कोरोना वायरस महामारी से ना सिर्फ भारत, बल्कि पूरी दुनिया प्रभावत हुई है। कई देशों में लॉकडाउन किया गया और एयरलाइंस बंद हो गई। लॉकडाउन के चलते एविएशन सेक्टर पर सबसे बुरा असर हुआ है। इस सेक्टर में अब तक हजारों लोग बेरोजगार हो गए हैं। लाखों कर्मचारियों की नौकरी पर खतरा मंडरा रहा है।
सैलरी में भी 50 फीसदी तक की कटौती
एमिरेट्स ने अपने कुछ पायलट और केबिन क्रू की छंटनी की है। सूत्रों के मुताबिक, आने वाले समय में और हजारों की छंटनी की जा सकती है। दुबई की एमिरेट्स एयरलाइंस ने छंटनी के दूसरे चरण में करीब 600 पायलटों, 6500 केबिन क्रू और इंजीनियरों को नौकरी से निकाला है। इसके अलावा कंपनी ने सैलरी में भी 50 फीसदी तक की कटौती सितंबर तक जारी रखने का फैसला किया है।
एक तिहाई की छंटनी संभव
नौकरी से निकाले गए ज्यादातर पायलट एयरबस ए-380 और बोइंग 777 उड़ाते थे। इसमें कुछ भारतीय भी शामिल हैं। इसे एविएशन इंडस्ट्री की सबसे बड़ी छंटनी में से एक माना जा रहा है। कंपनी में करीब 4,300 पायलट और 22,000 केबिन क्रू काम करते हैं। मामले में सूत्रों ने बताया कि इनमें से एक तिहाई की छंटनी संभव है।
दुबई-भारत मार्ग पर सीट में वृद्धि
मालूम हो कि एमिरेट्स दुबई-भारत मार्ग पर सीटों की संख्या में बढ़ोतरी चाहती है और उसे उम्मीद है कि उड़ान से जुड़े द्विपक्षीय राइट्स के लिए दोनों सरकारों के बीच बातचीत फिर से शुरू होगी। इस मार्ग पर पिछले पांच साल से द्विपक्षीय राइट्स में किसी तरह की वृद्धि देखने को नहीं मिली है।
स्पाइसजेट के साथ किया किया
एमिरेट्स भारत में नौ गंतव्यों तक उड़ान सेवाओं का परिचालन करती है। उसने किफायती एयरलाइन स्पाइसजेट के साथ कोड शेयर से जुड़ा शुरुआती समझौता भी किया है। एमिरेट्स एयरलाइन के अध्यक्ष टिम क्लार्क ने यहां कहा कि, 'भारत और दुबई के मध्य द्विपक्षीय (हवाई यातायात) राइट्स एकमात्र सबसे बड़ी समस्या है। अब चुनाव खत्म हो चुके हैं और मोदी सरकार वापस सत्ता में आ चुकी है। मुझे उम्मीद है कि (भारत और दुबई) के बीच बातचीत फिर से शुरू होगी।'
द्विपक्षीय राइट्स का आशय दो देशों के बीच के उस समझौते से है, जिसके तहत दोनों देशों के एयरलाइन को सीटों की खास संख्या के साथ सेवाओं के परिचालन की अनुमति मिलती है।