केंद्र सरकार ने इलेक्ट्रॉनिक्स कंपोनेंट मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा देने के लिए चौथे चरण के तहत 29 नई परियोजनाओं को मंजूरी दी है। आईटी मंत्रालय के सचिव एस कृष्णन ने सोमवार को बताया कि इन प्रस्तावों के तहत कुल 7,104 करोड़ रुपये का निवेश होगा।
इस ताजा मंजूरी के साथ, इलेक्ट्रॉनिक्स एवं आईटी मंत्रालय (MeitY) द्वारा स्वीकृत कुल परियोजनाओं की संख्या बढ़कर 75 हो गई है। सरकार का मानना है कि इससे देश में इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण को गति मिलेगी और भारत वैश्विक सप्लाई चेन में अपनी स्थिति मजबूत करेगा।
मंजूर प्रस्तावों में कैपिटल गुड्स सेगमेंट की 6 परियोजनाएं (1,683 करोड़ रुपये निवेश), डिस्प्ले मॉड्यूल सब-असेंबली की 2 परियोजनाएं (1,350 करोड़ रुपये), रेयर अर्थ मैग्नेट निर्माण की 1 परियोजना (700 करोड़ रुपये), रिले सेगमेंट की 4 परियोजनाएं (554 करोड़ रुपये) और डिजिटल एप्लिकेशन के लिए लिथियम-आयन सेल की 1 परियोजना (500 करोड़ रुपये) शामिल हैं।
मंत्रालय ने बताया कि ECMS योजना अपने लक्ष्यों की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रही है। 59,350 करोड़ रुपये के निवेश लक्ष्य के मुकाबले अब तक 61,671 करोड़ रुपये की मंजूरी दी जा चुकी है। वहीं, कुल उत्पादन लक्ष्य 4,56,500 करोड़ रुपये के करीब पहुंचते हुए अब तक स्वीकृत परियोजनाओं से 4,51,858 करोड़ रुपये के उत्पादन का अनुमान है। सरकार का उद्देश्य इस योजना के जरिए इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग में आत्मनिर्भरता बढ़ाना, अहम कंपोनेंट्स के घरेलू उत्पादन को प्रोत्साहन देना और आयात पर निर्भरता कम करना है।
वैष्णव का कंपनियों के लिए क्या संदेश?
केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स और आईटी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने उद्योग जगत को सख्त संदेश देते हुए कहा कि अगर कंपनियां गुणवत्ता और डिजाइन में अपेक्षित निवेश नहीं करतीं, तो सरकार प्रोत्साहन और मंजूरियों पर रोक लगाने से पीछे नहीं हटेगी। उन्होंने स्पष्ट तौर पर कहा कि जो कंपनियां डिजाइन में निवेश नहीं करेंगी, उन्हें सिस्टम से बाहर कर दिया जाएगा।
वैष्णव ने किसे लगाई फटकार?
मंत्री ने इंडिया सेलुलर एंड इलेक्ट्रॉनिक्स एसोसिएशन (ICEA) और उससे जुड़ी कंपनियों को भी फटकार लगाई। उनका कहना था कि इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग को मजबूत बनाने के लिए MeitY द्वारा तय किए गए एकीकृत दृष्टिकोण का पालन उद्योग ठीक से नहीं कर रहा है। उन्होंने जोर देकर कहा कि देश को केवल असेंबली नहीं, बल्कि इलेक्ट्रॉनिक्स डिजाइन, कंपोनेंट डिजाइन और मशीन डिज़ाइन में भी आगे बढ़ना होगा।
वैष्णव ने गुणवत्ता सुधार के लिए छह सिगमा जैसी वैश्विक पद्धति अपनाने की जरूरत बताई, जिसका उद्देश्य उत्पादन में त्रुटियों को न्यूनतम करना और लगभग परफेक्ट आउटपुट हासिल करना है।
पश्चिम एशिया तनाव के बीच उद्योग संगठनों की क्या है स्थिति?
इस बीच, पश्चिम एशिया में जारी तनाव और उसके संभावित प्रभाव पर सरकार लगातार उद्योग संगठनों के संपर्क में है। मंत्री ने कहा कि अब तक सेमीकंडक्टर, मोबाइल, इलेक्ट्रॉनिक्स कंपोनेंट और हार्डवेयर सेक्टर पर किसी तरह का प्रतिकूल असर सामने नहीं आया है। हालांकि, उन्होंने इसे विकसित होती स्थिति बताते हुए कहा कि सरकार लगातार निगरानी रखेगी।
हीलियम की संभावित कमी और सप्लाई चेन पर असर की खबरों के बीच भी उद्योग संगठनों ने फिलहाल किसी बड़े व्यवधान से इनकार किया है। वैष्णव के अनुसार, उद्योग को उम्मीद है कि पश्चिम एशिया संकट लंबा नहीं चलेगा।