाले और हास्यास्पद

टीएमसी सांसद साकेत गोखले ने कहा कि मोदी सरकार द्वारा पेश किए गए नए ईपीएफओ नियम 'चौंकाने वाले और हास्यास्पद' हैं। गोखले ने कहा, "यह वेतनभोगी लोगों के अपने ही पैसों की खुली चोरी है। नए नियम इस प्रकार हैं- पहले, नौकरी छूटने पर आप दो महीने की बेरोजगारी के बाद अपना ईपीएफ बैलेंस निकाल सकते थे। अब उस न्यूनतम अवधि को आश्चर्यजनक रूप से बढ़ाकर एक साल कर दिया गया है। मूलतः, अपना पैसा निकालने के लिए अब आपको दो महीने की बजाय पूरे एक साल तक बेरोजगार रहना होगा।"

उन्होंने कहा, "आप अपने ईपीएफ के पेंशन हिस्से को केवल 36 महीने (यानी 3 साल) की बेरोजगारी के बाद ही निकाल सकते हैं। पहले, आप इसे दो महीने बाद निकाल सकते थे। और यह सबसे बुरी बात है: आपके ईपीएफ बैलेंस का 25% हिस्सा निकाला नहीं जा सकता और यह आपके रिटायरमेंट तक आपके पूरे करियर के लिए लॉक रहेगा।"

उन्होंने कहा, "कल्पना कीजिए कि किसी व्यक्ति की नौकरी चली जाए या उसे नौकरी से निकाल दिया जाए। उसके पास अभी भी बिल और ईएमआई चुकाने के लिए पैसे हैं। लेकिन मोदी सरकार आपको पूरे एक साल तक अपना ही पैसा निकालने की अनुमति नहीं देगी। एक साल बाद भी आप अपनी बचत का केवल 75% ही निकाल पाएंगे और वह भी तभी जब आप बेरोजगार हों।"

उन्होंने दावा किया कि इसके अलावा ईपीएफ को अनिवार्य कर दिया गया है, जिसका अर्थ है कि वेतनभोगी लोग अपनी आय पर सरकार द्वारा की जाने वाली इस "कठोर मासिक लूट" से बच नहीं सकते। उन्होंने पूछा कि एक सामान्य मध्यम वर्गीय व्यक्ति से इस तरह जीवित रहने की उम्मीद कैसे की जा सकती है। गोखले ने आगे पूछा कि नौकरी खोने वाला वेतनभोगी व्यक्ति पूरे एक साल तक अपने खर्चों को कैसे पूरा करेगा, जब उसका ईपीएफ निकासी अवरुद्ध हो जाएगा?

टीएमसी सांसद ने कहा, "यह साफ है कि मोदी सरकार अपनी भयानक आर्थिक नीतियों के कारण बेरोजगारी में भारी वृद्धि की उम्मीद कर रही है। लोगों के ईपीएफ को लॉक करने वाले ये नए नियम ईपीएफओ पर दौड़ को रोकने की कोशिश कर रही एक घबराई हुई सरकार के संकेत हैं। मोदी सरकार द्वारा अर्थव्यवस्था को ठीक से न संभाल पाने की सजा वेतनभोगी लोगों को दी जा रही है।" उन्होंने मांडविया से इन नए "कठोर" ईपीएफ नियमों को तुरंत रद्द करने का आग्रह किया। कांग्रेस प्रवक्ता शमा मोहम्मद ने भी नियमों को वापस लेने की मांग की।

हालांकि, सरकार के तर्क विपक्षी नेताओं के उलट हैं। केंद्रीय श्रम व रोजगार मंत्री मनसुख मांडविया ने कहा है कि अगर किसी की नौकरी चली जाती है तो 75 प्रतिशत राशि तुरंत निकाली जा सकेगी। उन्होंने कहा, "सदस्यों को एक साल बाद पूरी राशि निकालने की सुविधा उपलब्ध होगी। 25% राशि एक साल के लिए रखने के पीछे मकसद है कि 10 साल की सेवा अवधि बाधित न हो। नए सुधारों से कर्मचारी के सेवा की निरंतरता बनी रहेगी और पेंशन मिलने से उनकी सामाजिक और आर्थिक सुरक्षा भी सुनिश्चित होगी।"

विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें