विशेष पीएमएलए अदालत ने धन शोधन के एक मामले में पुणे के कारोबारी अविनाश भोसले को जमानत देने से इनकार कर दिया है। पीएमएलए कोर्ट ने कहा कि प्रथम दृष्टया यह स्पष्ट है कि आरोपित ने डीएचएफएल से बिना किसी वास्तविक कारोबारी लेन-देन के धोखाधड़ी से 71 करोड़ रुपये से अधिक की राशि हासिल की। अदालत ने चिकित्सा आधार पर जमानत देने से इनकार करते हुए अदालत ने कहा कि भोसले का उनकी इच्छा के अनुसार अस्पताल में काफी अच्छा इलाज चल रहा है और डॉक्टरों के अनुसार वह किसी जानलेवा बीमारी से पीड़ित नहीं हैं। विशेष पीएमएलए न्यायाधीश एमजी देशपांडे ने 20 जुलाई को भोसले की जमानत खारिज कर दी थी और मंगलवार को इसका विस्तृत आदेश उपलब्ध कराया गया।
जून 2022 में पुणे के कारोबारी को किया गया था गिरफ्तार
प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने धनशोधन के एक मामले में जून 2022 में एबीआईएल समूह के अध्यक्ष अविनाश भोसले को हिरासत में लिया था। पुणे के ऑटो चालक से कारोबारी को केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने यस बैंक के संस्थापक राणा कपूर और डीएचएफएल के कपिल वधावन से जुड़े भ्रष्टाचार के एक मामले में गिरफ्तार किया था। यस बैंक-डीएचएफएल बैंक धोखाधड़ी मामले में सीबीआई जांच के दौरान भोसले की भूमिका के बारे में एजेंसी को कई तथ्यों का पता चला था। जांच में पता चला था कि भोसने ने एक बिचौलिये के रूप में डीएचएफएल से ऋण दिलाने के लिए एक अन्य रियल एस्टेट डेवलपर से कथित तौर पर 360 करोड़ रुपये से अधिक की रिश्वत ली थी, जो आगे चलकर गैर-निष्पादित परिसंपत्तियों में बदल गई।