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70 डॉलर के पार हुआ कच्चा तेल, रुपये में 15 महीनों की दिखी सबसे बड़ी गिरावट

Mon, 07 May 2018 01:58 PM IST
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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2014 में हुए आम चुनावों के बाद पहली बार कच्चे तेल की कीमतें एक बार फिर से अपने उच्चतम स्तर पर पहुंच गई हैं। इसी बीच, डॉलर के मुकाबले रुपये के लगातार गिरने से भी आने वाले कुछ समय में इसका दूरगामी असर देखने को मिलेगा। इससे देश में पेट्रोल-डीजल की कीमतें और उछाल ले सकती हैं। 

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70 डॉलर के पार हुआ कच्चा तेल
सोमवार को कच्चा तेल 70 डॉलर के पार चला गया है। वहीं रुपया भी 66.87 के स्तर पर कारोबार करते हुए देखा गया। ब्रेंट क्रूड करीब 4 परसेंट चढ़कर 71 डॉलर के करीब निकलने में कामयाब रहा। डॉलर के मुकाबले रुपया 40 पैसे टूटकर 67.05 के स्तर पर आ गया। रुपये का यह स्तर बीते 15 महीने का निचला स्तर है। आखिरी बार रुपये का यह स्तर फरवरी 2017 को देखा गया था। बीते शुक्रवार को रुपया 22 पैसे टूटकर 66.86 के स्तर पर कारोबार कर बंद हुआ था।

रुपये के गिरने से पड़ेगा यह असर
कच्चा तेल होगा महंगा

रुपये के कमजोर होने सबसे बुरा असर कच्चे तेल पर पड़ेगा। अगर कच्चा तेल महंगा होता तो फिर देश में पेट्रोल-डीजल का दाम भी बढ़ जाएगा, जिससे आम लोगों के दैनिक जीवन पर काफी असर पड़ेगा। डीजल बढ़ने से जहां शहरों में दूध, फल, सब्जियां महंगी हो जाएंगी, वहीं दूसरी तरफ आना-जाना भी बढ़ जाएगा। 

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इंपोर्ट बिल बढ़ने से महंगे होंगे मोबाइल, कार, टीवी

रुपया कमजोर होने की स्थिति में भारत जहां भी डॉलर के मुकाबले पेमेंट करता है, वह महंगा हो जाएगा। सीधे तौर पर समझें तो अब देश में विदेश से आने वाले टीवी, मोबाइल और कारों के कल-पुर्जे महंगे हो जाएंगे। इससे इन्हें खरीदने पर ज्यादा जेब ग्राहकों को ढीली करनी पड़ेगी। 

विदेश में घूमना, बच्चों की पढ़ाई पर होगा असर
डॉलर के मजबूत होने से अगर आपका बच्चा विदेश में पढ़ाई कर रहा है तो अब यह भी महंगा हो जाएगा। अब आपको पहले के मुकाबले थोड़े ज्यादा पैसे भेजने होंगे।विदेश की यात्रा आपको थोड़ी महंगी पड़ेगी क्योंकि आपको डॉलर का भुगतान करने के लिए ज्यादा भारतीय रुपये खर्च करने होंगे। 

सरकार की टैक्स से ऐसे बढ़ती गई कमाई
वित्त मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2013-14 में केंद्र सरकार को पेट्रोलियम पदार्थों पर टैक्स एवं सेस के मद में 88,600 करोड़ रुपये का राजस्व मिला था। यह 2014-15 में बढ़ कर 1,05,653 करोड़ रुपये, 2015-16 में 1,85,956 करोड़ रुपये, 2016-17 में 2,53,254 करोड़ रुपये और वर्ष 2017-18 में दिसंबर तक 2,01,592 करोड़ रुपये पर आ गया था। 2018-19 के बजट में कुल 2,57,850 करोड़ रुपये के राजस्व वसूली का लक्ष्य तय किया है। यह वर्ष 2013-14 में हुई कुल वसूली के मुकाबले 2.91 गुना ज्यादा है।
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