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रतन टाटा ने संभाली ग्रुप की कमान, साइरस मिस्त्री को हटाया

Tue, 25 Oct 2016 01:46 PM IST
टीम डिजिटल/ अमर उजाला, नई दिल्ली
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नमक से लेकर सॉफ्टवेयर तक बनाने वाली 100 अरब डॉलर की कंपनी टाटा ग्रुप ने अपने अध्यक्ष सायरस मिस्त्री को बर्खास्त कर कॉर्पोरेट जगत को चौंका दिया है। कंपनी के बोर्ड ने चार साल से अध्यक्ष का पद संभाल रहे 48 वर्षीय मिस्त्री की छुट्टी कर इसकी अंतरिम कमान एक बार फिर से रतन टाटा को सौंप दी है। इसके साथ ही मिस्त्री द्वारा 2013 में गठित समूह कार्यकारी परिषद (जीईसी) को भी भंग कर दिया गया है। बोर्ड के फैसले से नाराज ग्रुप की सबसे बड़ी हिस्सेदार कंपनी शापूरजी पलोनजी ने अवैध करार देते हुए हाईकोर्ट जाने की धमकी दी है। 
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टाटा संस के बोर्ड की सोमवार को हुई बैठक में यह फैसला किया गया और 78 वर्षीय रतन टाटा को अंतरिम अध्यक्ष बनाने की घोषणा की गई। बोर्ड ने चार महीने के लिए मिस्त्री की जगह नया अध्यक्ष चुनने के लिए सर्च कमेटी के पांच सदस्यों का नाम सुझाया जिसमें टाटा भी शामिल हैं। कंपनी के बयान के मुताबिक, फिलहाल अंतरिम अध्यक्ष के तौर पर रतन टाटा ही कार्यभार संभालेंगे। बयान में कहा गया है कि समिति के लिए नए अध्यक्ष की चयन प्रक्रिया चार महीने के अंदर पूरा कर लेना अनिवार्य है। रतन टाटा के उत्तराधिकारी के तौर पर मिस्त्री को यह जिम्मेदारी 29 दिसंबर 2012 को सौंपी गई थी। बोर्ड में वह 2006 में चुने गए और इसके बाद नवंबर 2011 में कंपनी के उपाध्यक्ष बनाए गए। टाटा संस के सबसे बड़े हिस्सेदार शापूरजी पलोनजी के प्रतिनिधि के तौर पर उन्हें अध्यक्ष बनाया गया था।

हालांकि नेतृत्व परिवर्तन का कोई कारण नहीं बताया गया है लेकिन समझा जाता है कि बोर्ड घाटे का कारोबार संभालने में विफल मिस्त्री से नाखुश था। इसके अलावा वह सिर्फ मुनाफे के कारोबार में ही दिलचस्पी रखते थे। टाटा संस इस ग्रुप की मुख्य भागीदार कंपनी है। बोर्ड में टाटा, वेणु श्रीनिवासन का टीवीएस ग्रुप, बेन कैपिटल के अमित चंद्रा, पूर्व राजनयिक रोनेन सेन और लॉर्ड कुमार भट्टाचार्य शामिल हैं। भट्टाचार्य को छोड़कर सभी सदस्य टाटा संस के बोर्ड से जुड़े हैं। रतन टाटा के कार्यकाल में कंपनी ने कई महत्वपूर्ण अधिग्रहण किए। उन्होंने सन 2000 में टेटली का 45 करोड़ डॉलर में अधिग्रहण किया जबकि 2007 में कोरस (टाटा स्टील) और 2008 में जगुआर लैंड रोवर (टाटा मोटर्स) का 2.3 अरब डॉलर में अधिग्रहण किया। इस लिहाज से मिस्त्री का फैसला टाटा की रणनीति के बिल्कुल उलट रहा। 
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बोर्ड को नागवार गुजरा मिस्त्री का कड़ा फैसला 

