सवाल: मांसाहारी थाली की कीमत में 1% की गिरावट के पीछे क्या वजह है?
जवाब: मांसाहारी थाली के सस्ता होने का सबसे मुख्य कारण ब्रॉयलर (मुर्गे) की कीमतों में कमी आना है। एक मांसाहारी थाली की कुल लागत में ब्रॉयलर की हिस्सेदारी लगभग 50 प्रतिशत होती है। सालाना आधार पर ब्रॉयलर की कीमतों में दो प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है, जिससे पूरी मांसाहारी थाली की कीमत नीचे आ गई।
सवाल: दालों के दाम और सप्लाई को लेकर रिपोर्ट में क्या अच्छी खबर है?
जवाब: दालों के मोर्चे पर आम आदमी के लिए राहत की खबर है। मासिक आधार पर दालों की कीमतों में छह प्रतिशत की कमी आई है। रिपोर्ट के अनुसार, जुलाई-जून मार्केटिंग वर्ष के लिए अरहर का स्टॉक इस साल 20 प्रतिशत ज्यादा रहने का अनुमान है। वहीं, जनवरी-दिसंबर मार्केटिंग वर्ष के लिए चने का स्टॉक भी लगभग 10 प्रतिशत ज्यादा है। इसी ज्यादा स्टॉक के कारण दालों की कीमतों पर नीचे की ओर दबाव बना हुआ है।
सवाल: क्या गैस और तेल की कीमतों ने भी थाली का बजट बढ़ाया है?
जवाब: जी हां, टमाटर के अलावा रसोई गैस और खाद्य तेल ने भी रसोई का बजट बढ़ाया है। रिपोर्ट के मुताबिक, वैश्विक सप्लाई चेन में आई बाधाओं के कारण खाद्य तेल की कीमतों में 6 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है। इसके अलावा, लिक्विफाइड पेट्रोलियम गैस (एलपीजी) सिलेंडर की कीमत भी 14 प्रतिशत बढ़ गई है। इन्हीं महंगे कारकों ने प्याज-आलू से मिलने वाली राहत को सीमित कर दिया।
सवाल: अब आगे क्या?
जवाब: जहां एक तरफ आलू, प्याज और दालों के बेहतर स्टॉक ने रसोई का बजट सुधारने में मदद की, वहीं टमाटर, खाद्य तेल और रसोई गैस की महंगाई ने आम आदमी की जेब पर दबाव बनाए रखा। आने वाले समय में सब्जियों की पैदावार और वैश्विक सप्लाई चेन की स्थिति ही यह तय करेगी कि खाद्य महंगाई से आम आदमी को पूरी तरह राहत मिलेगी या नहीं।