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आर्थिक सर्वे के 800 पन्नों का निचोड़: घरेलू मोर्चे पर मजबूती, लेकिन बाहरी चुनौतियों का डर; जानिए बड़ी बातें

Thu, 29 Jan 2026 03:20 PM IST
कुमार विवेक बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

Economic Survey 2025-26: 6.8-7.2% की जीडीपी ग्रोथ का अनुमान, घटती महंगाई और मजबूत इंफ्रास्ट्रक्चर। जानिए 800 पन्नों के आर्थिक सर्वे का पूरा सार आसान भाषा में।
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वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण और मुख्य आर्थिक सलाहकार वी अनंत नागेश्वरन। - फोटो : amarujala.com
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विस्तार
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केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने गुरुवार संसद में आर्थिक समीक्षा 2025-26 पेश की। बजट सत्र से ठीक एक दिन पहले पेश किया गया यह दस्तावेज भारतीय अर्थव्यवस्था की दिशा और दशा का आधिकारिक रिपोर्ट कार्ड है। मुख्य आर्थिक सलाहकार (सीईए) वी. अनंत नागेश्वरन की देखरेख में तैयार किए गए इस सर्वे का लब्बोलुआब यह है कि भारत की विकास गाथा (ग्रोथ स्टोरी) मजबूत बनी हुई है, लेकिन वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच हमें सतर्क रहने की जरूरत है।

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यदि आपके पास पूरा दस्तावेज पढ़ने का समय नहीं है, तो यहां आसान भाषा में समझिए आर्थिक सर्वेक्षण के प्रमुख बिंदु और उनके मायने:

1. जीडीपी की रफ्तार
स्थिर और मजबूत सर्वे में अनुमान लगाया गया है कि वित्त वर्ष 2026-27 में भारत की वास्तविक जीडीपी वृद्धि दर 6.8% से 7.2% के बीच रहेगी। हालांकि, यह चालू वित्त वर्ष (2025-26) के अनुमानित 7.4% से थोड़ी कम है, लेकिन वैश्विक मंदी के माहौल में यह आंकड़ा भारत की स्थिरता को दर्शाता है।

2. महंगाई पर लगाम 
आम आदमी के लिए राहत की बात यह है कि महंगाई 'नियंत्रित' है। आंकड़ों के मुताबिक, अप्रैल-दिसंबर 2025 के दौरान घरेलू मुद्रास्फीति औसतन 1.7% रही है। कोर इन्फ्लेशन में कमी यह संकेत देती है कि सप्लाई-साइड की स्थिति में सुधार हुआ है।
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3. सोशल मीडिया की लत से बच्चों को बचाने की तैयारी
सर्वे में बच्चों में बढ़ती 'डिजिटल लत' पर गंभीर चिंता जताई गई है। सरकार को सुझाव दिया गया है कि सोशल मीडिया एप्स के इस्तेमाल के लिए उम्र-आधारित सीमा लागू की जाए। चूंकि भारत मेटा और यूट्यूब जैसे दिग्गजों के लिए सबसे बड़ा बाजार है, इसलिए सर्वे ने सिफारिश की है कि इन प्लेटफॉर्म्स को एज वेरिफिकेशन और जुए व टारगेटेड विज्ञापनों पर 'उम्र के हिसाब से डिफॉल्ट सेटिंग्स' लागू करने के लिए जिम्मेदार बनाया जाना चाहिए।

4.विदेशी मोर्चे पर चिंता 
सर्वे ने एक महत्वपूर्ण 'विरोधाभास'की ओर इशारा किया है। जहां भारत के घरेलू फंडामेंटल मजबूत हैं, वहीं बाहरी मोर्चे पर जोखिम बरकरार हैं। विशेष रूप से पूंजी प्रवाह और करेंसी पर दबाव चिंता का विषय है। विदेशी पूंजी के सूखे के कारण 2025 में रुपये का प्रदर्शन कमजोर रहा है।

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5. राजकोषीय अनुशासन 
सरकार ने अपनी वित्तीय स्थिति को सुधारा है। वित्त वर्ष 2025 में राजकोषीय घाटा जीडीपी का 4.8% रहा, जो बजट अनुमानों से बेहतर है। वित्त वर्ष 2026 के लिए इसे 4.4% तक लाने का लक्ष्य रखा गया है।