ratan tata
पांच सदस्यीय पैनल द्वारा 2011 में रतन टाटा की जगह चुने गए मिस्त्री को पद संभालते ही कई चुनौतीपूर्ण हालात से गुजरना पड़ा। लगातार बढ़ते घाटे के कारण उन्हें टाटा स्टील यूके बेचने का फैसला करना पड़ा। टाटा ग्रुप को जापानी डोकोमो कंपनी के साथ साझा टेलीकॉम उपक्रम के विवाद और कानूनी लड़ाई से भी जूझना पड़ा। एक इन-हाउस पत्रिका को दिए इंटरव्यू में मिस्त्री ने कहा था, ‘ग्रुप को सही कारणों से कड़े फैसले लेने से घबराना नहीं चाहिए। ग्रुप के कुछ कारोबार की चुनौतीपूर्ण स्थितियों से निपटने के लिए कड़े फैसले लेने की जरूरत है।’   

हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाएंगे 
टाटा ग्रुप के सबसे बड़े हिस्सेदार शापूरजी एवं पालोनजी ग्रुप ने फैसले को चुनौती देते हुए हाईकोर्ट जाने का मन बना लिया है। शापूरजी पलोनजी ग्रुप का कहना है कि मिस्त्री को पद से हटाने से पहले कम से कम 15 दिन का नोटिस देना जरूरी था लेकिन ऐसा नहीं किया गया। बोर्ड के नौ में से छह सदस्यों ने मिस्त्री के खिलाफ वोट दिया जबकि दो सदस्य वोटिंग से अलग रहे। लिहाजा यह सर्वसम्मति से किया गया फैसला नहीं है।

टाटा ट्रस्ट की सलाह पर किया गया फैसला 
मुंबई। जिस समिति को टाटा ग्रुप में रतन टाटा का नया उत्तराधिकारी चुनने का जिम्मा सौंपा गया था, उसमें सायरस मिस्त्री भी शामिल थे और इस पद के लिए खुद चुने जाने से वह चकित थे। लेकिन चार साल के अंदर ही अध्यक्ष पद से सोमवार को बर्खास्तगी की खबर भी उनके लिए अप्रत्याशित रही। तामझाम से दूर रहने वाले एकांतप्रिय मिस्त्री इस ग्रुप का दायित्व संभालने वाले गैर-टाटा परिवार के दूसरे व्यक्ति थे। इससे पहले 1932 में नौरोजी सकलतवाला ही ऐसे अध्यक्ष बने थे। मिस्त्री ने जब कार्यभार संभाला था तो समूह की कई कंपनियां विपरीत परिस्थितियों के दौर से गुजर रही थीं। मिस्त्री को घरेलू एवं अंतरराष्ट्रीय बाजार में कई चुनौतियों से जूझना पड़ा था। लिहाजा उन्होंने विनिवेश की रणनीति अपनाई। सूत्रों का कहना है कि मिस्त्री को बर्खास्त करने का फैसला टाटा ट्रस्ट की सलाह पर किया गया है। 

कंपनी के हित में पद की जिम्मेदारी निभाऊंगा: टाटा
टाटा संस के अंतरिम अध्यक्ष पद का कार्यभार संभालते ही रतन टाटा ने अपने कर्मचारियों को पत्र लिखकर बताया है कि वह ग्रुप की स्थिरता के हित में अंतरिम अध्यक्ष की भूमिका निभाने के लिए तैयार हैं। पत्र में 78 वर्षीय टाटा ने अपने कर्मचारियों को जानकारी दी कि निदेशक मंडल की बैठक में सायरस मिस्त्री को तत्काल प्रभाव से हटा दिया गया है। टाटा ने अपनी इस नई भूमिका की जानकारी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भी पत्र लिखकर दी है।

उन्होंने लिखा है, ‘एक नई प्रबंधन इकाई का गठन किया जा रहा है और टाटा संस के अगले अध्यक्ष को चुनने की प्रक्रिया शुरू हो गई है। बोर्ड ने फिलहाल मुझसे अंतरिम अध्यक्ष का कार्यभार संभालने का अनुरोध किया है और मैं समूह की स्थिरता के लिए यह पद संभालने को तैयार हूं।’ 
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