कांग्रेस ने अदाणी समूह में एलआईसी के निवेश को लेकर निशाना साधा है। पार्टी के वरिष्ठ नेता जयराम रमेश ने आरोप लगाया कि सार्वजनिक धन को चुनिंदा कॉरपोरेट समूहों को फायदा पहुंचाने के लिए इस्तेमाल किया गया और इससे पॉलिसीधारकों को भारी नुकसान हुआ।
अमेरिकी मीडिया के उस दावे को एलआईसी ने पूरी तरह खारिज कर दिया जिसमें बताया गया था कि निगम ने अदाणी समूह को फायदा पहुंचाने के लिए 32,000 करोड़ का निवेश किया था। दावे को आधार बनाकर कांग्रेस ने सरकार को घेरते हुए कहा कि अगर दावा गलत है तो एलआईसी ने निवेश क्यों किया। इन आरोपों को खारिज करते हुए एलआईसी ने साफ किया कि सभी फैसले बोर्ड की नीति के अनुसार और स्वतंत्र रूप से लिए गए। निवेश से पहले पूरी तरह जांच पड़ताल की गई है।
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आरोपों पर शनिवार को एलआईसी ने स्पष्ट किया कि ऐसा कोई दस्तावेज या योजना कभी तैयार नहीं की गई। एलआईसी ने दोहराया कि वित्तीय सेवा विभाग या किसी अन्य संस्था का निवेश निर्णयों में कोई रोल नहीं है। एलआईसी ने कहा कि वर्षों से वह कंपनियों में निवेश के निर्णय उनके फंडामेंटल और विस्तृत जांच-पड़ताल के आधार पर लेता रहा है। 2014 से 2025 तक भारत की टॉप 500 कंपनियों में एलआईसी का निवेश दस गुना बढ़कर 1.56 लाख करोड़ रुपये से 15.6 लाख करोड़ रुपये हो गया है, जो मजबूत फंड प्रबंधन को दर्शाता है। एलआईसी ने यह भी कहा कि निवेश की पूरी प्रक्रिया सभी नियमों, कानून और नियामक दिशा-निर्देशों के अनुसार की गई है और यह सभी हितधारकों के सर्वोत्तम हित में है।
अन्य कंपनियों में भी एलआईसी का निवेश
एलआईसी के मुताबिक, मई 2025 में उसने अदाणी पोर्ट्स एंड सेज (एपीसेज) में 57 करोड़ डॉलर का निवेश किया था। एलआईसी का अदाणी समूह में निवेश कुल ऋण का 2 प्रतिशत से कम है। एलआईसी ने स्पष्ट किया कि अदाणी स्टॉक्स में उसका निवेश 4 प्रतिशत है, जबकि रिलायंस में 6.94 प्रतिशत, आईटीसी में 15.86 प्रतिशत, एचडीएफसी बैंक में 4.89 प्रतिशत और एसबीआई में 9.59 प्रतिशत है। टीसीएस में एलआईसी का निवेश 5.02 प्रतिशत है, जिसकी कीमत 5.7 लाख करोड़ रुपये है। एलआईसी ने कहा कि रिपोर्ट में निवेश निर्णय को बदनाम करने और उसकी प्रतिष्ठा को धूमिल करने की कोशिश की गई है।
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मित्र की जेब भरने में लगी सरकार : खरगे
वाशिंगटन पोस्ट की रिपोर्ट पर विपक्ष खासकर कांग्रेस ने मोदी सरकार पर कड़ा प्रहार किया है। कांग्रेस ने पूरे मामले की जांच लोक लेखा समिति (पीएसी) से कराने की मांग की है। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने कहा, सरकार की डायरेक्ट बेनेफिट ट्रांसफर (डीबीटी) योजना का असली फायदा आम जनता को नहीं, बल्कि मोदी के करीबी मित्रों को हो रहा है। क्या एलआईसी की 30 करोड़ पॉलिसी धारकों की मेहनत की कमाई को अदाणी समूह के राहत पैकेज (बेलआउट) में इस्तेमाल करना विश्वासघात और लूट नहीं है। मई 2025 में एलआईसी का पैसा अदाणी की कंपनियों में निवेश क्यों किया गया और 32,000 करोड़ रुपये निवेश की योजना क्यों बनाई गई।