पिछले एक साल में आठ घरेलू एयरलाइनों के 23 ऑडिट के दौरान डीजीसीए को 263 खामियां मिलीं, जिनमें तत्काल सुधारात्मक कार्रवाई की आवश्यकता वाली खामियां भी शामिल हैं। विमानन सुरक्षा नियामक डीजीसीए ने बुधवार को यह जानकारी दी।
हालांकि, नागरिक उड्डयन महानिदेशालय ने कहा कि एयर इंडिया के ऑडिट के दौरान सामने आई खामियों की बढ़ती संख्या को देखते हुए, व्यापक परिचालन वाली एयरलाइनों के लिए ऑडिट निष्कर्षों या खामियों की अधिक संख्या "पूरी तरह से सामान्य" है। आंकड़ों के अनुसार, पिछले एक वर्ष में टाटा समूह के स्वामित्व वाली एयर इंडिया (और अब विलय हो चुकी विस्तारा) और एयर इंडिया एक्सप्रेस के साथ कुल 93 मामले सामने आए हैं। इन निष्कर्षों में 19 स्तर-1 उल्लंघन शामिल थे जिन्हें गंभीर सुरक्षा जोखिम माना जाता है और जिनके लिए हवाई ऑपरेटर द्वारा तत्काल सुधारात्मक कार्रवाई की आवश्यकता होती है
मंगलवार को सूत्रों ने बताया था कि डीजीसीए को एयर इंडिया के प्रशिक्षण, चालक दल के आराम और ड्यूटी अवधि के मानदंडों, और हवाई क्षेत्र योग्यता आदि से संबंधित लगभग 100 उल्लंघनों और टिप्पणियों का पता चला है। नियामक ने एयर इंडिया के 51 ऑडिट निष्कर्षों में इन उल्लंघनों का उल्लेख किया था। डीजीसीए ने एक बयान में कहा कि वह परिचालन की सुरक्षा बढ़ाने और अनुपालन सुनिश्चित करने तथा एयरलाइन परिचालन के सभी पहलुओं में निरंतर सुधार के लिए ऑडिट करता है।
डीजीसीए ने कहा, "इस बात पर जोर दिया जाना चाहिए कि व्यापक परिचालन और बड़े आकार के बेड़े वाली एयरलाइनों के लिए, ऑडिट निष्कर्षों की अधिक संख्या पूरी तरह से सामान्य है।" बयान में कहा गया है, "उनकी गतिविधियों की मात्रा और पैमाने का अर्थ है कि इस तरह के अवलोकन किसी असामान्य चूक के बजाय उनके संचालन की व्यापकता और गहराई को दर्शाते हैं।"
आंकड़ों से पता चला कि पिछले एक वर्ष में इंडिगो के साथ 23, स्पाइसजेट के साथ 14, एलायंस एयर के साथ 57, क्विक जेट के साथ 35, घोडावत स्टार के साथ 41 और पूर्ववर्ती विस्तारा के साथ 17 ऑडिट से जुड़ी खामियां मिलीं। जिन निष्कर्षों को गंभीर जोखिम माना जाता है और जिनके लिए तत्काल सुधारात्मक कार्रवाई की आवश्यकता होती है, उन्हें स्तर-1 के रूप में वर्गीकृत किया जाता है, जबकि स्तर-2 चूक में गैर-अनुपालन शामिल होता है।