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Tariffs: कपास पर आयात शुल्क छूट की समयसीमा दिसंबर 2025 तक बढ़ी, टैरिफ से जूझ रहे कपड़ा उद्योग को अस्थायी राहत

Thu, 28 Aug 2025 12:51 PM IST
रिया दुबे बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

सरकार ने कपड़ा क्षेत्र को अमेरिकी टैरिफ राहत देने के लिए कपास पर आयात शुल्क छूट को दिसंबर 2025 तक बढ़ा दिया है। सीआईटीआई की महासचिव चंद्रिमा चटर्जी ने कहा कि यह निर्णय उद्योग प्रतिनिधियों की लगातार अपील का परिणाम है।
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सांकेतिक तस्वीर - फोटो : Adobestock
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विस्तार
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केंद्र ने कपास पर आयात शुल्क छूट को दिसंबर 2025 तक बढ़ा दिया है। यह फैसला कपड़ा क्षेत्र को अमेरिकी टैरिफ राहत देने के लिए उठाया गया है। वित्त मंत्रालय के अनुसार इस कदम का उद्देश्य घरेलू कपड़ा उद्योग के लिए कपास की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करना है।  

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तीन महीने के लिए छूट बढ़ाई

विज्ञप्ति में कहा गया है कि भारतीय कपड़ा क्षेत्र के लिए कपास की उपलब्धता बढ़ाने के लिए केंद्र ने 19 अगस्त 2025 से 30 सिंतबर 2025 तक कपास पर आयात शुल्क में अस्थायी रूप से छूट दी थी। निर्यातकों को और अधिक समर्थन देने के लिए केंद्र ने कपास (एचएस 5201) पर आयात शुल्क छूट को 30 सिंतबर 2025 से 31 दिसंबर 2025 तक बढ़ाने का फैसला किया है। 

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इस महीने की शुरुआत में, कपड़ा संगठनों ने 30 सितंबर तक कपास के आयात पर सीमा शुल्क में छूट का स्वागत किया था, और कहा था कि इससे अनिश्चित आपूर्ति से जूझ रहे निर्माताओं और निर्यातकों को तत्काल राहत मिलेगी।

उद्योग जगत की अपील का परिणाम

सीआईटीआई की महासचिव चंद्रिमा चटर्जी ने कहा कि यह निर्णय उद्योग प्रतिनिधियों की लगातार अपील का परिणाम है। उन्होंने कहा कि यह भारतीय उद्योग के लिए एक शानदार कदम है, और अगर इससे बातचीत को कोई सकारात्मक संकेत मिलता है, तो मुझे लगता है कि यह दोनों पक्षों के लिए फायदेमंद है। 

भारत का परिधान क्षेत्र जीडीपी में 2% का योगदान करता है

इससे पहले भारतीय वस्त्र उद्योग परिसंघ (सीआईटीआई) के अध्यक्ष राकेश मेहरा ने मंगलवार को राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था में कपड़ा क्षेत्र के महत्व पर प्रकाश डाला था। उन्होंने कहा कि भारत का कपड़ा और परिधान क्षेत्र देश के सकल घरेलू उत्पाद में लगभग 2 प्रतिशत का योगदान देता है। यह रोजगार और आजीविका प्रदान करने वाले सबसे बड़े क्षेत्रों में से एक है।

दूसरे प्रतिस्पर्धियों की तुलना में भारत पर अधिक टैरिफ

उन्होंने आगे बताया कि अमेरिका भारतीय कपड़ा और परिधान वस्तुओं का सबसे बड़ा बाजार बना हुआ है। इसका निर्यात लगभग 28 प्रतिशत है। अकेले 2024-25 में, भारत द्वारा अमेरिका को इन उत्पादों का निर्यात लगभग 11 अरब डॉलर का था। चीन अमेरिका को कपड़ा और परिधान का सबसे बड़ा आपूर्तिकर्ता है, उसके बाद वियतनाम, भारत और बांग्लादेश का स्थान आता है। वर्तमान में, वियतनाम और बांग्लादेश के लिए अमेरिकी टैरिफ दरें 20 प्रतिशत हैं, जो भारतीय उत्पाद निर्यात पर लगाए गए 50 प्रतिशत से काफी कम है।

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