पाम सहित अन्य खाद्य तेलों की कीमतों में आए भारी-भरकम उछाल की वजह से पिछले विपणन वर्ष में भारत का आयात बिल 63 फीसदी बढ़कर 1.17 लाख करोड़ रुपये पहुंच गया।
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सीईए के मुताबिक, खाद्य तेल विपणन वर्ष 2020-21 (नवंबर-अक्तूबर) में कुल 131.31 लाख टन खाद्य तेल का आयात हुआ। यह 2019-20 के 131.75 लाख टन से 44 हजार टन कम रहा। बावजूद इसके भारत को 1.17 लाख करोड़ रुपये चुकाने पड़े, जो पिछले साल आयात पर खर्च हुए 71,625 करोड़ से 45,375 करोड़ रुपये कम हैं।
संगठन ने कहा कि सरकार ने घरेलू बाजार में कीमतें थामने के लिए पिछले दिनों आयात शुल्क में बदलाव किया था। इस वजह से भी पिछले कुछ महीने आयात पर असर पड़ा। हालांकि, अब तेजी आ रही और रिफाइंड तेल का आयात 6.86 लाख टन बढ़ा है।
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बीते विपणन वर्ष में कुल वनस्पति तेल का आयात भी 2019-20 के समान रहा और महज 6 हजार टन का उछाल दिखा। इस दौरान जहां खाद्य तेलों की आवक में कमी आई, वहीं अखाद्य तेल का आयात 50,650 टन बढ़ गया है। 1 नवंबर को देश में कुल खाद्य तेल का भंडार 17.05 लाख टन रहा, एक अक्तूबर के मुकाबले तीन लाख टन कम है।