कभी बड़े संस्थानों तक सीमित रहे बॉन्ड अब अच्छा रिटर्न चाहने वाले आम निवेशकों के पसंदीदा विकल्प बन गए हैं। एफडी, सोना या शेयर के अलावा एक और निवेश विकल्प है, वह है कॉरपोरेट बॉन्ड। इसमें निवेश का गणित बताती रिपोर्ट-
नियमों और टेक्नोलॉजी में बदलावों के कारण बॉन्ड अब आम निवेशकों के लिए पहले से कहीं ज्यादा सुलभ, सुरक्षित और लाभदायक बन गए हैं। ये धीरे-धीरे लोकप्रिय होते जा रहे हैं। भारत का कॉरपोरेट बॉन्ड बाजार तेजी से बढ़ रहा है। यह 2014 में सिर्फ तीन अरब डॉलर का था, जो 2024 में बढ़कर 147 अरब डॉलर तक पहुंच गया। पिछले एक दशक में लगभग 54 फीसदी की सालाना वृद्धि हुई है। यह सिर्फ वृद्धि नहीं, बल्कि निवेशकों के बढ़ते विश्वास और एक परिपक्व वित्तीय सिस्टम का सबूत भी है।
सख्त नियम : सिर्फ मजबूत कंपनियां ही बॉन्ड जारी कर सकती हैं।
अनिवार्य क्रेडिट रेटिंग : बॉन्ड की रेटिंग क्रिसिल और इक्रा जैसी एजेंसियां करती हैं, जिससे आपको जोखिम समझने में मदद मिलती है।
पारदर्शी खुलासा : कंपनियां पारदर्शी तरीके से नियमित फाइनेंशियल अपडेट देती हैं ताकि निवेशक हमेशा सूचित रहें।
संस्थागत भागीदारी : म्यूचुअल फंड और बैंक जैसे बड़े निवेशक भी सक्रिय रूप से शामिल हैं, जिससे बाजार में भरोसा व स्थिरता आती है।
ज्यादा लिक्विडिटी : डीमैट आधारित ट्रेडिंग के कारण जरूरत पड़ने पर आसानी से बाहर निकल सकते हैं। ग्रिप जैसे कई प्लेटफॉर्म कभी भी बेचने की सुविधा देते हैं, जिससे तरलता सुनिश्चित होती है।
अब खुदरा निवेशक भी बॉन्ड में हो रहे शामिल
हाल तक कॉरपोरेट बॉन्ड में निवेश अधिकतर संस्थागत निवेशकों तक सीमित था। ऐसा इसलिए क्योंकि न्यूनतम निवेश 10 लाख या उससे अधिक था। 2023 में सेबी ने आम निवेशकों के लिए भी रास्ता खोल दिया।
अब आप कई बॉन्ड में सिर्फ 10,000 रुपये से निवेश कर सकते हैं। कुछ में तो 1,000 रुपये से भी कम में निवेश संभव है। स्टॉक एक्सचेंज के जरिये एक दिन में ही निपटान होता है। बॉन्ड डीमैट खाते में भेज दिए जाते हैं। इन बदलावों ने खुदरा निवेशकों की भागीदारी बढ़ाई है।
ग्रिप इन्वेस्ट की रिपोर्ट के मुताबिक, सिर्फ पांच तिमाहियों में निवेश पांच गुना बढ़ा है। 71 फीसदी लोग फिर से निवेश करते हैं। कई निवेशकों ने 15 माह में लगातार फिर से निवेश कर 10 लाख या उससे ज्यादा का पोर्टफोलियो बना लिया।
चाहे आप बेहद सतर्क बचतकर्ता हों, या अपने पोर्टफोलियो में विविधता चाहते हों। बॉन्ड पर गंभीरता से विचार करना बहुत मायने रखता है। डिजिटल तरीके से निवेश करना आसान हो गया है। इससे भरोसा बढ़ा है। ऐसे में यह विकल्प आज के निवेशकों के लिए एकदम उपयुक्त है। बॉन्ड में निवेश का युग अब आ चुका है। -निखिल अग्रवाल, सीईओ, ग्रिप इन्वेस्ट