पूर्व आरबीआई गवर्नर डी सुब्बाराव ने कहा है कि भारत के लिए तेज आर्थिक वृद्धि हासिल करने के साथ-साथ उसे रोजगार-गहन बनाना भी एक बड़ी चुनौती है। उन्होंने बताया कि सात फीसदी या उससे अधिक की वृद्धि बनाए रखने के लिए मजबूत निजी निवेश आवश्यक है। इसके लिए श्रम-गहन विनिर्माण, बेहतर मानव पूंजी और वैश्विक मूल्य शृंखलाओं में गहरा एकीकरण जरूरी है। सुब्बाराव ने भारत की मध्यम अवधि की संभावनाओं पर आशा व्यक्त की, लेकिन आत्मसंतुष्ट न होने की बात कही।
सुब्बाराव के अनुसार, समस्या यह नहीं है कि वृद्धि रोजगार पैदा नहीं करती, बल्कि यह है कि वृद्धि की संरचना उसकी गति जितनी ही महत्वपूर्ण है। अर्थव्यवस्था पूंजी-गहन उद्योगों, स्वचालन और कम लोगों को रोजगार देने वाले क्षेत्रों के जरिये तेजी से बढ़ सकती है। इससे उत्पादन बढ़ता है, लेकिन रोजगार आनुपातिक रूप से नहीं बढ़ता, जो भारत के लिए एक केंद्रीय चिंता है। कृषि क्षेत्र में लाखों श्रमिक अल्प-रोजगार वाले हैं। कई सेवा नौकरियां अनौपचारिक, कम उत्पादकता वाली और कम वेतन वाली हैं। शिक्षित युवा भी उपयुक्त रोजगार खोजने के लिए संघर्ष करते हैं, क्योंकि अर्थव्यवस्था उनके कौशल से मेल खाने वाले पर्याप्त रोजगार सृजित नहीं कर रही है।
सुब्बाराव ने कहा कि यह केवल श्रम-बाजार की समस्या नहीं, बल्कि एक वृहद-आर्थिक चिंता है। यदि वृद्धि आबादी के एक बड़े वर्ग के लिए आय में नहीं बदलती, तो खपत मांग बाधित रहती है। इससे कारोबारों के निवेश और विस्तार का प्रोत्साहन कमजोर होता है, जो बदले में वृद्धि को नुकसान पहुंचाता है और एक दुष्चक्र बनाता है। हमें कपड़ा, परिधान, जूते-चप्पल और खाद्य प्रसंस्करण सहित श्रम-गहन विनिर्माण को प्रोत्साहित करने की आवश्यकता है। हमें उत्पादक सेवाओं में रोजगार का विस्तार करना चाहिए। व्यावसायिक प्रशिक्षण में सुधार करना और छोटे कारोबारों को बड़े, अधिक उत्पादक उद्यमों में बदलना आसान बनाना चाहिए।
सुब्बाराव ने जीडीपी अनुमानों की कार्यप्रणाली पर भी बात की। उन्होंने कहा कि कार्यप्रणाली को अद्यतन करना आवश्यक है क्योंकि अर्थव्यवस्था बदलती रहती है। चार सुधार विशेष रूप से महत्वपूर्ण हैं: पहला है आधार वर्ष को रिकॉर्ड पर रखना, अनौपचारिक क्षेत्र के बेहतर अनुमान, डबल डिफ्लेशन और बेहतर उत्पादक-मूल्य उपाय। सैद्धांतिक रूप से ये सुधार हैं, लेकिन बेहतर कार्यप्रणाली स्वचालित रूप से हर अनुमान के सही होने की गारंटी नहीं देती। कुछ अनुमानों, जैसे विनिर्माण डिफ्लेटर और जीडीपी आंकड़ों व आर्थिक गतिविधि के अन्य संकेतकों के बीच अंतर पर वैध प्रश्न हैं। इन पर पारदर्शी तकनीकी जांच होनी चाहिए।