6. बड़ी चिंता : बजट का 8% हिस्सा मुफ्त की रेवड़ियों पर हो रहा खर्च

  • आर्थिक समीक्षा में राज्यों की ओर से बांटी जा रही फ्रीबीज यानी मुफ्त की रेवड़ियों और बिना शर्त नकद ट्रांसफर (यूसीटी) को लेकर चेतावनी भी है। मुख्य आर्थिक सलाहकार वी अनंत नागेश्वरन ने कहा, कई राज्य बिना शर्त धन बांट रहे हैं। बजट का 8.26 फीसदी हिस्सा सिर्फ नकदी बांटने में जा रहा है।
  • नागेश्वरन ने कहा, कई राज्यों में यूसीटी से राजस्व खर्च बढ़ने का वित्तीय स्थिति एवं सार्वजनिक निवेश पर असर पड़ा है। कई राज्य बिना शर्त वित्तीय ट्रांसफर कर रहे हैं। ये योजनाएं तुरंत राहत तो देती हैं, पर लंबी अवधि में राज्यों के विकास को रोक रही हैं। इनसे लोगों के हाथों में नकदी आती है, खर्च करने की शक्ति भी बढ़ती है, पर, विकास दर बनाए रखने के लिए सावधानी से प्राथमिकताओं को फिर तय करने की जरूरत है, ताकि लघु अवधि की वित्तीय मदद उन निवेशों को खत्म न कर दे, जिन पर अंतत: समावेशी मध्यम अवधि की समृद्धि टिकी है।
  • वित्त वर्ष 2025-26 में राज्यों की ओर से नकद हस्तांतरण पर खर्च 1.7 लाख करोड़ तक पहुंचने का अनुमान।
  • 22-23 से अब तक ऐसी योजनाएं लागू करने वाले राज्य 5 गुना बढ़े।
  • नकद ट्रांसफर कुछ राज्यों में तो सकल राज्य घरेलू उत्पाद (जीएसडीपी) का 1.25% तक पहुंच गया है। खास बात यह कि इनमें से आधे राज्य पहले से ही राजस्व घाटे में चल रहे हैं।


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7. इंफ्रास्ट्रक्चर और कैपेक्स की लंबी छलांग 
अर्थव्यवस्था को गति देने में बुनियादी ढांचे का बड़ा हाथ है:

  • पूंजीगत व्यय: केंद्र का कैपेक्स FY18 के 2.63 लाख करोड़ रुपये से चार गुना बढ़कर FY26 में 11.21 लाख करोड़ रुपये (बजट अनुमान) हो गया है।
  • सड़क और रेलवे: हाई-स्पीड कॉरिडोर 550 किमी (FY14) से बढ़कर 5,364 किमी (दिसंबर 2025 तक) हो गए हैं। रेलवे ने FY26 में 3,500 किमी नई लाइनें जोड़ी हैं।

8. विदेशी मुद्रा भंडार का कवच 
बाहरी झटकों से निपटने के लिए भारत के पास विदेशी मुद्रा भंडार का पर्याप्त 'बफर' है। 16 जनवरी 2026 तक भारत का विदेशी मुद्रा भंडार 701.4 बिलियन डॉलर तक पहुंच गया, जो 11 महीने के आयात के लिए पर्याप्त है।

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9. किस सेक्टर के लिए क्या?

  • बिजली कंपनियां: डिस्कॉम के लिए यह एक ऐतिहासिक बदलाव का साल रहा, जिन्होंने FY25 में पहली बार 2,701 करोड़ रुपये का शुद्ध लाभ दर्ज किया।
  • पीएलआई स्कीम: 14 सेक्टरों में प्रोडक्शन लिंक्ड इंसेंटिव (पीएलआई) स्कीम के तहत 2.0 लाख करोड़ रुपये का निवेश आया है और 12.6 लाख से अधिक रोजगार पैदा हुए हैं।
  • सेमीकंडक्टर: इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन के तहत 1.60 लाख करोड़ रुपये के 10 प्रोजेक्ट्स पर काम चल रहा है।

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10. गरीबी में भारी गिरावट 
नीति आयोग के मल्टीडायमेंशनल पॉवर्टी इंडेक्स (एमपीआई) का हवाला देते हुए सर्वे बताता है कि गरीबी 2005-06 के 55.3% से घटकर 2022-23 में 11.28% रह गई है।

11. इनोवेशन और रोजगार 
भारत ने इनोवेशन में लंबी छलांग लगाई है। ग्लोबल इनोवेशन इंडेक्स में भारत की रैंकिंग 2019 के 66वें स्थान से सुधरकर 2025 में 38वें स्थान पर आ गई है। रोजगार की बात करें नेशनल करियर सर्विस पोर्टल पर FY25 में 2.8 करोड़ से अधिक रिक्तियां मोबिलाइज की गईं। आर्थिक समीक्षा 2025-26 साफ करती है कि भारतीय अर्थव्यवस्था ने वैश्विक चुनौतियों के बीच अपनी चमक बनाए रखी है। हालांकि, राज्यों की वित्तीय स्थिति और अस्थिर वैश्विक पूंजी प्रवाह वे क्षेत्र हैं जिन पर नीति निर्माताओं को आगामी बजट में विशेष ध्यान देना होगा।
 

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