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Energy Crisis: 'पेट्रोल-डीजल के कीमतों की हर 15 दिनों पर होगी समीक्षा', जानिए और क्या बोले सीबीआईसी चेयरमैन

Fri, 27 Mar 2026 04:46 PM IST
Kumar Vivek बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

पश्चिम एशिया संकट से कच्चे तेल की कीमतों में भारी उछाल के बीच, सरकार ने देश की ऊर्जा सुरक्षा के लिए 15-दिवसीय समीक्षा तंत्र लागू किया है। इस बारे में क्या है अपडेट? जानने के लिए पढ़ें खबर।
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पेट्रोल पंप - फोटो : amar ujala
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विस्तार
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पश्चिम एशिया में चल रहे गंभीर संकट का सीधा असर अब भारतीय अर्थव्यवस्था और पेट्रोलियम पदार्थों की आपूर्ति पड़ने लगा है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में आए भारी उछाल के बीच, रकार ने देश की ऊर्जा सुरक्षा के लिए एक कदम उठाया है। केंद्रीय अप्रत्यक्ष कर और सीमा शुल्क बोर्ड के चेयरमैन विवेक चतुर्वेदी ने साफ किया है कि वैश्विक अनिश्चितता के इस दौर में घरेलू बाजार में ईंधन आसानी से उपलब्ध हो इसे सुनिश्चित किया जा रहा है।

सीबीआईसी के चेयरमैन ने क्या बताया?

सीबीआईसी के चेयरमैन विवेक चतुर्वेदी ने कहा कि पश्चिम एशिया का संकट भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए एक बड़ी चुनौती है। इस संकट के कारण पेट्रोलियम उत्पादों की आपूर्ति शृंखला में बुरी तरह से बाधित हुई है। इसके असर से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में बड़ा उछाल आया है। वैश्विक बाजारों में बाजार में कीमतों को लेकर अनिश्चितता का माहौल है।

क्या है सरकार का एक्शन प्लान?

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तेजी से बदलती परिस्थितियों और अस्थिरता को देखते हुए, सरकार ने पेट्रोल और डीजल जैसे ईंधन की दरों में समीक्षा का प्लान बदला है। 

  • नीतिगत बदलावों के तहत, सरकार अब पेट्रोलियम उत्पादों से जुड़ी दरों की हर 15 दिन में समीक्षा करेगी। 
  • इस पाक्षिक समीक्षा के लिए सरकार की ओर से एक विशेष तंत्र लाया जा रहा है। 
  • इस बदलाव का मुख्य लक्ष्य वैश्विक आपूर्ति शृंखला में आई रुकावटों के बीच देश की ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत बनाए रखना है।

घरेलू बाजार और प्रमुख सेक्टर्स पर प्रभाव

15 दिन पर ईंधन की कीमतों की समीक्षा से वैश्विक अनिश्चितता के इस दौरान में सुनिश्चित करना चाहती है कि देश के भीतर इन आवश्यक ईंधनों की कोई कमी न हो। 

राजस्व पर असर और विभाग की निगरानी

  • लगातार बदलती भू-राजनीतिक और आर्थिक स्थितियों को देखते हुए, सरकारी विभाग राजस्व पर पड़ने वाले प्रभावों की भी कड़ी निगरानी कर रहा है। 
  • सीबीआईसी प्रमुख ने बताया कि निर्यात के मोर्चे पर पहले ही राजस्व पर प्रभाव देखा जा चुका है। 
  • अब विभाग पाक्षिक आधार पर यानी हर 15 दिनों पर आयात के रुझानों का गहराई से विश्लेषण करेगा। 
  • आयात के आंकड़ों को देखकर ही यह तय किया जाएगा कि राजस्व पर इसका क्या वास्तविक प्रभाव पड़ा है, क्योंकि मौजूदा स्थिति बेहद गतिशील है।

पश्चिम एशिया के तनाव ने अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार के साथ-साथ भारत के लिए भी नई चुनौतियां खड़ी कर दी हैं। हालांकि, सरकार का 15-दिवसीय समीक्षा तंत्र और डीजल व ईटीएफ की घरेलू उपलब्धता पर विशेष फोकस, इस बात का स्पष्ट संकेत है कि देश की ऊर्जा जरूरतों को किसी भी कीमत पर सुरक्षित रखा जाएगा। आने वाले समय में आयात-निर्यात के रुझानों और राजस्व पर पड़ने वाले प्रभावों की पाक्षिक निगरानी ही इस अस्थिर माहौल में भारत की आगे की आर्थिक दिशा तय करेगी।

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