केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने गुरुवार संसद में आर्थिक समीक्षा 2025-26 पेश की। बजट सत्र से ठीक एक दिन पहले पेश किया गया यह दस्तावेज भारतीय अर्थव्यवस्था की दिशा और दशा का आधिकारिक रिपोर्ट कार्ड है। मुख्य आर्थिक सलाहकार (सीईए) वी. अनंत नागेश्वरन की देखरेख में तैयार किए गए इस सर्वे का लब्बोलुआब यह है कि भारत की विकास गाथा (ग्रोथ स्टोरी) मजबूत बनी हुई है, लेकिन वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच हमें सतर्क रहने की जरूरत है।
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7. इंफ्रास्ट्रक्चर और कैपेक्स की लंबी छलांग
अर्थव्यवस्था को गति देने में बुनियादी ढांचे का बड़ा हाथ है:
8. विदेशी मुद्रा भंडार का कवच
बाहरी झटकों से निपटने के लिए भारत के पास विदेशी मुद्रा भंडार का पर्याप्त 'बफर' है। 16 जनवरी 2026 तक भारत का विदेशी मुद्रा भंडार 701.4 बिलियन डॉलर तक पहुंच गया, जो 11 महीने के आयात के लिए पर्याप्त है।
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10. गरीबी में भारी गिरावट
नीति आयोग के मल्टीडायमेंशनल पॉवर्टी इंडेक्स (एमपीआई) का हवाला देते हुए सर्वे बताता है कि गरीबी 2005-06 के 55.3% से घटकर 2022-23 में 11.28% रह गई है।
11. इनोवेशन और रोजगार
भारत ने इनोवेशन में लंबी छलांग लगाई है। ग्लोबल इनोवेशन इंडेक्स में भारत की रैंकिंग 2019 के 66वें स्थान से सुधरकर 2025 में 38वें स्थान पर आ गई है। रोजगार की बात करें नेशनल करियर सर्विस पोर्टल पर FY25 में 2.8 करोड़ से अधिक रिक्तियां मोबिलाइज की गईं। आर्थिक समीक्षा 2025-26 साफ करती है कि भारतीय अर्थव्यवस्था ने वैश्विक चुनौतियों के बीच अपनी चमक बनाए रखी है। हालांकि, राज्यों की वित्तीय स्थिति और अस्थिर वैश्विक पूंजी प्रवाह वे क्षेत्र हैं जिन पर नीति निर्माताओं को आगामी बजट में विशेष ध्यान देना होगा।