तेल की कीमत 120 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंचने की संभावना
अमेरिकी वित्तीय सेवा कंपनी जेपी मॉर्गन ने चेतावनी दी है कि अगर ईरान और इस्राइल का संघर्ष बढ़ता है तो तेल की कीमतें 120 डॉलर प्रति बैरल तक बढ़ सकती है। इससे महंगाई बढ़ने के साथ-साथ भारत का चालू खाता घाटा बढ़ेगा। शुक्रवार को वैश्विक तेल बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड 7.44 प्रतिशत बढ़कर 74.52 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया। एक अन्य जानकार- जियोजित इन्वेस्टमेंट्स लिमिटेड के शोध प्रमुख विनोद नायर ने कहा कि ब्रेंट कच्चे तेल की कीमतें 76 डॉलर प्रति बैरल के करीब पहुंच गईं, जो इस साल का उच्चतम स्तर है।
शिपिंग फर्म को अनेक परेशानियों का सामना करना पड़ेगा
कच्चे तेल की अधिक कीमतों के कारण शिपिंग फर्म की परिचालन लागत बढ़ जाएगी। जहाजों के मार्ग बदलने से आयात-निर्यात के दौरान अधिक लंबा सफर तैय करना होगा, इससे माल ढोने का शुल्क और डिलिवरी का समय भी बढ़ेगा। भू- राजनीतिक तनाव से संघर्ष-ग्रस्त जलक्षेत्रों में चलने वाले जहाजों के बीमा प्रीमियम में भी वृद्धि होगी। इससे वैश्विक व्यापार लागत पर दबाव बढ़ेगा।
भारतीय परिवारों और उद्योगों पर पड़ेगा असर
तेल की कीमतों में उछाल से आम आदमी और व्यवसायों पर भी बड़ा असर पड़ेगा। उपभोक्ता का बजट प्रभावित होगा और खर्च में कमी आएगी। इसके अलावा, कच्चे माल के रूप में तेल पर निर्भर उद्योगों को उत्पादन लागत में वृद्धि का सामना करना पड़ सकता है। इससे उन्हें प्रतिस्पर्धा करने में परिशानियों का सामना करना पड़ेगा। अक्सर देखा गया है कि भू-राजनीतिक तनाव का असर केवल उन दो देशों पर ही नहीं पड़ता बल्कि इससे कहीं न कहीं पूरी दुनिया प्रभावित होती है।