दाऊद के गिरोह को आईएसआई किस रूप में ढाल रही?
आईएसआई ने उत्तराधिकार के मुद्दे को सुलझाने के लिए एक बड़ा कदम उठाया और गिरोह को एक कॉरपोरेट फर्म का रूप दे दिया है। इस व्यवस्था के तहत गिरोह के अलग-अलग लोगों को अलग-अलग भूमिका दी गई है।
- भारत में कौन देख रहा गिरोह?: भारत में दाऊद गैंग की काली करतूतों को अंजाम देने में सबसे बड़ी भूमिका छोटा शकील की है। रंगदारी से लेकर नकली नोटों का कारोबार हो गया अवैध वसूली- वह भारत में दाऊद का पूरा गिरोह चलाता है। भारत में दाऊद के सभी गुर्गे उसे अपना बॉस मानते हैं। दाऊद परिवार के लिए शकील को खोने का मतलब भारतीय बाजार को खोना था। आईएसआई की ओर से तय कॉरपोरेट ढांचे में शकील को भारत में डी-कंपनी चलाने का जिम्मा सौंपा गया है।
- विदेशी कारोबार: दाऊद के भाई अनीस इब्राहिम को दुनियाभर में फैले दाऊद के अवैध गिरोहों को चलाने की जिम्मेदारी सौंपी गई है। पाकिस्तान के बाहर दाऊद गैंग का हवाला करोबार भी उसके जिम्मे किया गया है।
- वित्तीय प्रबंधन: दाऊद के दामाद जुनैद मियांदाद के बारे में कहा जाता है कि वह गिरोह की काली कमाई मैनेज करता है। पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आईएसआई के प्लान के अनुसार उसे गिरोह का वित्त विभाग चलाने और दाऊद के काले पैसे का हिसाब-किताब रखने को कहा गया है।
सूत्रों का यह भी कहना है कि दाऊद की पत्नी महजबीन अपने बेटे मोईन को डी-कंपनी के आतंकी नेटवर्क में टॉप पर पहुंचाना चाहती थी। लेकिन आएसआई ने फिलहाल इसे टाल दिया है। इस उत्तराधिकार योजना पर बातचीत के दौरान भारत और दुनिया के अन्य हिस्सों में फैले दाऊद के आतंकी नेटवर्क के सहयोगियों से परामर्श किया गया। आईएसआई के सूत्रों के अनुसार, गिरोह का कोई एक बॉस नहीं होना चाहिए, क्योंकि इससे अहम का टकराव हो सकता है और वे आपस में ही लड़ सकते हैं। ऐसे में यह तय किया गया है कि दाऊद की मौत के बाद भी दाऊद गिरोह उसी तरीके से काम करेगा जैसा खाका आईएसआई ने तैयार किया है।
आईएसआई के लिए दाऊद का गिरोह कितना जरूरी?
आईएसआई के लिए दाऊद आज भी पैसे की उगाही करने वाली सबसे बड़ी मशीन है। उसी से मिले काले पैसे का इस्तेमाल इंडियन मुजाहिदीन, लश्कर-ए-तैयबा और जैश-ए-मोहम्मद जैसे आतंकी संगठनों को पालने के लिए किया जाता है। इसके बदले में आईएसआई सिंडिकेट को सुरक्षा और नशीले पदार्थों के टांसपोर्टेशन की अनुमति देती है। आईएसआई लॉजिस्टिक्स (रसद) व तस्करी के मार्गों को सुरक्षित रखने में मदद करती है। इस नई रणनीति से आईएसआई ने न केवल दाऊद सिंडिकेट को बिखरने से बचाया है, बल्कि अपने नापाक इरादों के लिए फंडिंग भी सुनिश्चित कर ली है।