केंद्र सरकार ने इलेक्ट्रॉनिक्स कंपोनेंट मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा देने के लिए चौथे चरण के तहत 29 नई परियोजनाओं को मंजूरी दी है। आईटी मंत्रालय के सचिव एस कृष्णन ने सोमवार को बताया कि इन प्रस्तावों के तहत कुल 7,104 करोड़ रुपये का निवेश होगा।
इस ताजा मंजूरी के साथ, इलेक्ट्रॉनिक्स एवं आईटी मंत्रालय (MeitY) द्वारा स्वीकृत कुल परियोजनाओं की संख्या बढ़कर 75 हो गई है। सरकार का मानना है कि इससे देश में इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण को गति मिलेगी और भारत वैश्विक सप्लाई चेन में अपनी स्थिति मजबूत करेगा।
केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स और आईटी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने उद्योग जगत को सख्त संदेश देते हुए कहा कि अगर कंपनियां गुणवत्ता और डिजाइन में अपेक्षित निवेश नहीं करतीं, तो सरकार प्रोत्साहन और मंजूरियों पर रोक लगाने से पीछे नहीं हटेगी। उन्होंने स्पष्ट तौर पर कहा कि जो कंपनियां डिजाइन में निवेश नहीं करेंगी, उन्हें सिस्टम से बाहर कर दिया जाएगा।
मंत्री ने इंडिया सेलुलर एंड इलेक्ट्रॉनिक्स एसोसिएशन (ICEA) और उससे जुड़ी कंपनियों को भी फटकार लगाई। उनका कहना था कि इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग को मजबूत बनाने के लिए MeitY द्वारा तय किए गए एकीकृत दृष्टिकोण का पालन उद्योग ठीक से नहीं कर रहा है। उन्होंने जोर देकर कहा कि देश को केवल असेंबली नहीं, बल्कि इलेक्ट्रॉनिक्स डिजाइन, कंपोनेंट डिजाइन और मशीन डिज़ाइन में भी आगे बढ़ना होगा।
इस बीच, पश्चिम एशिया में जारी तनाव और उसके संभावित प्रभाव पर सरकार लगातार उद्योग संगठनों के संपर्क में है। मंत्री ने कहा कि अब तक सेमीकंडक्टर, मोबाइल, इलेक्ट्रॉनिक्स कंपोनेंट और हार्डवेयर सेक्टर पर किसी तरह का प्रतिकूल असर सामने नहीं आया है। हालांकि, उन्होंने इसे विकसित होती स्थिति बताते हुए कहा कि सरकार लगातार निगरानी रखेगी।
हीलियम की संभावित कमी और सप्लाई चेन पर असर की खबरों के बीच भी उद्योग संगठनों ने फिलहाल किसी बड़े व्यवधान से इनकार किया है। वैष्णव के अनुसार, उद्योग को उम्मीद है कि पश्चिम एशिया संकट लंबा नहीं चलेगा।