देश के असंगठित श्रम बाजारों के लिए जून, 2024 काफी मुश्किल महीना रहा। इस अवधि में असंगठित क्षेत्र में कुल रोजगार में 28 लाख की गिरावट देखने को मिली और बेरोजगारों की संख्या करीब एक करोड़ बढ़ गई। इससे देश में बेरोजगारी दर जून में बढ़कर 9.2 फीसदी पर पहुंच गई।
सेंटर फॉर मॉनिटरिंग इंडियन इकनॉमी (सीएमआईई) ने अपनी रिपोर्ट में दावा किया है कि भीषण गर्मी और मानसून में देरी की वजह से रोजगार के लिहाज से पिछला महीना असंगठित क्षेत्र के लिए अच्छा नहीं रहा। खरीफ फसलों की बुवाई सीजन की शुरुआत में रोजगार की उम्मीद में 70 लाख से अधिक लोग जून में श्रम बाजारों में शामिल हुए, लेकिन उनमें अधिकांश को निराशा हाथ लगी। श्रम बाजारों ने उन्हें जोड़ने के लिए अतिरिक्त रोजगार पैदा करने के बजाय इसमें कटौती कर दी। इससे रोजगार ढूंढने वालों की संख्या बढ़ गई। इसी तरह, करीब 90 लाख छोटे व्यापारी व दिहाड़ी मजदूर (कृषि मजदूर भी शामिल) श्रम बाजार से बाहर हो गए। इससे पता चलता है कि जून में गैर-कृषि दिहाड़ी मजदूरों को रोजगार का अधिक नुकसान हुआ। इससे यह भी अनुमान लगाया जा सकता है कि मानसून व खरीफ की बुवाई गतिविधियां बेहतर होतीं तो इस नुकसान का एक बड़ा हिस्सा कृषि में शामिल हो सकता था।
कृषि क्षेत्र : 1.3 करोड़ श्रमिकों को काम
बुवाई गतिविधियों में तेजी के बीच श्रमिकों की मांग बढ़ने से पिछले महीने कृषि क्षेत्र में 1.3 करोड़ लोगों को रोजगार मिला। यह अप्रैल और मई में कृषि क्षेत्र में रोजगार की संख्या में गिरावट के कारण कम आधार का भी संकेत है। मार्च और मई के बीच इस क्षेत्र में रोजगार में 1.5 करोड़ की गिरावट आई थी। 1.3 करोड़ श्रमिकों में से 80 लाख ने खुद को किसान बताया, जबकि बाकी 50 लाख कृषि मजदूर हैं।
- कृषि में श्रमिकों का बड़े पैमाने पर आना-जाना इस क्षेत्र में रोजगार की अनिश्चित प्रकृति को दर्शाता है। जून तक कृषि क्षेत्र में करीब 14 करोड़ लोग कार्यरत हैं।
निर्माण क्षेत्र : 1.7 करोड़ लोगों को बड़ा झटका, छीना रोजगार
रिपोर्ट में दावा किया गया है कि भीषण गर्मी ने रोजगार के लिहाज से निर्माण क्षेत्र को बड़ा झटका दिया है। इस क्षेत्र में जून में 1.7 करोड़ लोगों का रोजगार छीन गया। चिंताजनक बात है कि इस क्षेत्र में मार्च, 2024 से ही रोजगार में लगातार गिरावट आ रही है।
- व्यावसायियों के बीच रोजगार में भी 50 लाख की गिरावट रही। यह पूरा नुकसान ग्रामीण क्षेत्रों में हुआ है। यह काफी हद तक मानसून में देरी से जुड़ा है।
वेतनभोगी नौकरियां 28 लाख बढ़ीं
रिपोर्ट के मुताबिक, असंगठित की तुलना में संगठित क्षेत्र में नौकरियों की संख्या में वृद्धि रही। जून में वेतनभोगी नौकरियों की संख्या 28 लाख बढ़ गई। विशेष तौर पर शहरी भारत में ऐसी नौकरियों की संख्या में 24 लाख की बढ़ोतरी देखने को मिली।
बेरोजगारी दर में आ सकती है कमी
जून के अंत में मानसून में सुधार हुआ और जुलाई के मध्य तक पूरे देश को कवर कर लिया। यह अस्थायी मजदूरों के लिए अच्छा संकेत है। उम्मीद है कि जुलाई में बेरोजगारी दर घटेगी।