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Economic Survey: जीडीपी रफ्तार 7.4% की और महंगाई नरम, पांच सवालों में समझें देश की आर्थिक सेहत का हाल

Thu, 29 Jan 2026 06:03 PM IST
कुमार विवेक बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

Economic Survey: वित्त वर्ष 2026 में भारत के सकल घरेलू उत्पाद की वृद्धि दर 7.4% रहने का अनुमान है। आर्थिक सर्वेक्षण के अनुसार महंगाई बढ़ने की रफ्तार 1.7% पर आ गई है। आसान-सवाल जवाब के जरिए करदाताओं की संख्या और राजकोषीय घाटे के बारे में आंकड़े क्या कह रहे।
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आर्थिक सर्वेक्षण 2026 - फोटो : amarujala.com
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विस्तार
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वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने गुरुवार को वित्तीय वर्ष 2025-26 का आर्थिक सर्वेक्षण लोकसभा के पटल पर रखा। मुख्य आर्थिक सलाहकार वी. अनंत नागेश्वरन की अगुवाई में बनी इस सर्वे रिपोर्ट में भारतीय अर्थव्यवस्था की ताजा तस्वीर पेश की गई है। आर्थिक सर्वेक्षण के अनुसार भारत की विकास दर मजबूत हुई है, जबकि महंगाई के मोर्चे पर बड़ी राहत मिली है।

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आर्थिक समीक्षा में जाहिर किए गए अनुमानों को आसान सवाल-जवाब के जरिए समझिए।

सवाल:  आने वाले समय में देश की वृद्धि दर के बारे में क्या अनुमान है? 
जवाब:
भारत की आर्थिक वृद्धि की रफ्तार तेज होने का अनुमान है। मुख्य आर्थिक सलाहकार के अनुसार, वित्त वर्ष 2025 में वास्तविक जीडीपी वृद्धि दर 6.5% थी, जिसके वित्त वर्ष 2026 में बढ़कर 7.4% होने का अनुमान है। यह कोविड-पूर्व के 6.4% के औसत से काफी बेहतर स्थिति है। वित्त वर्ष 2026-27 में देश की जीडीपी 6.8% से 7.4% तक रह सकती है।

सवाल: देश में महंगाई का क्या हाल?
जवाब:
आर्थिक सर्वेक्षण के अनुसार महंगाई के मोर्चे पर आंकड़े थोड़े सुकून देने वाले हैं। खुदरा महंगाई दर वित्त वर्ष 2023 में 6.7% थी, यह वित्त वर्ष 2026 (दिसंबर तक) में घटकर मात्र 1.7% रह गई है। इसी तरह, कोर इन्फ्लेशन (सोना-चांदी को छोड़कर) भी गिरकर 2.9% (दिसंबर तक) पर आ गई है।
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सवाल: इकोनॉमी को रफ्तार कहां से मिल रही? 
जवाब:
अर्थव्यवस्था को घरेलू मांग और निवेश दोनों से सहारा मिल रहा है। निवेश गतिविधियों में इजाफा हुआ है। रियल ग्रॉस फिक्स्ड कैपिटल फॉर्मेशन (जीएफसीएफ) की वृद्धि दर वित्त वर्ष 2026 में 7.8% रहने का अनुमान है, जो वित्त वर्ष 2025 में 7.1% थी। वहीं निजी खपत व्यय (पीएफसीई) भी मजबूत है, इसके वित्त वर्ष 2026 में 7.0% की दर से बढ़ने की उम्मीद है।

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सवाल: सरकार की कमाई व करदाताओं की संख्या कितनी बढ़ी?
जवाब:
अर्थव्यवस्था को औपचारिक बनाने और बेहतर अनुपालन के कारण टैक्स कलेक्शन बढ़ा है। आयकरदाताओं की संख्या वित्त वर्ष 2022 के 6.9 करोड़ से बढ़कर वित्त वर्ष 2025 में 9.2 करोड़ हो गई है। सकल कर राजस्व भी जीडीपी के 11.5% तक पहुंच गया है, जो महामारी से पहले 10.8% था।

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सवाल: क्या सरकार अपना घाटा कम कर पाई है? 
जवाब: हां, राजकोषीय अनुशासन में लगातार सुधार हुआ है। राजकोषीय घाटा, जो वित्त वर्ष 2021 में 9.2% के उच्च स्तर पर था, वह वित्त वर्ष 2025 में घटकर 4.8% (संशोधित अनुमान) पर आ गया है। वित्त वर्ष 2026 के लिए इसे और कम करके 4.4% (बजट अनुमान) पर लाने का लक्ष्य रखा गया है। मुख्य आर्थिक सलाहकार के मुताबिक सरकार ने न केवल राजकोषीय घाटा कम करने में सफलता पाई है, बल्कि खर्च की गुणवत्ता में भी सुधार हुआ है। प्रभावी पूंजीगत व्यय अब जीडीपी का 3.9% हो गया है, जो महामारी से पहले 2.7% था। यह बताता है कि सरकार का फोकस विकास को बढ़ावा देने वाले खर्चों पर है।

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