अनावश्यक जटिलताओं से बचने के लिए संशोधन जरूरी
उन्होंने कहा कि नए कोड के लागू होने के साथ ही सरकार को इन पूर्ववर्ती अधिनियमों को निरस्त (रिपील) करने का अधिकार प्राप्त हुआ था और सरकार ने उन्हें निरस्त भी कर दिया है। अब उद्देश्य यह है कि इस संबंध में एक छोटा-सा संशोधन किया जाए, ताकि यह प्रावधान स्पष्ट रूप से अधिनियम का हिस्सा बन सके और किसी प्रकार की कानूनी अस्पष्टता न रहे। उन्होंने सदन से अनुरोध किया कि इस संशोधन को स्वीकार कर पारित किया जाए, ताकि कानून की स्थिति पूरी तरह स्पष्ट हो सके।
विधेयक को लेकर क्या हुई चर्चा?
औद्योगिक संबंध संहिता (संशोधन) विधेयक, 2026 पर चर्चा की शुरुआत करते हुए कांग्रेस के कोडिकुन्निल सुरेश ने कहा कि प्रस्तावित बदलावों से अपेक्षित सुधार नजर नहीं आ रहे हैं। उन्होंने दावा किया था कि देश में युवाओं के बीच बेरोजगारी दर चिंताजनक रूप से ऊंची है और ऐसे समय में रोजगार सुरक्षा से जुड़े प्रावधानों को मजबूत करने के बजाय उन्हें कमजोर किया जा रहा है। इसके जवाब में भाजपा सांसद दर्शन सिंह चौधरी ने विधेयक का समर्थन करते हुए कहा कि यह कानून श्रमिकों के अधिकारों की रक्षा सुनिश्चित करता है। उन्होंने तर्क दिया कि संशोधन उद्योगों के लिए प्रक्रियाओं को सरल बनाते हुए ‘ईज ऑफ डूइंग बिजनेस’ को बढ़ावा देगा और इससे रोजगार सृजन को भी प्रोत्साहन मिलेगा।