फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

GST: बिना बिके स्टॉक की कीमतों में एफएमसीजी कंपनियों को मिला संशोधन का अधिकार, 31 दिसंबर तक रहेगी मंजूरी

Wed, 10 Sep 2025 07:20 AM IST
दीपक कुमार शर्मा अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली

सार

उपभोक्ता मामलों के विभाग ने कहा, संशोधित एमआरपी स्टिकर लगाकर या ऑनलाइन प्रिंट करके घोषित की जा सकती है। बशर्ते मूल एमआरपी प्रदर्शित रहे और संशोधित मूल्य उस पर अंकित न हो। मूल और संशोधित मूल्य के बीच का अंतर कर वृद्धि या कमी की सीमा से अधिक नहीं होना चाहिए। 
विज्ञापन
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : stock.adobe
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

उपभोक्ता मामलों के विभाग ने रोजमर्रा के बचे सामानों के मूल्य को संशोधित करने की मंजूरी दे दी है। जीएसटी दरों में बदलाव के कारण यह फैसला लिया गया है। इससे कंपनियों और ग्राहकों दोनों को फायदा होगा। पहले से पैक वस्तुओं के निर्माताओं, पैकर्स व आयातकों को जीएसटी दरों में संशोधन से पहले निर्मित या आयातित बिना बिके स्टॉक पर संशोधित खुदरा बिक्री मूल्य (एमआरपी) घोषित करना होगा।

विज्ञापन


ये भी पढ़ें: MSME for Bharat: तालों व हार्डवेयर के मामले में अलीगढ़ की खास पहचान, एमएसएमई फॉर भारत के आयोजन से मिलेगी मदद

विभाग ने कहा, संशोधित एमआरपी स्टिकर लगाकर या ऑनलाइन प्रिंट करके घोषित की जा सकती है। बशर्ते मूल एमआरपी प्रदर्शित रहे और संशोधित मूल्य उस पर अंकित न हो। मूल और संशोधित मूल्य के बीच का अंतर कर वृद्धि या कमी की सीमा से अधिक नहीं होना चाहिए। निर्माताओं, पैकर्स और आयातकों को समाचार पत्रों में कम से कम दो विज्ञापन देने होंगे। डीलरों व केंद्र में विधिक माप विज्ञान निदेशक व राज्यों व केंद्र शासित प्रदेशों में संबंधित विभाग को मूल्य में परिवर्तन की सूचना देनी होगी।
विज्ञापन
विज्ञापन


ये भी पढ़ें: Gold Silver Price: सर्राफा बाजार में लंबी छलांग; सोना ₹5080 चढ़कर नए शिखर पर, चांदी ₹1.28 लाख के पार पहुंची

31 दिसंबर तक रहेगी मंजूरी
यह मंजूरी 31 दिसंबर तक या स्टॉक समाप्त होने तक, जो भी पहले हो, मान्य है। जिन पैकेजिंग सामग्रियों या रैपरों का उपयोग जीएसटी संशोधन से पहले नहीं हुआ था, उनका उपयोग 31 दिसंबर तक या सामग्री समाप्त होने तक एमआरपी में सुधार करने के बाद किया जा सकता है। कंपनियों का कहना है कि गोदामों और खुदरा दुकानों में मौजूद उत्पादों के भाव मौजूदा जीएसटी के तहत तय होते हैं। इसे अब हटाया जाना है। इससे कीमतों में दोहरी इन्वेंट्री जटिलताएं पैदा होंगी।

विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें