उपभोक्ता मामलों के विभाग ने कहा, संशोधित एमआरपी स्टिकर लगाकर या ऑनलाइन प्रिंट करके घोषित की जा सकती है। बशर्ते मूल एमआरपी प्रदर्शित रहे और संशोधित मूल्य उस पर अंकित न हो। मूल और संशोधित मूल्य के बीच का अंतर कर वृद्धि या कमी की सीमा से अधिक नहीं होना चाहिए।
उपभोक्ता मामलों के विभाग ने रोजमर्रा के बचे सामानों के मूल्य को संशोधित करने की मंजूरी दे दी है। जीएसटी दरों में बदलाव के कारण यह फैसला लिया गया है। इससे कंपनियों और ग्राहकों दोनों को फायदा होगा। पहले से पैक वस्तुओं के निर्माताओं, पैकर्स व आयातकों को जीएसटी दरों में संशोधन से पहले निर्मित या आयातित बिना बिके स्टॉक पर संशोधित खुदरा बिक्री मूल्य (एमआरपी) घोषित करना होगा।
विभाग ने कहा, संशोधित एमआरपी स्टिकर लगाकर या ऑनलाइन प्रिंट करके घोषित की जा सकती है। बशर्ते मूल एमआरपी प्रदर्शित रहे और संशोधित मूल्य उस पर अंकित न हो। मूल और संशोधित मूल्य के बीच का अंतर कर वृद्धि या कमी की सीमा से अधिक नहीं होना चाहिए। निर्माताओं, पैकर्स और आयातकों को समाचार पत्रों में कम से कम दो विज्ञापन देने होंगे। डीलरों व केंद्र में विधिक माप विज्ञान निदेशक व राज्यों व केंद्र शासित प्रदेशों में संबंधित विभाग को मूल्य में परिवर्तन की सूचना देनी होगी।
31 दिसंबर तक रहेगी मंजूरी
यह मंजूरी 31 दिसंबर तक या स्टॉक समाप्त होने तक, जो भी पहले हो, मान्य है। जिन पैकेजिंग सामग्रियों या रैपरों का उपयोग जीएसटी संशोधन से पहले नहीं हुआ था, उनका उपयोग 31 दिसंबर तक या सामग्री समाप्त होने तक एमआरपी में सुधार करने के बाद किया जा सकता है। कंपनियों का कहना है कि गोदामों और खुदरा दुकानों में मौजूद उत्पादों के भाव मौजूदा जीएसटी के तहत तय होते हैं। इसे अब हटाया जाना है। इससे कीमतों में दोहरी इन्वेंट्री जटिलताएं पैदा होंगी।