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आईडीएफसी फर्स्ट बैंक गबन: 645 करोड़ रुपये के घोटाले में ईडी ने की तीसरी बड़ी गिरफ्तारी, जानें पूरा मामला

Mon, 01 Jun 2026 08:12 PM IST
कुमार विवेक बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

ईडी ने हरियाणा सरकार, चंडीगढ़ प्रशासन और दो स्कूलों से जुड़े 645 करोड़ रुपये के बैंक गबन मामले में रियल एस्टेट कारोबारी विक्रम वधवा को गिरफ्तार किया। यह इस मामले में तीसरी गिरफ्तारी है।
 
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आर्थिक अपराध। - फोटो : अमर उजाला नेटवर्क
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विस्तार
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प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने हरियाणा सरकार, चंडीगढ़ प्रशासन और दो निजी स्कूलों से जुड़े 645 करोड़ रुपये के बैंक गबन मामले में तीसरी गिरफ्तारी की है। ईडी ने 29 मई को रियल एस्टेट कारोबारी विक्रम वधवा को धन शोधन निवारण अधिनियम के तहत गिरफ्तार किया। उन पर 70 करोड़ रुपये से अधिक की अपराध आय प्राप्त करने का आरोप है।

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ईडी की जांच में अब तक 645 करोड़ रुपये के सार्वजनिक धन के गबन का खुलासा हुआ है। यह धन आईडीएफसी फर्स्ट बैंक में रखे खातों से निकाला गया था। एजेंसी ने आरोप लगाया है कि वधवा ने सह-आरोपियों रिभव ऋषि, अभय कुमार, बैंक अधिकारियों और सरकारी अधिकारियों के साथ मिलकर धन की हेराफेरी की। विक्रम वधवा ने अपराध आय को उत्पन्न करने, घुमाने और छिपाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उन्हें 29 मई को गिरफ्तार किया गया था। गिरफ्तारी के बाद उन्हें विशेष अदालत में पेश किया गया। अदालत ने उन्हें 02 जून तक ईडी की हिरासत में भेज दिया। ईडी ने इस मामले में 11 मई को रिभव ऋषि और अभय कुमार को भी गिरफ्तार किया था।

धन शोधन का तरीका

ईडी ने बताया कि वधवा ने अपने निजी खाते में 70 करोड़ रुपये से अधिक की अपराध आय प्राप्त की। इसके अतिरिक्त, उन्हें गबन किए गए धन से बड़ी मात्रा में नकदी भी मिली। उन्होंने इस धन को अपनी विभिन्न संस्थाओं में निवेश किया। साथ ही, कई अचल संपत्तियां भी खरीदीं। कैपको फिनटेक सर्विसेज और स्वास्तिक देश प्रोजेक्ट्स जैसी कई मध्यस्थ शेल संस्थाओं को सरकारी विभागों से सीधे गबन का धन मिला।

आगे की जांच

इन मध्यस्थ संस्थाओं से सैकड़ों करोड़ रुपये विभिन्न जौहरियों को हस्तांतरित किए गए। जौहरियों ने कथित तौर पर बैंकिंग लेनदेन के बदले नकदी उपलब्ध कराई। रिभव ऋषि और उनके सहयोगियों ने यह नकदी सरकारी अधिकारियों और कारोबारियों को वितरित की। इसमें विक्रम वधवा भी शामिल थे। ईडी अब धन के पूरे मार्ग का पता लगाने और अन्य लाभार्थियों व अपराध आय से अर्जित संपत्तियों की पहचान करने में जुटी है।

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