Draft Telecom Bill: दूरसंचार विभाग ने एक नया मसौदा विधेयक पेश किया है इसके माध्यम से सरकार भारत में दूरसंचार को नियंत्रित करने वाले मौजूदा कानूनी ढांचे में बदलाव करना चाहती है। सरकार नए विधेयक के माध्यम से भारतीय टेलीग्राफ अधिनियम, 1885, वायरलेस टेलीग्राफी अधिनियम, 1933 और टेलीग्राफ वायर (गैरकानूनी कब्जा) अधिनियम, 1950 को समेकित करना चाहती है।
दूरसंचार विभाग ने एक नया मसौदा विधेयक पेश किया है इसके माध्यम से सरकार भारत में दूरसंचार को नियंत्रित करने वाले मौजूदा कानूनी ढांचे में बदलाव करना चाहती है। सरकार नए विधेयक के माध्यम से भारतीय टेलीग्राफ अधिनियम, 1885, वायरलेस टेलीग्राफी अधिनियम, 1933 और टेलीग्राफ वायर (गैरकानूनी कब्जा) अधिनियम, 1950 को समेकित करना चाहती है।
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केंद्र का मानना है कि भारत को 21वीं सदी की वास्तविकताओं के अनुरूप दूरसंचार क्षेत्र के लिए एक नए कानूनी ढांचे की आवश्यकता है। प्रस्तावित विधेयक के व्याख्यात्मक नोट में इसे भारतीय दूरसंचार विधेयक, 2022 का नाम दिया गया है।
विभाग की ओर से जारी एक व्याख्यात्मक नोट में कहा गया है कि दूरसंचार क्षेत्र के लिए मौजूदा नियामक ढांचा भारतीय टेलीग्राफ अधिनियम, 1885 पर आधारित है। टेलीग्राफ के युग के बाद से दूरसंचार की प्रकृति, इसके उपयोग और प्रौद्योगिकियों में बड़े पैमाने पर बदलाव आया है। दुनिया ने 2013 से टेलीग्राफ का उपयोग करना बंद कर दिया है।
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महुआ मोइत्रा ने कसा तंज
इस बीच तृणमूल कांग्रेस की सांसद महुआ मोइत्रा ने टेलीकॉम बिल को लेकर तंज कसा। उन्होंने कहा कि स्पेक्ट्रम आत्मा जैसा होता है। ये मैं नहीं कह रही, बल्कि ये टेलीकॉम बिल में लिखा हुआ है। उन्होंने यह बात ट्वीट के जरिए की। इसमें महुआ ने टेलीकॉम बिल की पेज संख्या 5 पर लिखी पंक्तियों की फोटो भी पोस्ट की।