ईडी की ओर से जारी एक आधिकारिक बयान में कहा गया है कि चीन के कुछ व्यक्तियों ने भोले-भाले लोगों जिनमें अधिकतर युवा हैं उन्हें मोबाइल ऐप ‘keepsharer’ के जरिए पार्ट टाइम वर्क मुहैया कराने के नाम पर उनसे रुपये की उगाही की। ईडी के अनुसार इन चाइनीज लोगों ने भारत में कंपनी बनाकर कई भारतीयों को नौकरी पर रखा। इनमें निदेशक, अनुवादक (मंदारिन से अंग्रेजी और दूसरी भाषाओं में अनुवाद करने के लिए), एचआर मैनेजर और टेली कॉलर शामिल थे।
चाइनीज लोगों ने भारतीय कर्मियों के दस्तावेज अपने पास रखकर उसका इस्तेमाल करते हुए बैंक खाता खुलवा लिया। आरोपितों चीइनीज लोगों ने ‘keepsharer’ नाम से एक एप बनाया और व्हाट्सएप व टेलीग्राम का इस्तेमाल करते हुए प्रचार करने लगे। अपने प्रचार में वे युवाओं को पार्ट टाइम जॉब मुहैया कराने का ऑफर दे रहे थे। यह एप एक निवेश एप से जुड़ा है। इस एप पर रजिस्ट्रेशन करने के नाम पर उन्होंने युवाओं से पैसों की वसूली की। आगे चलकर उन्होंने आम लोगों से भी एप में निवेश के नाम पर पैसों की उगाही की।
युवाओं को एप से सेलिब्रिटीज के वीडियो लिंक करने और उन्हें सोशल मीडिया पर अपलोड करने का टास्क दिया गया था। टास्क पूरा होने पर वे युवाओं को 20 रुपये प्रति वीडियो की दर से भुगतान करते थे। ये राशि ‘keepsharer’ एप के वॉलेट में जमा होती थी। कुछ समय तक उनके वॉलेट में पैसे जमा होते रहे पर कुछ समय के बाद एप को प्ले स्टोर से हटा दिया गया। ईडी के अनुसार ने लोगों को ना निवेश की गई राशि लौटाई और ना ही पारिश्रमिक का भुगतान किया। यह राशि करोड़ों रुपये में बताई जा रही है। आरोपितों ने घोटाले से एकत्र किए गए धन को बेंगलुरु स्थित कुछ कंपनियों के बैंक खातों से रूट किया और फिर इन्हें क्रिप्टोकुरेंसी में परिवर्तित कर दिया गया। इसके बाद राशि को चीन स्थित क्रिप्टो एक्सचेंजों में स्थानांतरित कर दिया गया।
ईडी ने बताया है कि फोन और व्हाट्सएप ग्रुप के जरिए हुए सभी लेनदेन चीनी लोगों के नियंत्रण में थे। पुलिस की ओर से दायर चार्जशीट के अनुसार 92 आरोपियों में से छह लोग चीन और ताइवान के नागरिक हैं जो पूरे घोटाले को नियंत्रित कर रहे थे। ईडी ने कहा है कि मामले में आगे की जांच जारी है। ईडी ने पार्ट टाइम जॉब की धोखाधड़ी से संबंधित इस मामले में बेंगलुरु के दक्षिण सीईएन पुलिस स्टेशन में दर्ज एक प्राथमिकी के आधार पर मनी लॉन्ड्रिंग की जांच शुरू की थी।