बैंकों की मुख्य गतिविधियों की ज्यादा आउटसोर्सिंग से एकाग्रता जोखिम पैदा होगा। भारतीय बैंक संघ (आईबीए) के एक कार्यक्रम में भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के कार्यकारी निदेशक अजय कुमार चौधरी ने इस मामले में बैंकों को चेतावनी दी। उन्होंने कहा, बैंक प्रबंधन के शीर्ष स्तर को यह सुनिश्चित करना होगा कि वे मुख्य गतिविधियों को तीसरे पक्ष को आउटसोर्स न करें। बल्कि उन्हें अपनी खुद की कोर बैंकिंग गतिविधियों को अपग्रेड करने पर ध्यान देना चाहिए।
चौधरी ने कहा, आउटसोर्सिंग को लेकर हमारे दिशानिर्देश हैं। आउटसोर्सिंग करते समय यह बहुत महत्वपूर्ण है कि स्थिति को ठीक करने के साथ-साथ बैंकिंग प्रणाली की वित्तीय स्थिरता के लिए पर्याप्त सुरक्षा उपाय स्थापित किए जाएं। खोजपरक समाधान प्रदान करने वाली फिनटेक कंपनियां इस क्षेत्र में काम कर रही हैं। ऐसे में बैंकों ने तेजी से कई गतिविधियों, विशेष रूप से ग्राहक सेवाओं को इन कंपनियों को आउटसोर्स किया है। उन्होंने कहा, हम बैंकिंग और वित्त क्षेत्र में सेवाओं की आउटसोर्सिंग में वृद्धि देख रहे हैं। बैंकों को अपने कोर बैंकिंग समाधान के विकास और उन्नयन पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए। निर्बाध सेवाएं प्रदान करने के लिए बैंकिंग में टेक्नोलॉजी का उपयोग बढ़ रहा है। बैंक सीमित तकनीकी प्रदाताओं के साथ सहयोग कर रहे हैं। इससे एकाग्रता का जोखिम बढ़ सकता है।
चौधरी के अनुसार, इस तरह के जोखिम को कम करने के लिए विविधीकरण सबसे आसान तरीका है। मैं सभी बैंकों और अन्य उद्योग प्रतिभागियों से आग्रह करता हूं कि जब तकनीक अपनाने की बात हो तो नए विकल्प तलाशें। यह उतना ही महत्वपूर्ण है कि हम सभी खुद को विकसित तकनीक से परिचित हों। आरबीआई डिजिटलाइजेशन पर अधिक जोर देता है। ऐसे तकनीकी समाधानों की खोज कर रहे हैं जो उद्योग के प्रतिभागियों को तकनीक तक तेज, सस्ती और सरल पहुंच प्रदान करे। जो उन्हें डिजिटलीकरण करने में सक्षम बना सकते हैं।