पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और होर्मुज जलडमरूमध्य के आसपास सप्लाई बाधाओं के बीच भारतीय रिफाइनिंग कंपनियों के लिए मुनाफे का नया मौका बनता दिख रहा है। मॉर्गन स्टैनली की रिपोर्ट के मुताबिक, एक तरफ भारत की कच्चे तेल आपूर्ति शृंखला पर अल्पकालिक दबाव है, वहीं दूसरी तरफ एशिया में सप्लाई तंगी से रिफाइनिंग मार्जिन बढ़ने के कारण विविध स्रोतों से तेल खरीदने वाले भारतीय रिफाइनरों को फायदा हो सकता है।
ब्रोकरेज फर्म ने कहा कि भारत अभी भी पश्चिम एशिया से आने वाले तेल प्रवाह पर काफी हद तक निर्भर है, क्योंकि उसकी कुल तेल जरूरतों का बड़ा हिस्सा इसी क्षेत्र से होकर आता है। रिपोर्ट के अनुसार, भारत और चीन की 40-50 प्रतिशत तेल जरूरतें होर्मुज जलडमरूमध्य के रास्ते पूरी होती हैं। ऐसे में खाड़ी क्षेत्र में किसी भी तरह की रुकावट एशियाई देशों की ऊर्जा आपूर्ति शृंखला के लिए खतरा बन सकती है।
हालांकि, मॉर्गन स्टैनली का मानना है कि मौजूदा समय में भंडार और वैकल्पिक सप्लाई रूट भारत को राहत दे सकते हैं। रिपोर्ट में कहा गया है कि एशिया-प्रशांत क्षेत्र में कच्चे तेल और पेट्रोलियम उत्पादों का भंडार 30 से 200 दिनों तक का है। इसके अलावा भारत पहले से ही दूसरे सप्लायर्स से खरीद बढ़ाने में जुटा है।
आपूर्ति जोखिम कम करने के लिए भारत ने रियायती दरों पर मिलने वाले रूसी कच्चे तेल, खासकर यूराल्स ग्रेड, की खरीद बढ़ाई है। रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिका द्वारा रूसी तेल आयात पर लगे प्रतिबंधों में 30 दिनों की छूट दिए जाने के बाद भारत ने इस दिशा में तेजी दिखाई है। साथ ही, भारत ईरान के साथ भी बातचीत कर रहा है ताकि एलपीजी और कच्चा तेल लेकर आने वाले 20 से अधिक टैंकरों को सुरक्षित मार्ग मिल सके।
मॉर्गन स्टैनली ने यह भी कहा कि अगर पश्चिम एशिया में यह व्यवधान लंबे समय तक बना रहता है, तो भारत का रिफाइनिंग सेक्टर इससे फायदा भी उठा सकता है। एशिया में सप्लाई की तंगी और निर्यात पर अंकुश के कारण रिफाइनिंग मार्जिन बढ़े हैं। रिपोर्ट के अनुसार, पिछले एक हफ्ते में पेट्रोल, डीजल, जेट फ्यूल, नैफ्था और फ्यूल ऑयल की कीमतों में 18 से 30 प्रतिशत तक बढ़ोतरी दर्ज की गई है।