दिवंगत उद्योगपति संजय कपूर की करीब 30,000 करोड़ रुपये की संपत्ति को लेकर चल रही लड़ाई में नया मोड़ आया है। उनकी पत्नी बॉलीवुड अभिनेत्री करिश्मा कपूर और उनके दो बच्चों ने अपना उचित हिस्सा मांगने के लिए दिल्ली उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया है।
बच्चों ने अपनी सौतेली मां और संजय कंपूर की तीसरी पत्नी प्रिया कपूर के खिलाफ मुकदमा दायर किया है। उन्होंने आरोप लगाया है कि प्रिया सचदेव कपूर ने उनके पिता की संपत्ति पर पूर्ण नियंत्रण पाने के लिए उनकी वसीयत में जालसाजी करने का प्रयास किया है। बच्चों का प्रतिनिधित्व उनकी मां करिश्मा कानूनी अभिभावक के रूप में कर रही हैं। उन्होंने संपत्ति का बंटवारा, खातों का प्रतिदान व प्रतिवादियों के विरुद्ध स्थायी निषेधाज्ञा की मांग की है।
शिकायत के अनुसार, बच्चों का कहना है कि उनके पिता की मृत्यु के समय उन्हें उनकी संपत्ति के बारे में पूरी जानकारी नहीं थी। उन्होंने ज्ञात संपत्तियों की एक सूची संलग्न की है, लेकिन प्रतिवादी संख्या 1 (प्रिया कपूर) पर विवरण छिपाने और संपत्ति की पूरी सीमा का खुलासा न करने का आरोप लगाया है।
इस कानूनी विवाद में कई पक्ष शामिल हैं। वादी करिश्मा कपूर और संजय कपूर की बेटी और नाबालिग बेटा हैं, जिनका प्रतिनिधित्व अदालत में उनकी मां कर रही हैं। पहले और दूसरे प्रतिवादी संजय कपूर की तीसरी पत्नी प्रिया सचदेव कपूर और उनका नाबालिग बेटा हैं, जो दोनों रजोकरी स्थित परिवार के फार्महाउस में रहते हैं। तीसरे प्रतिवादी संजय कपूर की मां हैं, जो उसी घर में रहती हैं। चौथे प्रतिवादी एक महिला हैं जिन्होंने खुद को विवादित वसीयत की निष्पादक बताया है।
बच्चों के अनुसार, उनके दिवंगत पिता ने उन्हें बार-बार उनकी आर्थिक सुरक्षा और भविष्य की खुशहाली का आश्वासन दिया था। उनका दावा है कि उन्होंने उनके नाम पर व्यावसायिक उद्यम शुरू किए थे। व्यक्तिगत रूप से और कॉर्पोरेट संस्थाओं के माध्यम से संपत्तियां अर्जित की थीं, और उन्हें पारिवारिक ट्रस्ट का लाभार्थी बनाया था। उनका तर्क है कि ये आश्वासन साझा छुट्टियों, व्यापारिक बातचीत और व्यक्तिगत बातचीत के माध्यम से और मजबूत हुए, जो उनके भविष्य के प्रति उनकी प्रतिबद्धता को दर्शाते हैं।
संजय कपूर की मृत्यु के बाद, बच्चों ने उनका अंतिम संस्कार किया और 19 जून को लोधी श्मशान घाट पर बेटे ने चिता को मुखाग्नि दी। इसके तुरंत बाद तनाव बढ़ गया, क्योंकि प्रिया कपूर ने कथित तौर पर ट्रस्ट से संबंधित दस्तावेजों और वित्तीय परिसंपत्तियों तक उनकी पहुंच को सीमित करना शुरू कर दिया।